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'आपके लिए तो युवा मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष ही काफी है' राहुल की डिबेट वाली चुनौती पर अमित शाह का पलटवार

मौका तो था करनाल में 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्रा के समापन का, मगर इस मौके पर अमित शाह ने राहुल गांधी की चुनौती का जवाब भी दिया और संसद में चर्चा करने की चुनौती भी दी. उन्होंने कहा कि अगर राहुल गांधी को एसआईआर पर चर्चा करनी है तो सरकार संसद का विशेष सत्र बुलाने को तैयार है.

'आपके लिए तो युवा मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष ही काफी है' राहुल की डिबेट वाली चुनौती पर अमित शाह का पलटवार
Image Credit: हरियाणा के करनाल में अमित शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को हरियाणा के करनाल में भारतीय जनता पार्टी की 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्रा के समापन कार्यक्रम में कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधा. उन्होंने राहुल गांधी को संसद में आकर चर्चा करने की चुनौती देते हुए कहा कि अगर उन्हें SIR की प्रक्रिया पर चर्चा करनी है तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखें. भाजपा इस मुद्दे पर चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने को तैयार है. इस दौरान अमित शाह ने राहुल गांधी की डिबेट वाली चुनौती का जवाब दिया और कहा उनके लिए हरियाणा का युवा मोर्चा का अध्यक्ष ही काफी है.

गृह मंत्री ने कहा कि 22 अक्टूबर से 5 नवंबर तक देशभर के सभी मुख्यालयों पर 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' अभियान चलाया गया. उन्होंने दावा किया कि हर जगह भाजपा की रैलियों में उत्साह और बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी देखने को मिली. शाह ने कहा कि 2024 में लगातार तीसरी बार देश की जनता ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री चुना. इसके बाद हुए चुनावों में भी कांग्रेस और राहुल गांधी को हार का सामना करना पड़ा.

'जनता कांग्रेस और इंडी गठबंधन के साथ नहीं'

उन्होंने हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली, बिहार, असम, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी के चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि जनता कांग्रेस और इंडी गठबंधन के साथ नहीं है. शाह ने कहा कि हरियाणा की जनता ने लगातार दो बार मनोहर लाल को मुख्यमंत्री बनाया और तीसरी बार नायब सिंह सैनी को जिम्मेदारी सौंपी.

संसद में चर्चा को लेकर राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए गृह मंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में संसद चर्चा का सर्वोच्च मंच है, लेकिन कांग्रेस संसद की कार्यवाही नहीं चलने देती. उनके मुताबिक, संसद में मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय शोर-शराबा और बहिष्कार करना कांग्रेस की राजनीतिक शैली बन गई है.

'हरियाणा में किसी भी चौराहे की जगह बता दें'

गृह मंत्री ने कहा कि संसद में कानून बनाने, देश की समस्याओं और जनता की भलाई के लिए बनाई जाने वाली योजनाओं पर चर्चा होनी चाहिए, न कि सड़कों पर भीड़ जुटाकर अराजकता फैलानी चाहिए. उन्होंने राहुल गांधी को चुनौती देते हुए कहा कि अगर उन्हें सड़क पर ही चर्चा करने का शौक है तो हरियाणा में किसी भी चौराहे की जगह बता दें. भाजपा युवा मोर्चा का अध्यक्ष वहां आकर उनसे चर्चा करेगा.

चुनाव आयोग और एसआईआर को लेकर शाह ने कहा कि राहुल गांधी अपनी हार के लिए चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. उन्होंने सवाल किया कि 2014 और 2019 के चुनावों में एसआईआर कहां था, जब कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा था. शाह ने कहा कि 2024 में भी एसआईआर नहीं था, इसके बावजूद कांग्रेस चुनाव हार गई.

2024 में भी एसआईआर नहीं था, इसके बावजूद कांग्रेस चुनाव हार गई

उन्होंने हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि वहां भी एसआईआर नहीं हुआ था. इसके बावजूद कांग्रेस को हार मिली. शाह ने राहुल गांधी के एक करोड़ वोट हटाए जाने के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर उन्हें एसआईआर पर चर्चा करनी है तो प्रधानमंत्री को पत्र लिखें. उन्होंने कहा कि भाजपा इस विषय पर संसद का विशेष सत्र बुलाकर चर्चा कराने के लिए तैयार है.

गृह मंत्री ने एसआईआर को लेकर कांग्रेस पर घुसपैठियों को बचाने का आरोप भी लगाया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस की पार्टी इस प्रक्रिया का विरोध इसलिए कर रही है, क्योंकि वह घुसपैठियों के नाम मतदाता सूची में बनाए रखना चाहती है. शाह ने कहा कि भाजपा का संकल्प है कि घुसपैठियों की पहचान की जाएगी, उनके नाम मतदाता सूची से हटाए जाएंगे और उन्हें चुन-चुनकर देश से बाहर निकालने का काम किया जाएगा. उन्होंने कांग्रेस की रैली को वोट बचाने के बजाय घुसपैठियों को बचाने की रैली बताया.

1984 के सिख विरोधी दंगों का जिक्र

दिल्ली में कांग्रेस की रैली का जिक्र करते हुए शाह ने दावा किया कि पार्टी ने 10 लाख लोगों को जुटाने का आह्वान किया था, जबकि मैदान की क्षमता 70 हजार थी और इसके बावजूद मैदान आधा खाली रहा. उन्होंने 1 नवंबर को रैली आयोजित करने पर भी कांग्रेस को घेरा और 1984 के सिख विरोधी दंगों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि उस दिन कांग्रेस की भूमिका को देश याद करता है.

अपने संबोधन के आखिरी हिस्से में अमित शाह ने राहुल गांधी के राजनीतिक नेतृत्व और कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि 2007 में राहुल गांधी के कांग्रेस महासचिव बनने के समय पार्टी के पास 1200 विधायक थे. जब वह उपाध्यक्ष बने तो विधायकों की संख्या 900 रह गई और अध्यक्ष बनने के समय यह घटकर 700 हो गई. गृह मंत्री ने दावा किया कि 2022 में भारत जोड़ो यात्रा के समय कांग्रेस के विधायकों की संख्या और घटकर 600 रह गई. 

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About the Author

Gaurav Pandey

Gaurav Pandey

Gaurav is a multimedia journalist writing across a wide range of subjects, including politics, sports, cinema, explainers, opinion and Delhi Haryana civic issues. With analysis, he regularly covers social issues and public policy through in-depth. With around nine years of experience, he has worked with India Today, Hindustan Times, and Network18, producing stories with a strong focus on facts and ground reality. He studied journalism at IIMC Delhi.
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