फैन क्लब, अनोखा स्टाइल, Mass अपील... रजनीकांत के आगे फीकी पड़ी उम्र, कैसे 75 साल में भी कायम है ‘थलाइवा’ का जलवा?
Rajinikanth Stardom At 75: उम्र के जिस पड़ाव पर बड़े-बड़े कलाकारों की चमक फीकी पड़ने लगती है, लेकिन रजनीकांत का जादू और कायम होता जा रहा है. ‘जेलर 2’ की बंपर कमाई ने साबित कर दिया कि थलाइवा सिर्फ एक नाम नहीं, एक जज्बा हैं. बस कंडक्टर से बॉक्स ऑफिस के बेताज बादशाह बनने की ये दास्तान आज भी हर किसी को हैरान कर देती है.
भारतीय सिनेमा में सितारों को चाहने वाले बहुत हैं, लेकिन कुछ चेहरे ऐसे होते हैं, जो परदे से उतरकर लोगों की जिंदगी का हिस्सा बन जाते हैं. जैसे हिंदी सिनेमा में अमिताभ बच्चन ने दशकों तक लोगों के दिलों पर राज किया और आज भी करते आ रहे हैं. आज भी उनके घर जलसा के बाहर हजारों में फैंस की भीड़ सिर्फ उनकी एक झलक पाने के लिए इकट्ठा होती है. ठीक वैसा ही साउथ सिनेमा में रजनीकांत के साथ नजर आता है. आमतौर पर 60-65 की उम्र पार करते ही किसी भी एक्टर की चमक बॉक्स ऑफिस पर फीकी पड़ने लगती है. लोग नए चेहरों को देखने लगते हैं और पुरानी पीढ़ी धीरे-धीरे लीड किरदारों से साइड रोल में नजर आने लगते हैं.
मगर रजनीकांत के मामले में सिनेमा का ये पुराना नियम पूरी तरह से बेअसर साबित हुआ है. हाल ही में रिलीज हुई उनकी फिल्म ‘जेलर 2’ के शुरुआती आंकड़ों ने फिल्म ट्रेड एक्सपर्ट्स को फिर से चौंका दिया है. ट्रेड रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस फिल्म ने सिर्फ 2 दिनों के अंदर दुनियाभर में 200 करोड़ का शानदार आंकड़ा पार कर तहलका मचा दिया. 75 कसाल की उम्र में किसी एक्टर के नाम पर इतना बड़ा इन्वेस्टमेंट होना और फिर लोगों का सिनेमाघरों पर टूट पड़ना वाकई एक हैरान करने वाला सिनेमाई अजूबा है. लोग सिर्फ फिल्म देखने नहीं आते, बल्कि टिकट काउंटर्स पर एक फेस्टिवल जैसा माहौल बन जाता है, लेकिन इसके पीछे वजह क्या है?
कैसे दशकों बीत जाने के बाद भी रजनीकांत का ये जादू जरा भी कम नहीं हुआ?
भारतीय सिनेमा में कई बड़े एक्टर आए और चले गए, लेकिन रजनीकांत का जादू आज भी वैसा ही छाया हुआ है. इसकी असली वजह ये है कि वे सिर्फ एक एक्टर बनकर नहीं रहे, बल्कि लोगों के दिलों में एक खास पहचान बना चुके हैं. उनकी कोई भी नई फिल्म आना फैंस के लिए किसी बड़े त्योहार से कम नहीं होता, जहां लोगों को कहानी से ज्यादा सिर्फ उनके पर्दे पर आने का इंतजार रहता है.
यही वजह है कि 75 साल की उम्र में भी उनको लेकर थिएटर में वही पुराना जोश और शोर देखने को मिलता है, जो सालों पहले उनके दौर में हुआ करता था. रजनीकांत का जादू आज भी इसलिए कायम है, क्योंकि उनकी अपनी एक अलग पहचान है. उनका गजब का स्टाइल, डायलॉग बोलने का यूनिक स्टाइल, बॉडी लैंग्वेज और पर्दे पर आते ही छा जाने वाली मौजूदगी उन्हें बाकी सभी हीरोज से बिल्कुल अलग खड़ा करती है.
सबसे खास बात ये है कि कई पीढ़ियां उनकी फिल्में देखकर बड़ी हुई हैं. इसी वजह से उनकी फैन फॉलोइंग सिर्फ आजकल के नौजवानों तक सीमित नहीं है, बल्कि दादा, पिता और बेटा, यानी घर की तीनों पीढ़ियां उनके काम को दिल से पसंद करती हैं. पीढ़ियों से चला आ रहा यही जबरदस्त प्यार उनके स्टारडम की सबसे बड़ी ताकत है, जो वक्त बीतने के बाद भी कभी फीका नहीं पड़ा.
रजनीकांत की असली ताकत ये है कि आम जनता उनमें अपनी ही कहानी देखती है. एक मामूली बस कंडक्टर से उठकर देश के इतने बड़े मुकाम पर पहुंचना कोई छोटी बात नहीं है और यही बात हर किसी का दिल छू लेती है. इतने बड़े स्टार बनने के बाद भी उनके अंदर जरा भी घमंड नहीं आया.
उनकी सादगी ऐसी है कि लोग उन्हें किसी परदे के हीरो की तरह नहीं, बल्कि अपने परिवार के सदस्य जैसा मानते हैं. उनका ये जमीन से जुड़ा स्वभाव ही लोगों को सालों से उनका दीवाना बनाए हुए है. यही वजह है कि वक्त बदलता गया, पर उनका जादू आज भी वैसा ही बना हुआ है.
किसी भी सिंपल से सीन को यादगार बना देने की कला
आजकल फिल्मों में एक्शन और मारधाड़ तो बहुत से नए एक्टर भी कर लेते हैं, लेकिन रजनीकांत की बात ही कुछ अलग है. वे किसी भी सीधे-सादे सीन में अपने खास अंदाज से जान फूंक देते हैं. अगर वे किसी शांत कमरे में बस धीरे से चलकर आ भी जाएं, तो हॉल में बैठे लोगों की धड़कनें तेज हो जाती हैं. डायरेक्टर ने कहानी चाहे जितनी भी सिंपल रखी हो, लेकिन जैसे ही परदे पर रजनीकांत का कदम पड़ता है, पूरा माहौल एक नए जोश से भर जाता है. उनका चुपचाप खड़े रहना भी पूरे सीन का वजन बढ़ा देता है, इसी वजह से लोग उन्हें ‘सुपरस्टार’ मानते हैं.
उनकी फिल्मों में कई ऐसे सीन होते हैं, जो स्क्रिप्ट में शायद बिल्कुल आम से थे, लेकिन जब वे स्क्रीन पर आए, तो वही सीन हमेशा के लिए यादगार बन गए. उनका जेब से हाथ निकालना हो, हवा में सिगरेट या कोई भी चीज उछालना हो या फिर धूप में चश्मा पहनने का वो गजब तरीका हो. रजनीकांत अपनी हर छोटी सी हरकत को इस तरह पेश करते हैं कि लोग बस देखते रह जाते हैं. सच तो ये है कि लोग थिएटर में सिर्फ फिल्म की कहानी देखने नहीं जाते. वे तो बस ‘थलाइवा’ के उसी खास स्वैग और जलवे को अपनी आंखों से देखने खिंचे चले आते हैं.
रजनीकांत ने 1975 में तमिल फिल्म ‘अपूर्वा रागंगल’ से अपना एक्टिंग सफर शुरू किया था. अपने पांच दशक इस लंबे सफर में उन्होंने तमिल, हिंदी, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और बंगाली भाषा वाली 170 से ज्यादा फिल्मों में काम किया है. उनके खाते में ‘बिल्ला’, ‘मुरट्टू कालई’, ‘अन्नामलाई’, ‘बाशा’, ‘पदयप्पा’, ‘चंद्रमुखी’, ‘शिवाजी’, ‘रोबोट’, ‘कबाली’, ‘जेलर’, ‘कूली’ और ‘जेलर 2’ जैसी बड़ी हिट्स शामिल हैं. इनमें ‘बाशा’, ‘पदयप्पा’, ‘चंद्रमुखी’, ‘शिवाजी’ और ‘एंथिरन’ उनके करियर की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर मानी जाती हैं, जो आज भी फैंस की फेवरेट हैं.
‘थलाइवा’ का वो स्टाइल, जिसकी कोई बराबरी नहीं
हिंदी और भारतीय फिल्मों में कई बड़े स्टार्स आए और चले गए, लेकिन जैसा जलवा रजनीकांत का रहा है वैसा किसी और का देखने को नहीं मिलता. उनका ये अंदाज किसी फैंसी डिजाइनर कपड़ों या दिखावे पर नहीं टिका, बल्कि ये उनके उठने-बैठने, चलने-फिरने और बोलने के ढंग में झलकता है. तेजी से कदम बढ़ाना, बातचीत के बीच अचानक ठहर जाना और फिर अपने ही अंदाज में मंद-मंद मुस्कुरा देना, ये सब कुछ ऐसा है, जो कोई एक्टिंग स्कूल किसी को सिखा नहीं सकता.
यही अनोखा अंदाज और उनका बेफिक्र अंदाज उन्हें बाकी सारे एक्टर्स से अलग बनाता है. अक्सर देखा जाता है कि लोग उनकी नकल करने की पूरी कोशिश करते हैं, लेकिन उनकी जैसी लय और कॉन्फिडेंस कोई दूसरा पैदा नहीं कर पाता. उनके डायलॉग बोलने की रफ्तार और शब्दों के साथ खेलना दर्शकों को उनका दीवाना बना देता है.
उनके कुछ स्टाइल फैंस के दिल में उतर जाते हैं. 50 साल के लंबे करियर में कई दौर आए, सिनेमा की तकनीक पूरी तरह बदल गई, ब्लैक एंड व्हाइट से डिजिटल का जमाना आ गया, मगर रजनीकांत के सिग्नेचर अंदाज का खुमार लोगों के सिर से कभी कम नहीं हुआ. उनका ये अंदाज हर पीढ़ी के साथ और नया होता गया.
बस कंडक्टर से सुपरस्टार बनने की कहानी
रजनीकांत आज जिस मुकाम पर हैं, वो सिर्फ परदे की चमक-दमक का नतीजा नहीं है. उसके पीछे सालों की कड़ी मेहनत और संघर्ष छिपा है. बंगलुरु की सड़कों पर बस कंडक्टर का काम करने वाले शिवाजी राव गायकवाड़ का ‘सुपरस्टार’ बनना किसी जादू से कम नहीं. उन्होंने गरीबी और रोजमर्रा की उन दिक्कतों को बेहद करीब से देखा है, जिनसे हर आम हिंदुस्तानी रोज जूझता है. जब लोगों को ये बात समझ आती है कि उनका चहेता हीरो भी कभी उन्हीं की तरह पाई-पाई के लिए तरस चुका है, तो दिल का रिश्ता अपने आप बहुत गहरा हो जाता है.
यही अपनापन रजनीकांत को सबसे अलग बनाता है. यही वजह है कि दर्शक रजनीकांत में किसी दूर के सितारे को नहीं, बल्कि अपने ही किसी परिवार वाले की जीत को देखते हैं. एक ऐसा लड़का जिसके पास न तो कोई फिल्मी गॉडफादर था और न ही कोई बहुत बड़ा सहारा, उसने केवल अपनी लगन और मेहनत से देश के सबसे बड़े मुकाम को छू लिया. ये कहानी हर उस नौजवान को इंस्पायर करती है, जो किसी छोटे शहर या गांव में बैठकर बड़े सपने देखता है. उनकी लाइफ जर्नी उनके स्टारडम को सिर्फ सिनेमा तक नहीं, बड़ी इंस्पिरेशन बनाती है.
जब भी उनकी कोई नई फिल्म रिलीज होती है, तो लोगों को लगता है कि ये उनके अपने संघर्ष की जीत का एक उत्सव है. रजनीकांत के साथ फैंस का ये इमोशनल रिश्ता किसी भी बिजनेस के नफा-नुकसान से कई ज्यादा ऊपर होता है. इसी रिश्ते ने रजनीकांत को करियर के बुरे दौर में भी कभी टूटने नहीं दिया. जब कभी उनकी कोई फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कमजोर भी रही, तो दर्शकों ने उन्हें कभी नकारा नहीं, बल्कि अगली फिल्म में और ज्यादा प्यार लुटाया. 'जेलर 2' की बंपर शुरुआत भी इसी अटूट विश्वास की मजबूत बुनियाद पर खड़ी है.
सक्सेस हासिल करने के बाद भी कायम रखी सादगी
आमतौर पर शोबिज की दुनिया में थोड़ी-सी शोहरत मिलते ही लोगों का मिजाज बदल जाता है. सितारे आम जनता से दूरी बना लेते हैं और अपनी एक बनावटी दुनिया में कैद हो जाते हैं, लेकिन रजनीकांत ने पिछले कई दशकों से अपनी, जिस सादगी बरकरार रखा है, वो दुनिया भर के कलाकारों के लिए एक बड़ा सबक है.
परदे पर चमकीले विग और मेकअप के साथ नजर आने वाले थलाइवा असल जिंदगी में बिना किसी झिझक के अपने व्हाइट बालों और सिपंल से कुर्ते-पायजामे में लोगों के सामने आते हैं. उनका ये अवतार लोगों का दिल जीत लेता है. यही बात उन्हें बाकी सभी एक्टर्स से बिल्कुल अलग बनाती है. लोग उनके साथ सिर्फ हंसते या रोते नहीं हैं, बल्कि उनके हर एक्शन और जीत में अपनी रोज की परेशानियों से लड़ने की हिम्मत पाते हैं.
स्क्रीन पर जब रजनीकांत किसी बड़े विलेन को मजा चखाते हैं, तो सिनेमाघर में बैठा हर आम आदमी यही सोचता है कि उसने अपनी जिंदगी की सारी दिक्कतों और नाइंसाफी को हरा दिया है. परदे पर मिलने वाला यही सुकून उनके स्टारडम को कभी खत्म न होने वाला जलवा बना देता है. उनके इसी अंदाज पर लोग थिएटर में ‘थलाइवा’ के नारे लगाते हैं.
‘थलाइवा’ में फैंस को नजर आती है अपनी कहानी
रजनीकांत के पूरे सफर की सबसे खास बात ये है कि हर आम हिंदुस्तानी उनकी सक्सेस में खुद का देखता है. बस में खड़े होकर टिकट काटने वाले एक लड़के का पूरे देश का सबसे बड़ा सुपरस्टार बन जाना, सच में दिल को छू लेता है. उनका ये सफर हर उस इंसान को हिम्मत देता है, जो रोज मेहनत करता है. चाहे कोई रिक्शा चलाने वाला भाई हो या फिर किसी दफ्तर में काम करने वाला बाबू, हर किसी के दिल में यही बात बैठ जाती है कि जब रजनीकांत अपनी मेहनत से इतने बड़े मुकाम पर पहुंच सकते हैं, तो वो भी जिंदगी की जंग जीत सकते हैं.
रजनीकांत सिर्फ परदे के बड़े हीरो नहीं, बल्कि करोड़ों दिलों की सच्ची हिम्मत बन चुके हैं. लोग उनकी हर खुशी और गम को अपना मानकर जीते हैं और उनकी बातों से मुश्किलों से भिड़ने का हौसला पाते हैं. आज 75 की उम्र में भी उनका वही पुराना रुतबा पूरी तरह कायम है. उनकी नई फिल्म ‘जेलर 2’ ने आते ही महज दो दिनों के अंदर 200 करोड़ की जबरदस्त कमाई कर डाली. सच कहें तो ये सिर्फ टिकट काउंटर का कोई नया रिकॉर्ड नहीं, बल्कि पिछले 50 सालों से मिला लोगों का अटूट प्यार है, जिसकी वजह से ‘थलाइवा’ का जलवा बरकरार है.