App

‘बलवान’ के 34 साल: जिस इमेज ने सुनील शेट्टी को स्टार बनाया, उसी से बाहर निकलना क्यों जरूरी हो गया?

Suniel Shetty: बॉलीवुड एक्टर सुनील शेट्टी ने साल 1992 में फिल्म ‘बलवान’ से बॉलीवुड में कदम रखा और एक्शन हीरो की पहचान बनाई. जानिए कैसे उन्होंने अपनी 'माचो' इमेज का रिस्क लेकर ‘हेरा फेरी’ और ‘गोपी किशन’ जैसी फिल्मों से खुद को रीडिफाइन किया-

‘बलवान’ के 34 साल: जिस इमेज ने सुनील शेट्टी को स्टार बनाया, उसी से बाहर निकलना क्यों जरूरी हो गया?
Image Credit: जिस इमेज ने बनाया स्टार, उसी को तोड़कर बने ‘श्याम’!

Suniel Shetty: 11 सितंबर 1992 को रिलीज हुई ‘बलवान’ ने सुनील शेट्टी को बॉलीवुड में बतौर हीरो लॉन्च किया था. दिव्या भारती के साथ आई इस एक्शन फिल्म में सुनील का मजबूत कद-काठी वाला लुक और एक्शन अंदाज दर्शकों के लिए बिल्कुल नया था. फिल्म की सफलता ने उन्हें एक ऐसे हीरो के तौर पर पहचान दी, जिसकी स्क्रीन पर्सनैलिटी में ताकत, आक्रामकता और एक खास तरह का माचो अंदाज नजर आता था. लेकिन सुनील शेट्टी के करियर की दिलचस्प कहानी यहीं से शुरू होती है.

जिस इमेज ने सुनील शेट्टी को पहचान दिलाई, कुछ साल बाद उसी इमेज से बाहर निकलने के लिए उन्हें खुद रिस्क लेना पड़ा. ‘बलवान’ के 34 साल बाद उनके हालिया इंटरव्यू को देखें तो यह बदलाव महज फिल्मों के जॉनर बदलने की कहानी नहीं, बल्कि एक अभिनेता द्वारा अपनी बनाई हुई धारणा को चुनौती देने की कहानी नजर आती है.

एक्शन हीरो के रूप में उनकी छवि कैसे मजबूत हुई?

‘बलवान’ के बाद सुनील शेट्टी को लगातार एक्शन फिल्मों में देखा गया. ‘वक्त हमारा है’, ‘अंत’, ‘दिलवाले’ और बाद में ‘मोहरा’ जैसी फिल्मों ने उनकी एक्शन-हीरो वाली पहचान को और मजबूत किया. 90 के दशक में उनकी छवि ऐसे अभिनेता की बन गई थी, जो पर्दे पर मारधाड़, टफनेस और माचो प्रेजेंस के लिए जाना जाता था. ‘बॉर्डर’ में भी उन्होंने एक सैनिक की भूमिका निभाई, जहां उनका मजबूत और गंभीर स्क्रीन व्यक्तित्व काम आया. यानी शुरुआती करियर में उनकी सबसे बड़ी यूएसपी (USP) उनकी फिजिकल प्रेजेंस ही बन गई थी.
बलवान' में सुनील शेट्टी के साथ कोई एक्ट्रेस काम करने को नहीं थीं तैयार, तब  दिव्या भारती का मिला साथ - suniel shetty divya bharti starrer film balwaan  completes 29 years pr -

माचो इमेज उनके करियर के लिए सीमा क्यों बनने लगी थी?

लेकिन सुनील शेट्टी के लिए यही यूएसपी आगे चलकर एक सीमा भी बन सकती थी. राज शमानी के साथ बातचीत में उन्होंने अपने शुरुआती दौर की उस इमेज को याद किया है. उनके मुताबिक उन्हें जिस तरह का 'माचो' या 'गुंडा' चेहरा समझा गया, वह उनकी पूरी पर्सनैलिटी या एक्टिंग रेंज नहीं थी. इसलिए उन्होंने जानबूझकर ऐसे किरदारों और फिल्मों का चुनाव करना शुरू किया, जो लोगों के मन में उनके बारे में बनी धारणा को तोड़ सकें.

'हेरा फेरी' ने उनके करियर का रुख कैसे बदला?

इसके बाद 2000 में आई ‘हेरा फेरी’ ने वह काम किया, जो शायद सुनील शेट्टी के इमेज ट्रांसफॉर्मेशन का सबसे बड़ा उदाहरण बन गया. प्रियदर्शन की इस फिल्म में वह अक्षय कुमार और परेश रावल के साथ ‘श्याम’ के किरदार में नजर आए. यहां उनके पास न कोई बड़े एक्शन सीक्वेंस थे, न वही दबंग पर्सनैलिटी, जिसके लिए वह जाने जाते थे. उनका किरदार एक साधारण, परेशान और परिस्थितियों में फंसा हुआ इंसान था. सबसे खास बात यह थी कि उनकी कॉमेडी का अंदाज लाउड नहीं, बल्कि काफी नेचुरल और स्ट्रेट-फेस्ड था. ‘हेरा फेरी’ बाद में कल्ट कॉमेडी बन गई और श्याम उनके सबसे यादगार किरदारों में शामिल हो गया.

Prime Video: Hera Pheri

क्या स्टीरियोटाइप तोड़ना सुनील शेट्टी का सोचा-समझा रिस्क था?

दिलचस्प यह है कि सुनील शेट्टी के लिए इस तरह की फिल्मों की तरफ जाना कोई संयोग नहीं था. राज शमानी के इंटरव्यू में वह बताते हैं कि उन्होंने ‘हेरा फेरी’ और ‘गोपी किशन’ जैसी फिल्मों के जरिए अपने ऊपर चिपकी माचो इमेज को बदलने का रिस्क लिया. यानी जिस समय किसी स्थापित अभिनेता के लिए अपनी सफल इमेज से छेड़छाड़ करना खतरा माना जा सकता था, उस समय सुनील ने उसी खतरे को स्वीकार किया.

स्टारडम देने वाली इमेज ही करियर की सीमा कैसे बन जाती है?

आज ‘बलवान’ की रिलीज के 34 साल बाद पीछे मुड़कर देखें तो सुनील शेट्टी की कहानी को सिर्फ एक एक्शन हीरो के उभार के तौर पर देखना अधूरा होगा. असली कहानी शायद उस फैसले में छिपी है, जब उन्होंने समझा कि जो इमेज आपको स्टार बनाती है, वही अगर आपकी पूरी पहचान बन जाए तो वह आपके करियर की सबसे बड़ी सीमा भी बन सकती है.

Suniel Shetty's comment 'husband career banayega' sparks outrage; actor  gets slammed

‘श्याम’ का किरदार आज भी दर्शकों के दिल में क्यों बसा है?

‘बलवान’ ने सुनील शेट्टी को एक पहचान दी थी, लेकिन ‘गोपी किशन’ और ‘हेरा फेरी’ जैसे फैसलों ने उस पहचान को एक ही खांचे में बंद होने से बचाया. यही वजह है कि आज जब उनके करियर की बात होती है तो चर्चा सिर्फ उनके एक्शन सीन्स की नहीं होती; ‘श्याम’ जैसे किरदार भी उतनी ही मजबूती से याद किए जाते हैं.

सुनील शेट्टी के करियर का सबसे बड़ा बदलाव क्या था?

यानी सुनील शेट्टी के करियर का सबसे बड़ा बदलाव शायद यह नहीं था कि उन्होंने एक्शन छोड़कर कॉमेडी की. असली बदलाव यह था कि उन्होंने यह मानने से इनकार कर दिया कि दर्शक उन्हें सिर्फ एक ही तरह के किरदार में देखना चाहते हैं.

Add Zee News as a Preferred Source

About the Author

Kajol Gupta

Kajol Gupta

काजोल गुप्ता जी न्यूज में सब एडिटर हैं और पिछले साढ़े 3 साल से डिजिटल मीडिया में काम कर रही हैं. कुछ समय तक उन्होंने नेशनल, बिहार-झारखंड और पॉलिटिकल बीट पर काम किया. इसके बाद बीते 2 साल से उन्होंने जी न्यूज में एंटरटेनमेंट बीट पर काम करना शुरू किया. अभी फिलहाल वह एंटरटेनमेंट बीट पर ही एक्टिव हैं. जी न्यूज से पहले उन्होंने सुदर्शन चैनल, इनखबर वेबसाइट और फ्रीलांस काम किया है. पिछले साढ़े तीन साल से जी न्यूज के साथ काम कर रही हैं. उन्होंने मास कम्युनिकेशन में सिंघानिया यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन और माखनलाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में ही पोस्ट ग्रेजुएशन की है. पत्रकारिता के साथ उन्हें कहानियां लिखने का भी काफी शौक है. आप काजोल के साथ kajol.gupta@India.com पर या एक्स और इंस्टाग्राम हैंडल्स पर कनेक्ट कर सकते है. सीधे ईमेल पर इनसे जुड़ सकते हैं.     
Read More