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बॉलीवुड में हर शुक्रवार को फिल्मों की कमाई और नए रिकॉर्ड्स को लेकर खूब बातें होती हैं. ऐसे समय में जहां कई सितारे सिर्फ आंकड़ों की दौड़ में भागते नजर आते हैं, वहीं कुछ कलाकार ऐसे भी होते हैं, जिनके लिए कमाई या आंकड़े ही सब कुछ नहीं होते. श्रद्धा कपूर भी इसी सोच के साथ आगे बढ़ रही हैं. ‘स्त्री’ और ‘स्त्री 2’ जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों से लोगों के दिलों पर छा जाने वाली श्रद्धा इन दिनों अपनी आने वाली फिल्म ‘ईठी’ को लेकर सुर्खियों में हैं. हाल ही में फिल्म का ट्रेलर रिलीज हुआ, जिसको खूब पसंद किया जा रहा है.
ट्रेलर में श्रद्धा एक बार फिर अलग और यूनिक किरदार में नजर आने वाली हैं. फिल्म के ट्रेलर लॉन्च पर श्रद्धा ने मीडिया से दिल खोलकर बात की. उन्होंने सीधे शब्दों में बताया कि वे कभी कमाई देखकर फिल्में साइन नहीं करती. उन्हें ऐसा बिल्कुल नहीं लगता कि उन्होंने बॉक्स ऑफिस पर कोई बहुत बड़ा तीर मार दिया है या कोई रिकॉर्ड तोड़ा है. श्रद्धा का मानना है कि एक कलाकार के लिए सबसे बड़ी चीज एक अच्छी कहानी होती है. यही वजह है कि वे कभी-कभी दो साल में सिर्फ एक फिल्म करती हैं और अपने काम से छा जाती हैं.
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साथ ही उन्होंने बताया कि वे जल्दबाजी में काम करने के बजाय अच्छी स्क्रिप्ट का इंतजार करना पसंद करती हैं. श्रद्धा ने फिल्म इंडस्ट्री में चलने वाले मेल-फीमेल लीड फिल्मों के ट्रेंड पर भी अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि सिनेमा को सिर्फ एक अच्छी कहानी चाहिए होती है. फिल्मों को जेंडर के तराजू में तौलना या उन्हें मेल-फीमेल के बेस पर जज करना बहुत छोटी सोच है. उनके मुताबिक एक फिल्म की सक्सेस में पूरी टीम की मेहनत और कई बार सही समय का हाथ होता है. किसी एक इंसान के सिर पर पूरी सक्सेस का ताज नहीं सजता.
उन्होंने बताया कि वे खुद को ‘ईठी’ जैसी फिल्म का हिस्सा मानकर बेहद गर्व महसूस कर रही हैं. श्रद्धा की ये नई फिल्म एक बायोग्राफिकल ड्रामा है, जिसका डायरेक्शन लक्ष्मण उतेकर ने किया है. ये कहानी महाराष्ट्र की मशहूर तमाशा और लावणी कलाकार विठाबाई नारायणगांवकर की जिंदगी पर आधारित है. फिल्म के जरिए पर्दे पर एक ऐसी महिला की कहानी पेश की जा रही है, जिसने तमाम मुश्किलों और सामाजिक बंधनों से लड़ते हुए अपनी एक अलग पहचान बनाई. फिल्म में श्रद्धा कपूर ‘ईठा बाई’ के लीड रोल में नजर आने वाली हैं.
इस फिल्म में श्रद्धा कपूर के साथ मोहम्मद जीशान अय्यूब और सिद्धार्थ जाधव भी बेहद अहम और मजबूत किरदारों में नजर आने वाले हैं. हर किरदार को बहुत ही संजीदगी और बारीकी के साथ गढ़ा गया है. फिल्म का प्रोडक्शन दिनेश विजान और लक्ष्मण उतेकर ने मिलकर किया है, जिसे मैडॉक फिल्म्स और कठपुतली क्रिएशंस के बैनर तले तैयार किया गया है. फिल्म की जान इसका म्यूजिक है, जिसे मशहूर संगीतकार जोड़ी अजय और अतुल ने तैयार किया है. उनके बनाए गाने ऑडियंस को सीधे महाराष्ट्र की मिट्टी से जोड़ने का काम करेंगे.
डायरेक्टर लक्ष्मण उतेकर के डायरेक्शन में बनी ये मोस्ट अवेटेड बायोग्राफिकल फिल्म 4 दिसंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है. ट्रेलर देखने के बाद से ही फैंस श्रद्धा के इस देसी और जुझारू रूप की खूब तारीफ कर रहे हैं, जिस तरह से उन्होंने विठाबाई के हावभाव और बोलचाल को पकड़ा है, उसने लोगों की उम्मीदें काफी बढ़ा दी हैं. अब हर किसी की नजर इस बात पर टिकी है कि जब ये कहानी बड़े पर्दे पर आएगी, तो दर्शकों को किस हद तक छू पाएगी. ये फिल्म श्रद्धा के करियर की सबसे अलग फिल्म साबित हो सकती है.
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विठाबाई नारायणगांवकर का जन्म 1 जुलाई 1935 को महाराष्ट्र के पंढरपुर में हुआ था. उन्होंने बहुत ही छोटी उम्र में तमाशा की दुनिया में कदम रख दिया था. उनका नाचना, गाना और मंच से बात कहने का अनोखा अंदाज लोगों को उनका दीवाना बना देता था. लोग दूर-दूर से उनकी एक झलक पाने और कला देखने आते थे. उनकी अद्भुत कला के लिए उन्हें देश के राष्ट्रपति पुरस्कार से भी नवाजा गया था. लोग उन्हें बड़े प्यार और सम्मान से ‘तमाशा सम्राज्ञी’ कहकर बुलाते थे. उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी लोककला को जिंदा रखने के लिए समर्पित कर दी.
विठाबाई के महान योगदान को याद रखने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने साल 2006 में उनके नाम से एक लाइफटाइम अचीवमेंट सम्मान भी शुरू किया था. 15 जनवरी 2002 को 66 साल की उम्र में उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था, लेकिन उनकी छोड़ी गई विरासत आज भी जिंदा है. अब श्रद्धा कपूर उसी महान कलाकार के जीवन को पर्दे पर जीती नजर आएंगी. ये फिल्म न केवल एक बायोपिक है, बल्कि उस लोककला का सम्मान भी है, जिसे विठाबाई ने अपने पसीने से सींचा था. दर्शक इस ऐतिहासिक सफर को देखने के लिए बेहद बेताब हैं.