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जयपुर में जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव में जहां 69.41 फीसदी वोटिंग हुई थी, वहीं सरपंच चुनाव में ये आंकड़ा उछलकर 86.48 फीसदी पहुंच गया. यानी मतदान में 17 प्रतिशत अंक से ज्यादा का उछाल. जालसू में तो करीब 89 फीसदी मतदाताओं ने गांव का मुखिया चुना. सबसे बड़ा सवाल ये है कि जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव में जो मतदाता घरों से नहीं निकले, वे सरपंच चुनाव में इतनी बड़ी संख्या में बूथों तक कैसे पहुंच गया ? क्या गांव की चौपाल की सियासत बड़े चुनावों पर भारी पड़ रही है ?

2 दिन में 17% उछाल
जयपुर में गांव की सरकार चुनने के लिए मतदाताओं का उत्साह जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के मुकाबले सरपंच चुनाव में कहीं ज्यादा नजर आया. जयपुर जिले की पांच पंचायत समितियों में 28 अक्टूबर को जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए 69.41 प्रतिशत मतदान हुआ था, जबकि 30 अक्टूबर को इन्हीं क्षेत्रों में सरपंच चुनाव के लिए मतदान बढ़कर 86.48 प्रतिशत पहुंच गया. यानी महज दो दिन के अंतराल में मतदान में 17.07 प्रतिशत अंक का उछाल दर्ज हुआ. खास बात यह है कि दोनों चुनावों में मतदाताओं की संख्या समान 3 लाख 78 हजार 364 थी. जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव में 2 लाख 62 हजार 641 मतदाताओं ने वोट डाले थे, जबकि सरपंच चुनाव में यह संख्या बढ़कर 3 लाख 27 हजार 224 हो गई. इस तरह सरपंच चुनाव में 64 हजार 583 अतिरिक्त मतदाताओं ने मतदान किया.ये जिला परिषद-पंचायत समिति चुनाव के मुकाबले डाले गए वोटों में करीब 24.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी है. आंकड़े बताते हैं कि स्थानीय स्तर पर गांव का मुखिया चुनने के लिए मतदाताओं की भागीदारी अधिक रही. पांचों पंचायत समितियों में सरपंच चुनाव का मतदान प्रतिशत जिला परिषद-पंचायत समिति चुनाव से ज्यादा रहा.


जालसू बना 'किंग', शाहपुरा पिछड़ा
जयपुर जिले की पांच पंचायत समितियां के मतदान प्रतिशत के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो पंचायत समिति स्तर पर सबसे बड़ा अंतर रामपुरा डाबड़ी में देखने को मिला। यहां जिला परिषद-पंचायत समिति चुनाव में 48 हजार 537 वोट पड़े थे, जबकि सरपंच चुनाव में 63 हजार 241 मतदाताओं ने मतदान किया. इस तरह 14 हजार 704 अतिरिक्त वोट पड़े. इसी तरह जालसू में सरपंच चुनाव को लेकर सबसे ज्यादा उत्साह रहा. यहां दो दिन में मतदान में 16.94 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हुई. जालसू की 25 ग्राम पंचायतों में 70 हजार 35 मतदाताओं में से 62 हजार 256 ने सरपंच चुनाव में वोट डाले. आंकड़ों में एक दिलचस्प बदलाव ओर देखने को मिला। जिला परिषद-पंचायत समिति चुनाव में शाहपुरा 72.08 प्रतिशत मतदान के साथ पांचों पंचायत समितियों में पहले स्थान पर था. लेकिन सरपंच चुनाव में शाहपुरा 84.70 प्रतिशत मतदान के साथ चौथे स्थान पर पहुंच गया. वहीं, जिला परिषद-पंचायत समिति चुनाव में दूसरे स्थान पर रहा जालसू सरपंच चुनाव में 88.89 प्रतिशत मतदान के साथ पहले स्थान पर पहुंच गया. रामपुरा डाबड़ी भी चौथे स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंच गया.

वोटरों की संख्या में आमेर अव्वल, रामपुरा डाबड़ी भी आगे
वोटों की वास्तविक संख्या के लिहाज से आमेर में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज हुई. यहां जिला परिषद-पंचायत समिति चुनाव में 73 हजार 794 वोट पड़े थे, जबकि सरपंच चुनाव में 92 हजार 856 वोट पड़े. यानी 19 हजार 62 अतिरिक्त मतदाताओं ने मतदान किया. इसके बाद रामपुरा डाबड़ी में 14 हजार 704, जालसू में 11 हजार 867, अमरसर में 11 हजार 737 और शाहपुरा में 7 हजार 213 अतिरिक्त वोट पड़े.

बहरहाल, दोनों चुनावों के बीच महज दो दिन का अंतर और मतदाता संख्या समान होने के बावजूद मतदान में 17.07 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी एक महत्वपूर्ण चुनावी संकेत है. जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्य बड़े निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि सरपंच सीधे ग्राम पंचायत का मुखिया होता है. गांव के विकास, स्थानीय सुविधाओं और पंचायत स्तर के निर्णयों में उसकी सीधी भूमिका होती है. ऐसे में सरपंच पद के लिए स्थानीय उम्मीदवारों से मतदाताओं का सीधा जुड़ाव अधिक मतदान की एक संभावित वजह हो सकता है.