)
Cisco के ऑफिस में कुछ ऐसा हो रहा है जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी. एक 40 साल पुरानी दिग्गज टेक कंपनी, जिसका कोडबेस इतना बड़ा है कि उसे संभालने के लिए सीनियर इंजीनियर्स की पूरी फौज लगती है. और उस कोडबेस को बदलने का जिम्मा किसे दिया गया? किसी 20 साल के तजुर्बे वाले टेक गुरु को नहीं, बल्कि महज 27 साल के एक Gen Z लड़के को. उनका नाम है पद्मनाभन कृष्णमूर्ति, जिन्हें प्यार से सब 'Paddy' बुलाते हैं. Cisco के प्रेसिडेंट और चीफ प्रोडक्ट ऑफिसर जीतू पटेल (Jeetu Patel) ने Paddy को बिना किसी लिमिट के 'Unlimited AI Tokens' दे दिए हैं.
आखिर कौन हैं 27 साल के Paddy और Cisco में उनका सफर कैसे शुरू हुआ?
Paddy कोई आम 9-to-5 काम करने वाले एम्प्लॉई नहीं हैं. उनका माइंडसेट एक स्टार्टअप फाउंडर वाला है. 2023 में Paddy ने 'EzDubs' नाम का एक रियल-टाइम ट्रांसलेशन स्टार्टअप शुरू किया था. 2025 में Cisco ने इस स्टार्टअप को एक्वायर (खरीद) कर लिया, और इस तरह Paddy Cisco की टीम का हिस्सा बन गए.
लेकिन कहानी में ट्विस्ट यह है कि स्टार्टअप बेचने के बाद Paddy Cisco में एक बेहद साधारण और कम महत्व वाले रोल में काम कर रहे थे. उनके पास जो हुनर और आउट-ऑफ-द-बॉक्स सोचने की काबिलियत थी, उसके हिसाब से उन्हें सही जिम्मेदारी नहीं मिली थी.
सैन फ्रांसिस्को के ऑफिस में हुई वो एक मुलाकात, जिसने सब बदल दिया
एक दिन Cisco के सैन फ्रांसिस्को ऑफिस में जीतू पटेल की मुलाकात Paddy से हुई. बातचीत के दौरान Paddy ने बिना किसी हिचकिचाहट के जीतू पटेल के सामने एक बड़ा ही बोल्ड प्रपोजल रख दिया. Paddy ने कहा कि जिस लेगेसी कोड को बदलने में सालों लगते हैं, उसे वो महज 2 लोगों की छोटी सी टीम और पावरफुल AI टूल्स की मदद से री-राइट कर सकते हैं.
यह बात सुनते ही जीतू पटेल हैरान रह गए. कंपनी की वो टीमें जो रात-दिन AI पर ही काम करती हैं, उन्होंने भी इस तरह से प्रोजेक्ट को करने की हिम्मत नहीं दिखाई थी. Paddy के इस कॉन्फिडेंस ने पटेल का ध्यान खींचा. Paddy ने खुद को साबित करने के लिए सिर्फ 4 हफ्ते का समय मांगा है ताकि वो बड़े टारगेट पर काम करने से पहले अपना डेमो दिखा सकें.
24 महीने और 98% लेगेसी कोड बदलने का अनबिलीवेबल टारगेट
Cisco का प्लान बेहद महत्वाकांक्षी है. आने वाले 24 महीनों के अंदर कंपनी अपने 98 प्रतिशत पुराने लेगेसी कोड को पूरी तरह से नए और मॉडर्न कोड से रिप्लेस करना चाहती है.
इसीलिए जीतू पटेल ने Paddy को अनलिमिटेड AI टोकन्स दिए हैं. जब उनसे Fortune मैगजीन के साथ बातचीत में पूछा गया, तो उन्होंने हंसते हुए कहा कि "मैंने उसे अनलिमिटेड टोकन्स दे दिए हैं क्योंकि वो कोड रिफैक्टर करने जा रहा है. मैंने उससे कह दिया है कि तुम पूरी आजादी के साथ जितना चाहें AI इस्तेमाल कर सकते हो."
सीनियर बनाम जूनियर: ऑफिस में खींचतान और "Tension is Good" का कांसेप्ट
अब जब 27 साल का एक लड़का उन प्रोजेक्ट्स को हैंडल करेगा जिन पर 20-20 साल पुराने इंजीनियर्स बैठे हैं, तो झिकझिक होना स्वाभाविक है. जब यंग Gen Z एम्प्लॉईज को ऐसे सीनियर्स के साथ टीम में रखा जाता है जो दशकों से एक ही तरीके से काम कर रहे हैं, तो सोच में टकराव होता ही है.
लेकिन जीतू पटेल इस मतभेद को गलत नहीं मानते. उनका मानना है कि कंपनी में नई सोच लाने के लिए थोड़ा तनाव और पंगे होना जरूरी है. उन्होंने कहा, "तनाव अच्छा होता है (Tension is good)." उनका कहना है कि यह बहस आइडियाज को लेकर होनी चाहिए, न कि किसी की पर्सनल खुन्नस. जब दो अलग-अलग सोच टकराती हैं, तभी सबसे बेहतरीन सॉल्यूशन बाहर आता है.
सिर्फ Paddy ही नहीं, Cisco इंटर्न्स को बना रहा है 'Reverse Mentors'
जीतू पटेल की यह सोच सिर्फ Paddy तक सीमित नहीं है. वो अपनी कंपनी में आने वाले युवा इंटर्न्स को भी एक अलग नजरिए से देखते हैं. वो उन्हें चाय-कॉफी या फाइलें संभालने वाला इंटर्न नहीं मानते, बल्कि उन्हें 'Reverse Mentors' की तरह देखते हैं.
इसका एक बढ़िया एग्जांपल हैं बाया (Baya), जो स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की एक स्कॉलरशिप स्टूडेंट हैं. एक कॉलेज इवेंट में बाया से मिलने के बाद पटेल ने उनसे कहा कि वो हर महीने उन्हें AI के बारे में अपनी नई लर्निंग्स का अपडेट भेजें. बाया ने हर महीने ईमानदारी से अपडेट्स भेजे. इसका नतीजा यह हुआ कि उन्हें Cisco में इंटर्नशिप मिली और उन्होंने उस प्रॉब्लम को चुटकी में सॉल्व कर दिया, जिसे सुलझाने में कंपनी के पुराने और तजुर्बेकार इंजीनियर्स सालों से परेशान थे.
टेक वर्ल्ड में क्यों बढ़ रही है Gen Z की डिमांड?
Cisco अकेले ऐसी कंपनी नहीं है जो यंग ब्लड पर दांव लगा रही है. सिलिकॉन वैली और ग्लोबल टेक इंडस्ट्री में अब यह ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है.
Thrive Capital के फाउंडर जोश कुशनर (Josh Kushners): उनका कहना है कि वो उन कैंडिडेट्स को ज्यादा पसंद करते हैं जिनके पास 4 साल से कम का वर्क एक्सपीरियंस हो.
Tastewise के CEO अलोन चेन (Alon Chen): वो मानते हैं कि एंट्री-लेवल एम्प्लॉईज के दिमाग में पुराने ढर्रे की बंदिशें नहीं होतीं. वो खुले दिमाग से सोचते हैं.
म्यूजिशियन और इन्वेस्टर Will.i.am: वो MIT और स्टैनफोर्ड जैसे संस्थानों के युवाओं में फ्यूचर टेक्नोलॉजी के बड़े बदलाव देख रहे हैं.
आखिर ऐसा क्या है Gen Z में जो टेक दिग्गज उन पर फिदा हैं?
AI-Native माइंडसेट: Gen Z वो पीढ़ी है जो इंटरनेट और AI के दौर में बड़ी हुई है. उनके लिए AI कोई नया टूल नहीं, बल्कि डेली रूटीन का हिस्सा है.
कोई पुरानी आदतें नहीं: सीनियर एम्प्लॉईज अक्सर यह सोचते हैं कि "यह काम हमेशा ऐसे ही होता आया है." वहीं Gen Z पूछता है कि "यह काम ऐसे ही क्यों होता आया है, इसे नए तरीके से क्यों नहीं कर सकते?"
कम समय में बड़ा रिस्क लेने की हिम्मत: स्टार्टअप बैकग्राउंड वाले युवा रिस्क लेने से नहीं डरते. Paddy का 4 हफ्ते में कोड री-राइट करने का प्रपोजल इसका जीता-जागता सबूत है.