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बॉलीवुड के जाने-माने एक्टर शेखर सुमन अपने मशहूर शो ‘शेखर टुनाइट’ के जरिए लोगों के बीच हमेशा चर्चा में बने रहते हैं. इस शो का एक खास हिस्सा ऐसा है जहां वे सिस्टम और सरकार पर अपने खास अंदाज में चुटीले तंज कसते हैं. कुछ समय पहले उनके एक एपिसोड को लेकर काफी हंगामा मच गया था, जब उन्होंने सीधे केंद्र सरकार की नीतियों और फैसलों पर कई तीखे सवाल खड़े कर दिए थे. ये पूरा मामला नीट पेपर लीक के दौरान खड़े हुए विवाद से जुड़ा हुआ था. उस दौरान शेखर ने बातों ही बातों में ऐसा निशाना साधा कि इंटरनेट से लेकर गलियारों तक बहस छिड़ गई थी.
अब काफी समय बाद शेखर सुमन ने इस पूरे विवाद पर अपनी चुप्पी तोड़ी और खुलकर अपनी राय रखी है. द लल्लनटॉप के साथ इंटरव्यू के दौरान जब उनसे इस मामले पर सवाल किया गया तो उनका बेबाक अंदाज देखने को मिला, जो वायरल हो रहा है. उनसे पूछा गया कि जब वे इतने लंबे समय बाद अपने शो को एक नए तेवर के साथ लेकर आ रहे थे, तो क्या सरकार पर सीधा कटाक्ष करते वक्त उनके मन में किसी तरह का डर नहीं था? इस पर बिना किसी झिझक शेखर ने साफ शब्दों में कहा कि जो डर गया, समझो वो घर गया. जो बात सच है, उसे पूरी सच्चाई के साथ ही सामने रखना चाहिए.

बातचीत के दौरान शेखर सुमन के उस पुराने बयान की याद दिलाई गई, जिसमें उन्होंने कहा था, ‘अगर सही सवाल पूछने वाला दिमागी नक्सल कहलाता है, तो हां मैं दिमागी नक्सल हूं’. इस बात पर अपनी राय रखते हुए उन्होंने एक सीधा और आसान उदाहरण दिया. उन्होंने कहा, ‘अगर पूरी क्लास का मॉनिटर कोई बड़ी गलती करेगा, तो बाकी बच्चे परेशान होकर सवाल उसी मॉनिटर से करेंगे’. उनका कहना था कि मॉनिटर की कुर्सी पर कौन बैठा है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, जो भी उस जिम्मेदारी के पद पर होगा, जनता उसी से जवाब मांगेगी और ये हर नागरिक का बुनियादी हक बनता है.
इंटरव्यू में आगे उनके शो ‘शेखर टुनाइट’ के एक और वायरल बयान का जिक्र हुआ. उन्होंने पहले कहा था कि अगर मौजूदा सरकार के काम करने की असली रफ्तार देखनी है, तो उस जगह नजर डालिए जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बने किसी मजाकिया वीडियो को इंटरनेट से तुरंत गायब कर दिया जाता है. इस बयान पर अपनी बात साफ करते हुए शेखर बोले कि ये सब कुछ खुलेआम हो रहा है और देश का हर आम नागरिक इसे अच्छी तरह देख रहा है. उन्होंने जोर देकर कहा कि डेमोक्रेटिक सिस्टम के अंदर किसी न किसी की जवाबदेही और जिम्मेदारी तो तय होनी ही चाहिए.
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शेखर सुमन ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि कुर्सी पर चाहे कोई भी बैठा होता, बात हमेशा यही रहती. सिचुएशन ये बन चुकी है कि कोई शख्स एक तरफ इंटरनेट पर वीडियो डालता है और पलक झपकते ही दूसरी तरफ से उसे पूरी तरह हटा दिया जाता है. उन्होंने कहा कि जब सिस्टम की इन हरकतों का सीधा असर आम जनता के जीवन पर पड़ने लगता है, तब लोगों के अंदर से आवाज निकलती है और वे विरोध दर्ज कराते हैं. जनता कभी खामोश नहीं बैठती और वक्त आने पर अपना कड़ा रुख जरूर दिखाती है.
अपनी बातचीत के आखिर में उन्होंने सीरियस मैसेज दिया. उन्होंने कहा कि सत्ता की मनमानी और उसके खिलाफ उठने वाली जनता की आवाज, इन दोनों ही पहलुओं को इतिहास हमेशा अपने पन्नों में दर्ज रखता है और कभी नहीं भूलता. सच को दबाने की कोशिशें चाहे जितनी हो जाएं, लेकिन हकीकत को हमेशा के लिए छिपाया नहीं जा सकता. शेखर सुमन की ये बेबाक बातें अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं. लोग उनके इस निडर अंदाज और सिस्टम पर उठाए गए जरूरी सवालों की जमकर तारीफ कर रहे हैं और वीडियो पर अपनी राय दे रहे हैं.