भाषा चुनें
  • Hindi
  • English
  • Marathi
  • Bengali
  • Tamil
  • Malayalam
  • Gujarati
  • Telugu
  • Kannada
  • Odisha
  • Z Bharat
  • ZEE PHH
  • ZEE Business
  • WION
राज्य चुनें
  • उत्तर प्रदेश
  • उत्तराखण्ड
  • मध्य प्रदेश
  • छत्‍तीसगढ़
  • हरियाणा
  • दिल्ली
  • बिहार
  • झारखण्ड
  • राजस्‍थान
  • हिमाचल प्रदेश
  • हिन्दीEnglishमराठीবাংলাதமிழ்മലയാളംગુજરાતીతెలుగుಕನ್ನಡଓଡ଼ିଶାZ BharatPHHBusinessWION
  • facebookyoutubetwitterlinkedinwhatsapp
Zee News Hindi
App
Zee News Hindi
  • News
  • वीडियो
  • फोटोज़
  • रील्स
  • लाइव ब्लॉग
  • राज्य चुनें

Add Zee Business As A Preferred Source
App
  • लेटेस्ट न्यूज़
  • देश
  • खेल
  • दुनिया
  • मनोरंजन
  • बिजनेस
  • ओरिजनल
  • टेक
  • धर्म
  • ऑटो
  • एजुकेशन
  • एस्ट्रोलॉजी
  • राशिफल
  • LIVE टीवी
  • लेटेस्ट न्यूज़
  • देश
  • खेल
  • दुनिया
  • मनोरंजन
  • बिजनेस
  • ओरिजनल
  • टेक
  • धर्म
  • ऑटो
  • एजुकेशन
  • एस्ट्रोलॉजी
  • राशिफल
  • ज़ी न्यूज़ हिंदी
  • /मनोरंजन
  • /भक्ति और देशभक्ति की फिल्मों को मिल रहा बढ़ावा, इस बदलते ट्रेंड से बाकी मेकर्स को हो रहा नुकसान?

भक्ति और देशभक्ति की फिल्मों को मिल रहा बढ़ावा, इस बदलते ट्रेंड से बाकी मेकर्स को हो रहा नुकसान?

बॉलीवुड में देशभक्ति और भक्ति की फिल्मों की बाढ़ के बीच फिल्ममेकर अनुराग कश्यप ने इंडस्ट्री के हालात पर बड़ा बयान दिया. उनका कहना है कि प्रोड्यूसर्स अब रिस्क लेने से डर रहे हैं और बाकी विषयों जैसे एक्शन-थ्रिलर-हॉरर-रोमांस की फिल्मों को ग्रीन सिग्नल नहीं मिल रहा. चलिए जानते हैं आखिर क्यों अनुराग ने इसे बताया सबसे बड़ी ट्रेजडी?

Written ByVandana Saini
Published: Oct 21, 2026, 12:08 PM IST|Updated: Oct 21, 2026, 01:33 PM IST
joinshare
भक्ति और देशभक्ति की फिल्मों को मिल रहा बढ़ावा, इस बदलते ट्रेंड से बाकी मेकर्स को हो रहा नुकसान?
Image Credit: क्या सच में तेजी से बदल रहा फिल्मों का ट्रेंड?

About the Author

Vandana Saini

Vandana Saini

वंदना सैनी जी न्यूज में सब ए़डिटर हैं और पिछले 11 साल से डिजिटल मीडिया में काम कर रही हैं. कुछ समय तक उन्होंने नेशनल, इंटरनेशनल और पॉलिटिकल बीट पर काम किया. इसके बाद 2018 में उन्होंने इंडिया न्यूज में एंटरटेनमेंट बीट पर काम करना शुरू किया और पिछले 8 साल से लगातार में एंटरटेनमेंट बीट पर काम कर रही हैं. इस दौरान उन्होंने स्मार्ट हिंदुस्तान, पत्रिका और न्यूज 24 जैसे संस्थान के साथ काम किया और पिछले 2 साल से जी न्यूज के साथ काम कर रही हैं. उन्होंने दिल्ली से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद IGNOU से हिंदी में मास्टर्स किया. उन्हें पत्रकारिता के साथ कहानियां लिखने का भी शौक है. आप Vandana.saini@India.com पर सीधे ईमेल कर इनसे जुड़ सकते हैं. 
Read More

ट्रेंडिंग

  • न्यूज़
  • फोटो
  • वीडियो
ID चेकिंग सख्त, पैपराजी की एंट्री कम: बॉलीवुड की दिवाली पार्टियों में बढ़ी सुरक्षा, टाइगर श्रॉफ फायरिंग का असर

ID चेकिंग सख्त, पैपराजी की एंट्री कम: बॉलीवुड की दिवाली पार्टियों में बढ़ी सुरक्षा, टाइगर श्रॉफ फायरिंग का असर

2

चक्रवाती तूफान 'अर्नब' का बिहार पर दिखेगा असर, 28 अक्टूबर से बारिश के आसार, 29 को पूरे राज्य में 'ऑरेंज अलर्ट'

3

PM मोदी के पिता पर टिप्पणी से गरमाई सियासत: गजेंद्र सिंह शेखावत और अतुल भंसाली ने कांग्रेस को घेरा

4

SBI-PNB-HDFC में 16 दिन नहीं होगा काम! चेक करें नवंबर में कब-कब बंद रहेंगे बैंक?

5

एटम बम का घमंड धड़ाम: भारत की परमाणु पावर से 'जिन्नालैंड' में हड़कंप; बिलबिला उठे सियासतदान

logo
  • contact us
  • privacy policy
  • legal
  • investor info
  • advertise with us
© 1998-2026 Indiadotcom Digital Private Limited, All Rights Reserved.

बॉलीवुड में इन दिनों भक्ति और देशभक्ति पर बनी फिल्मों का दबदबा साफ नजर आ रहा है. बड़े परदे पर राष्ट्रवाद और धार्मिक आस्था से जुड़ी कहानियों की सक्सेस ने पूरी फिल्म इंडस्ट्री का रुख एक खास दिशा में मोड़ दिया है. इसी माहौल के बीच जाने-माने डायरेक्टर और एक्टर अनुराग कश्यप ने इंडस्ट्री में इस बदलाव को लेकर अपनी चिंता जताई. अनुराग का मानना है कि प्रोड्यूसर अब केवल उन्हीं कहानियों को हरी झंडी दे रहे हैं, जिन्हें वे पहले से बॉक्स ऑफिस पर सिक्योर मान चुके हैं. ऐसे में एक्शन, थ्रिलर, हॉरर, रोमांस और सोशल मुद्दों पर बनी फिल्मों को आगे बढ़ाना बेहद मुश्किल होता जा रहा है.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अनुराग कश्यप का कहना है कि हिंदी सिनेमा में कंटेंट की वैरायटी तेजी से घट रही है, जो भविष्य के लिए अच्छा संकेत नहीं है. दरअसल, अनुराग कश्यप की नई फिल्म ‘लिटिल थॉमस’ सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए पूरी तरह तैयार है, जो बच्चों के नजरिए पर बनी एक बेहद सेंसिटिव स्टोरी है. फिल्म की रिलीज से ठीक पहले हिंदुस्तान टाइम्स के साथ बातचीत में उन्होंने बॉलीवुड के मौजूदा हालात पर दिल खोलकर बात की. अनुराग ने साफ शब्दों में कहा कि आज के दौर में अपनी मर्जी और पसंद की फिल्म बनाना पहले के मुकाबले कई गुना ज्यादा मुश्किल बो चुका है.

भक्ति और देशभक्ति की फिल्मों को मिल रही हरी झंड़ी

पूरी फिल्म इंडस्ट्री फिलहाल हिट हो चुके भक्ति और देशभक्ति के फॉर्मूले को बार-बार दोहराने की होड़ में लगी हुई है. इस सिक्योर गेम के चलते नए एक्सपेरिमेंट करने वाले डायरेक्टर्स के रास्ते बंद हो रहे हैं. अनुराग ने हालिया इंटरव्यू में ये बात खुलकर कही कि बॉलीवुड में इस वक्त सिर्फ उन्हीं प्रोजेक्ट्स को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है, जिनका ताल्लुक सीधे तौर पर धार्मिक आस्था या देश भक्ति से हो. 

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक फिल्ममेकर्स और इन्वेस्टर्स के दिमाग में ये बात पूरी तरह बैठ चुकी है कि ऑडियंस सिर्फ इसी तरह के कंटेंट को देखना पसंद करती है. इसलिए नई स्क्रिप्ट्स की चॉइस में सभी विषय अब कहीं पीछे छूट गए हैं. हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, कई बड़े प्रोड्यूसर्स ये समझ ही नहीं पा रहे हैं कि सिनेमाघरों तक ऑडियंस को खींचने के लिए क्या नया परोसा जाए. 

ऐसे में वे किसी भी तरह का फाइनेंशियल रिस्क उठाने से बच रहे हैं. वे सीधे उसी रास्ते पर चल रहे हैं, जहां हाल में बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट ने तगड़ी कमाई की है. इससे इंडस्ट्री में पॉजिटिव ऑप्शन तेजी से सिमटने लगे हैं और नए एक्सपेरिमेंट पूरी तरह से बंद हो चुके हैं. फिल्म क्रिटिक्स और जानकारों का भी मानना है कि जब किसी खास जॉनर की फिल्में लगातार बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड बनाती हैं तो इन्वेस्टर्स का झुकाव नैचुरली उसी तरफ बढ़ जाता है. 

कुछ मीडियो रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये चलन भले ही नया न हो, लेकिन जब पूरी इंडस्ट्री एक ही ढर्रे पर चलने लगे तो बाकी सिनेमैटिक जॉनर का दम घुटने लगता है. अनुराग कश्यप की सबसे बड़ी फिक्र भी यही है कि एक ही तरह के विषयों की भरमार से सिनेमा की पॉजिटिव दुनिया बहुत छोटी होती जा रही है.

शनाया कपूर की नई डार्क थ्रिलर सीरीज उड़ा देगी होश! खौफनाक सीन दहला देंगे दिल; सस्पेंस खड़े कर देगा रोंगटे; JioHotstar पर देखें

सुरक्षित दांव खेलना चाहते हैं प्रोड्यूसर

अनुराग कश्यप ने बातचीत के दौरान एक प्रोड्यूसर के साथ हुई अपनी हालिया मुलाकात का दिलचस्प किस्सा शेयर किया. हिंदुस्तान टाइम्स की खबरों के मुताबिक, उस प्रोड्यूसर ने साफ तौर पर माना कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि आज के दौर में किस तरह का प्रोजेक्ट शुरू किया जाए. प्रोड्यूसर के मुताबिक आज मार्केट में भक्ति या देशभक्ति के अलावा किसी दूसरे विषय की स्क्रीनप्ले को हरी झंडी दिलाना और उस पर पैसा लगाना सबसे मुश्किल काम हो चुका है.

इस एकतरफा सोच के पीछे मैन वजह भारी भरकम फाइनेंशियल दबाव काम कर रहा है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, बड़े बजट का इन्वेस्टमेंट करने वाली कॉर्पोरेट कंपनियां अब केवल उन प्रोजेक्ट्स पर दांव लगा रही हैं, जिनका हालिया ट्रैक रिकॉर्ड बिल्कुल सिक्योर और प्रॉफिट वाला रहा है. इस दबाव में कोई भी डायरेक्टर या प्रोड्यूसर लीक से हटकर सोचने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है. हर कोई उसी बने बनाए रास्ते पर चलकर अपनी रकम सिक्योर करने की जुगत में लगा दिखता है.

यही वजह है कि क्लासिक रोमांस, सोशल ड्रामा, स्लाइस ऑफ लाइफ, बच्चों की फिल्में और सस्पेंस थ्रिलर जैसे जॉनर अब हाशिए पर जाते दिख रहे हैं. अनुराग कश्यप के मुताबकि, ऐसी फिल्में बनना पूरी तरह बंद तो नहीं हुई हैं, लेकिन उनके लिए बड़ा बजट जुटाना और बेहतर रिलीज डेट हासिल करना अब लोहे के चने चबाने जैसा हो गया है. अगर सिनेमाघरों में दर्शकों को अलग-अलग जायके वाली कहानियां नहीं मिलेंगी तो आगे चलकर बड़े पर्दे के लिए उनका अट्रैक्शन भी घट सकता है.

‘फैक्ट और ट्रेजडी’ क्यों बोले अनुराग कश्यप?

अनुराग कश्यप ने मौजूदा फिल्मी माहौल को सीधे शब्दों में ‘फैक्ट और ट्रेजडी’ करार दिया. हिंदुस्तान टाइम्स से बात करते हुए उनका साफ कहना है कि किसी एक खास जॉनर का पूरी इंडस्ट्री पर हावी हो जाना और बाकी कहानियों को मौका न मिलना भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी त्रासदी है. सिनेमा की असली पहचान उसकी अलग-अलग विचारधारा को परदे पर उतारने की आजादी में है. अगर केवल एक ही सांचे में फिल्में ढाली जाएंगी, तो पूरी कला पर इसका गहरा असर पड़ेगा.

इंटरव्यू में उन्होंने ये भी दर्द बयां किय कि आज इंडिपेंडेंट आइडिया के साथ ओरिजनल फिल्में बनाना बहुत बड़ी जंग बन चुका है. अनुराग कश्यप के मुताबिक चाहे वो बच्चों के लिए बनाई गई प्यारी सी फिल्म हो या फिर समाज के किसी गंभीर मुद्दे पर बनी कहानी, उन्हें फाइनेंस, डिस्ट्रीब्यूशन और प्रमोशन के हर कदम पर कड़ा संघर्ष करना पड़ता है. सिस्टम की इसी बेरुखी की वजह से कई काबिल और नए फिल्मकार समझौता करने और सुरक्षित रास्ते पर चलने को मजबूर हो जाते हैं.

अनुराग कश्यप लंबे अरसे से अपनी शर्तों पर अलग तरह का सिनेमा गढ़ने वाले फिल्मकारों की पहली कतार में रहे हैं. उन्होंने हमेशा नए डायरेक्टर्स और छोटे बजट की एक्सपेरिमेंटल फिल्मों का खुलकर समर्थन दिया है. उनका मानना है कि सिनेमा का माहौल तभी तक जिंदा और हेल्थी रह सकता है, जब हर जॉनर को ऑडियंस तक पहुंचने का बराबर का हक मिले. अगर दर्शकों को सिर्फ एक ही ढर्रे का खाना परोसा जाएगा, तो इंडस्ट्री का पॉजिटिव बैलेंस पूरी तरह बिगड़ जाएगा.

क्या दूसरे जॉनर की फिल्मों पर खतरा बढ़ रहा है?

बीते कुछ सालों के दौरान बड़े परदे पर रिलीज हुई देशभक्ति और आस्था से जुड़ी फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर छप्परफाड़ कमाई की है. हिंदुस्तान टाइम्स और टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के मुताबिक, इस जबरदस्त बिजनेस ने स्टूडियोज के दिमाग में ये बात फीट कर दी है कि ऑडियंस जनता सिर्फ इसी फार्मूले पर भरोसा कर रही है. नतीजतन दर्जनों नई फिल्मों के प्रोजेक्ट इसी थीम पर शुरू कर दिए गए हैं. सक्सेस की ये दौड़ बाकी जॉनर के मेकर्स के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है.

हालांकि, अगर इतिहास उठाकर देखा जाए तो भारतीय दर्शक हमेशा से हर तरह के नए सिनेमैटिक एक्सपेरिमेंट्स को खुले दिल से अपनाते रहे हैं. समय-समय पर जब भी अच्छी हॉरर, कॉमेडी, लव स्टोरी या एक्शन फिल्में आई हैं, तो दर्शकों ने उन्हें सिर आंखों पर बैठाया है. इसलिए कई जानकारों का ये भी सोचना है कि किसी एक जॉनर की सक्सेस को परमानेंट मान लेना भारी भूल होगी. ये सिनेमा का एक दौर या लहर हो सकती है, जो कुछ समय बाद नए रूप में बदल जाएगा.

लेकिन सिक्का का दूसरा पहलू ये भी है कि जब इंडस्ट्री का सारा पैसा और सिनेमाघरों के प्राइम शोज केवल एक ही तरह की फिल्मों को मिलने लगेंगे तो, बाकी जॉनर के क्रिएटर्स को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबकि, इसी बात को लेकर अब इंडस्ट्री के गलियारों में चर्चाएं गर्म हैं. आने वाले दिनों के बॉक्स ऑफिस आंकड़े ही ये तय करेंगे कि ये सिर्फ एक टेंपरेरी ट्रेंड है या फिर बॉलीवुड ने अपनी परमानेंट स्ट्रेटेजी हमेशा के लिए बदल ली है.

‘लिटिल थॉमस’ से उम्मीदें और आगे का रास्ता

मौजूदा दौर की भेड़चाल के बीच अनुराग कश्यप को अपनी बच्चों पर आधारित फिल्म ‘लिटिल थॉमस’ से काफी उम्मीदें हैं. हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, उनका विश्वास है कि अगर कहानी में सच्चाई, इमोशन और ताजगी हो तो दर्शक हर तरह के विषय को खुले दिल से गले लगाते हैं. ये फिल्म ऑडियंस को भारी भरकम नारों और उपदेशों से दूर एक मासूम और बेहद खूबसूरत दुनिया में ले जाने का एक ईमानदार कोशिश बनकर सामने आती है.

कश्यप अब बड़े बजट की फिल्मों की चकाचौंध से काफी हद तक दूरी बना चुके हैं. वे अब उन छोटी और इंडिपेंडेंट फिल्मों के साथ खड़े होते हैं, जिनका स्क्रीनप्ले पर उन्हें गहरा यकीन होता है. उनका मानना है कि जब छोटे बजट की कहानियों को सही सहारा मिलेगा तभी इंडस्ट्री में नया टैलेंट पनप सकेगा और सिनेमा में क्रिएटिव बैलेंस बना रहेगा. बिना नए आइडियाज के कोई भी इंडस्ट्री लंबे समय तक टिक नहीं सकता.

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:
Bollywood News