Ramayan Vs Ramayana: क्या नितेश तिवारी की ‘रामायण’ के ये 5 किरदार ले पाएंगे रामानंद सागर के कल्ट किरदारों की जगह?
नितेश तिवारी की ‘रामायण’ सिर्फ एक मॉर्डन फिल्म नहीं, बल्कि दो पीढ़ियों का ऐतिहासिक सांस्कृतिक मुकाबला है. रामानंद सागर के अमर किरदारों के सामने रणबीर कपूर, साई पल्लवी और यश जैसे सितारे खड़े हैं. अब सवाल ये उठता है कि क्या नई पीढ़ी के ये 5 किरदार 39 साल पुराने उन पवित्र किरदारों की जगर ले सकते हैं?
हमारे यहां जब भी भगवान राम, माता सीता, भैया लक्ष्मण, राम भक्त हनुमान या लंकापति रावण की बात होती है, तो दिमाग में तुरंत कुछ जाने-पहचाने चेहरे सामने आने लगते हैं. साल 1987 में दूरदर्शन पर टेलीकास्ट हुआ रामानंद सागर का सबसे ज्यादा देखे जाने वाला शो ‘रामायण’ सिर्फ एक शो नहीं, बल्कि आज भी वो हर घर के दिल और संस्कार से जुड़ा है. उस दौर में आलम ये था कि हर रविवार की सुबह सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता था. लोग बाकायदा नहा-धोकर टीवी के आगे अगरबत्ती जलाते और हाथ जोड़कर बैठ जाते थे. उस दौर में उन कलाकारों ने अपनी कमाल की एक्टिंग से इन किरदारों को हमेशा के लिए अमर बना दिया.
करीब 40 साल बाद डायरेक्टर नितेश तिवारी भारतीय परदे पर ‘रामायण: पार्ट 1’ को एक नए और बहुत बड़े स्केल पर बड़े पर्दे पर लेकर आए हैं. सच कहें तो इस फिल्म का असली इम्तिहान सिर्फ इसका भारी भरकम बजट या नए जमाने के स्पेशल इफेक्ट्स तक सीमित नहीं है. असल मुकाबला तो दो अलग-अलग पीढ़ियों की सोच और पसंद के बीच देखने को मिलेगा. एक तरफ लोगों के दिलों में वो पुराने कलाकार बसे हैं, जिनकी इमेज लोग आज भी भगवान की तरह पूजते हैं. वहीं, दूसरी तरफ आज के नए और मशहूर सितारे हैं, जो अपने मॉडर्न अंदाज से इन ऐतिहासिक किरदारों को दोबारा परदे पर जिंदा करने का बड़ा रिस्क उठा रहे हैं.
भगवान राम: रणबीर कपूर वर्सेस अरुण गोविल
रामानंद सागर की ‘रामायण’ में अरुण गोविल ने जिस सादगी और शांत स्वभाव से प्रभु श्री राम का रोल निभाया था. उसने उन्हें हर घर में सच में भगवान जैसा दर्जा दिया. आज भी लोग जब राम के किरदार या छवि को याद करते हैं, तो अरुण गोविल का मुस्कुराता चेहरा ही आंखों के सामने आता है. ऐसे में रणबीर कपूर के लिए ये सिर्फ एक रोल नहीं, बल्कि लोगों की डीप इमोशन से जुड़ने की परीक्षा है. रणबीर बेहतरीन एक्टर जरूर हैं, पर ‘संजू’ और ‘एनिमल’ जैसी फिल्मों के बाद उन्हें राम के किरदार में पूरी तरह शांत, गंभीर और दयालु नजर आना होगा. अगर वे अपनी आंखों में वही सादगी और त्याग दिखा पाए, तभी लोग उन्हें इस रोल में एक्सेप्ट कर पाएंगे.
सीता: साई पल्लवी वर्सेस दीपिका चिखलिया
माता सीता सिर्फ त्याग की मूरत नहीं, बल्कि अंदरूनी ताकत और स्वाभिमान की सबसे बड़ी मिसाल हैं. टीवी पर दीपिका चिखलिया ने इस रोल को इतने सहज और शांत अंदाज में निभाया कि लोग आज भी उन्हें साक्षात देवी जैसे ही पूजते हैं. अब नई ‘रामायण’ में इसी अहम किरदार को निभाने का जिम्मा साउथ की मशहूर अदाकारा साई पल्लवी को मिला है. साई पल्लवी अपनी सादगी, बिना किसी बनावट वाली एक्टिंग और चेहरे के भोलेपन के लिए जानी जाती हैं. ज्यादातर लोगों को लगता है कि उनकी सादगी भरा अंदाज सीता के किरदार में जान फूंक देगा. हालांकि, लोगों का लगाव इतना गहरा है कि पर्दे पर उनके हर सीन की तुलना पुरानी यादों से जरूर होगी.
लक्ष्मण: रवि दुबे वर्सेस सुनील लहरी
रामायण में लक्ष्मण का किरदार सिर्फ छोटे भाई का नहीं, बल्कि वो निष्ठा, अटूट समर्पण, तेज और त्याग की मूर्ति हैं. रामानंद सागर के शो में सुनील लहरी ने लक्ष्मण के चेहरे का आक्रोश, श्रीराम के लिए उनका समर्पण और लक्ष्मण रेखा खींचते वक्त का संकल्प जिस तरह से दिखाया, वो इतिहास बन चुका है. नितेश तिवारी ने इस चैलेंजिंग रोल के लिए टीवी और ओटीटी के मंझे हुए कलाकार रवि दुबे पर भरोसा जताया है. रवि दुबे अपने सोलफुल परफॉर्मेंस और स्क्रीन पर गहराई पैदा करने के लिए जाने जाते हैं. उनके सामने सबसे बड़ी परीक्षा यही है कि वे लक्ष्मण के अंदर के वीर रस और भाई के लिए प्यार के बैलेंस को किस तरह दर्शकों के सामने रख पाते हैं.
हनुमान: सनी देओल वर्सेस दारा सिंह
जब भी राम भक्त हनुमान की बात निकलती है, तो सबसे पहले दारा सिंह का चेहरा ही आंखों के सामने घूमने लगता है. उनकी जबरदस्त ताकत, गजब की फुर्ती और चेहरे पर दिखने वाला भोलापन लोगों के दिलों में हमेशा के लिए बस गया. अब इस यादगार किरदार को निभाने के लिए सनी देओल पूरी तरह तैयार हैं. ‘गदर’ फिल्म में ‘तारा सिंह’ का रोल निभा चुके सनी देओल के पास दमदार आवाज और भारी-भरकम शरीर तो है, पर हनुमान जी का रोल सिर्फ ताकत दिखाने का नहीं है. ये रोल प्रभु राम के लिए सच्ची भक्ति और विनम्रता का भी प्रतीक है. ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि सनी देओल ताकत के साथ-साथ इस भक्ति भाव को परदे पर कैसे उतारते हैं.
रावण: यश वर्सेस अरविंद त्रिवेदी
‘रामायण’ की कहानी जितनी प्रभु राम के बिना अधूरी है, उतनी ही लंकापति रावण के बिना भी अधूरी सी लगती है. टीवी पर अरविंद त्रिवेदी ने जिस रौब और दम के साथ शिव भक्त रावण का रोल निभाया था, लोग उसे आज तक नहीं भूले. अब ‘केजीएफ’ वाले सुपरस्टार यश पर्दे पर लंकापति रावण बनकर उतरे हैं. यश का भारी अंदाज, उनकी कड़क आवाज और स्क्रीन पर उनकी मौजूदगी इस किरदार के लिए एकदम फिट बैठती है, लेकिन यश के लिए असली चैलेंज ये है कि वे रावण को सिर्फ एक चिल्लाने वाले विलेन की तरह न दिखाएं. उन्हें पर्दे पर ये भी दिखाना होगा कि रावण कितना बड़ा शिवभक्त, ज्ञानी और अपने ही घमंड में डूबा हुआ राजा था.
क्या नई स्टारकास्ट बना पाएगी नई पहचान?
रणबीर कपूर, साई पल्लवी, रवि दुबे, सनी देओल और यश बेहतरीन कलाकार हैं, इसलिए इनके हुनर पर कोई सवाल नहीं है. असली सवाल ये है कि क्या ये लोग ऑडियंस के दिलों में वही जगह बना पाएंगे, जो करीब 39 साल पहले अरुण गोविल, दीपिका चिखलिया, सुनील लहरी, दारा सिंह और अरविंद त्रिवेदी ने बनाई थी. उस दौर में तकनीक बहुत सिंपल थी, फिर भी कलाकारों की सच्ची भावना सीधे दिल को छूती थी. आज भारी-भरकम बजट और हॉलीवुड जैसे इफेक्ट्स तो मौजूद हैं, पर असली जीत तभी होगी जब लोग परदे पर कलाकार को भूलकर सीधे अपने भगवान को महसूस करें. ये टक्कर अभिनय की नहीं, बल्कि दो पीढियों की आस्था और भरोसे की है.