'बहुत मोटी हो, हीरोइन कैसे बनोगी': राधिका मदान ने बॉडी-शैमिंग के काले सच से उठाया पर्दा, बताया कैसे झेला ताना
एक्ट्रेस राधिका मदान ने बॉडी-शैमिंग और अपने ट्रांसफॉर्मेशन को लेकर चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. उन्होंने बताया कि कैसे कभी उन्हें बहुत मोटा कहा गया तो कभी वजन घटाकर वे हड्डियों का ढांचा बन गई थीं.
Radhikka Madan Interview: बॉलीवुड और ओटीटी की पॉपुलर एक्ट्रेस राधिका मदान इन दिनों अपनी बेबाक बातों के लिए चर्चा में हैं. जब कैटरीना कैफ को उनके पोस्टपार्टम वेट गेन के लिए ट्रोल किया गया, तो राधिका ने खुलकर उनका सपोर्ट किया और अपनी खुद की दर्दभरी कहानी शेयर की. राधिका ने बताया कि फिल्म इंडस्ट्री में आने के बाद उन्हें किस तरह के भद्दे ताने सुनने पड़े थे. कभी उन्हें बहुत ज्यादा मोटा कहा गया तो कभी जीरो फिगर के चक्कर में वे इतनी पतली हो गईं कि सिर्फ हड्डियां ही दिखती थीं.
राधिका मदान ने एचटी को दिए इंटरव्यू के दौरान अपने शुरुआती दिनों को याद किया और बताया कि कैसे उन्हें बॉडी-शैमिंग का शिकार होना पड़ा था. उन्होंने खुलासा किया कि 'पटाखा' फिल्म के लिए उन्होंने करीब 15 किलो वजन बढ़ाया था. इसके बाद जब वे 'शिद्दत' और 'अंग्रेजी मीडियम' जैसी फिल्मों के लिए वेट घटा रही थीं, तो लोगों ने उन्हें जज करना शुरू कर दिया. राधिका ने बताया कि उनसे कहा गया था कि तुम बहुत मोटी हो, ऐसी लड़की हीरोइन कैसे बनेगी. इन बातों का असर उनके दिमाग पर पड़ने लगा और उन्होंने लगातार शूटिंग करते हुए हद से ज्यादा वजन घटा लिया.
हड्डियों का ढांचा बन गई थीं राधिका
वजन कम करने के इस पागलपन में राधिका की हालत ऐसी हो गई थी कि वे एकदम कमजोर पड़ गई थीं. उन्होंने बताया कि वे इतनी पतली हो गईं कि उनके शरीर पर सिर्फ हड्डियां ही नजर आने लगी थीं. जब इस स्ट्रगल ने उनकी फिजिकल और मेंटल हेल्थ को खराब करना शुरू किया, तब उन्हें समझ आया कि वे गलत रास्ते पर हैं. इसके बाद उन्होंने खुद को संभालने के लिए काम से ब्रेक लिया. राधिका ने माना कि आप कभी भी दुनिया को खुश नहीं कर सकते क्योंकि लोगों का काम सिर्फ कमियां निकालना होता है.
मैगजीन के फर्जी ब्यूटी स्टैंडर्ड्स
यंग जनरेशन और टीनएजर्स पर सोशल मीडिया के जरिए कैसे परफेक्ट दिखने का प्रेशर रहता है, इस पर भी एक्ट्रेस राधिका ने खुलकर बात की. उन्होंने कहा कि बचपन से ही हमारे दिमाग में यह बात बैठा दी जाती है कि एक महिला या लड़की कैसी दिखनी चाहिए. मैगजीन के कवर्स पर छपने वाली परफेक्ट मॉडल्स को देखकर क्लासरूम में पढ़ने वाली आम लड़कियां खुद को कमतर महसूस करने लगती हैं. राधिका ने यह भी बताया कि यदि किसी लड़की के चेहरे पर फेशियल हेयर हैं या यूनीब्रॉ है तो वह समाज के तय किए गए ब्यूटी स्टैंडर्ड्स में फिट न बैठने की वजह से खुद को बदसूरत समझने लगती है.
राधिका ने सुनाया दिलचस्प किस्सा
राधिका ने अपने बचपन का एक दिलचस्प किस्सा शेयर करते हुए बताया कि उनके स्कूल के दिनों में उनकी भी यूनीब्रॉ थी और वे काफी हेयरी थीं. लेकिन उनके माता-पिता ने उन्हें बहुत पॉजिटिव माहौल दिया और कभी ऐसा महसूस नहीं होने दिया कि वे किसी से कम हैं. राधिका के मुताबिक, बचपन में घर का माहौल इतना पॉजिटिव था कि उन्हें कभी दोस्तों से यह पूछने की जरूरत ही नहीं पड़ी कि वे सुंदर दिखती हैं या नहीं. राधिका कहती हैं कि खुद से प्यार करना आज के टाइम में भले ही थोड़ा घिसा-पिटा लगे, लेकिन अपनी कमियों के साथ खुद को अपनाना आज की जनरेशन के लिए सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट है.