'डांसिंग क्वीन': पर्दे पर भाई को बनाया लवर, तो जनता ने कर दिया बायकॉट! कभी देव आनंद की फिल्म से चमकी थी किस्मत
यूं तो हिंदी सिनेमा में एक से बढ़कर एक एक्ट्रेसेस हैं, जिन्होंने अपनी कला और खूबसूरती से पर्दे पर कमाल कर दिया. लेकिन आज हम जिस अदाकारा के बारे में बात कर रहे हैं, उन्होंने कम उम्र में ही स्क्रीन पर जादू बिखेर दिया और देव आनंद की सुपरहिट फिल्म में अपनी जगह पक्की कर ली थी. मगर एक गलत फैसले के चलते वो जनता के गुस्से का शिकार बन गईं.
हिंदी सिनेमा का 50s और 60s दशक एक ऐसा गोल्डन एरा था, जब सिल्वर स्क्रीन पर कई दिग्गज कलाकारों ने अपनी कभी ना मिटने वाली छाप छोड़ी थी. उस दौर में जब महिलाओं के लिए शिक्षा पाना भी एक बड़ी सफलता मानी जाती थी, तब एक ऐसी अदाकारा ने फिल्मों में कदम रखा जो अपनी लाजवाब एक्टिंग और कातिलाना डांस मूव्स के दम पर इंडस्ट्री की 'डांसिंग क्वीन' बन गईं. आज हम जिस आर्टिस्ट की बात कर रहे हैं, वो अपने समय की फेमस एक्ट्र्रेस मीनू मुमताज हैं, जिनकी जिंदगी स्ट्रगल, फेम और कॉन्ट्रोवर्शी के आसपास घूमती रही.
1950 और 1960 के दशक में हिंदी सिनेमा पर राज करने वाली मीनू मुमताज का फिल्मी दुनिया तक का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था. बचपन से ही उन्हें डांस में काफी दिलचस्पी थी और वो अपने पिता के साथ अलग-अलग शहरों में जाकर स्टेज शो किया करती थीं. लेकिन उनके घर के हालात बहुत अच्छे नहीं थे. उनके पिता को शराब की लत थी, जिसके कारण परिवार पर तंगी का सामना करना पड़ा. घर की इसी कड़की और बदहाली से तंग आकर मीनू ने कम उम्र से ही फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया.
'सीआईडी' ने रातों-रात बनाया स्टार
परिवार की बिगड़ती हालत और आर्थिक तंगी को सुधारने के लिए मीनू मुमताज ने कम उम्र में ही हिंदी सिनेमा में कदम रखा. उनकी मेहनत और कला रंग लाई और साल 1955 में महज 13 साल की उम्र में निर्देशक नानूभाई वकील ने उन्हें फिल्म 'सफी खातिम' से लॉन्च किया. हालांकि, उन्हें अपने करियर में सबसे बड़ी सफलता साल 1956 में देव आनंद की सुपरहिट फिल्म 'सीआईडी' से मिली. इस फिल्म में उनके काम ने लोगों का दिल जीत लिया और वो रातों-रात हिंदी सिनेमा की चमकता सितारा बन गईं.
एक बेहतरीन डांसर और दमदार एक्ट्रेस
'सीआईडी' की सफलता के बाद मीनू मुमताज के पास फिल्मों की लाइन लग गई. वो न सिर्फ एक खूबसूरत हीरोइन के रूप में जाने जानी लगीं, बल्कि अपने दौर की बेहतरीन नृत्यांगना भी थीं. उन्होंने लीड रोल के अलावा कई यादगार और साइड रोल भी किए, जिन्होंने फिल्मों में जान फूंक दी. उनकी कुछ बेहद यादगार फिल्मों में 'आशा', 'माई बाप', 'हलाकू', 'घर घर की बात', 'चित्रलेखा', 'चौदहवीं का चांद', 'कागज के फूल' और 'हावड़ा ब्रिज' जैसी कई सुपरहिट फिल्में शामिल हैं. अपनी लाजवाब कला से उन्होंने हर फिल्म में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई.
भाई के साथ स्क्रीन पर किया रोमांस
मीनू मुमताज के करियर में एक ऐसा समय भी आया, जब उन्हें जनता के भारी गुस्से का सामना करना पड़ा. मशहूर कॉमेडियन महमूद उनके सगे भाई थे. एक फिल्म में मीनू मुमताज ने अपने ही भाई महमूद के साथ स्क्रीन शेयर की थी और उस फिल्म में दोनों ने प्रेमी-प्रेमिका की भूमिका निभाई. भाई-बहन को पर्दे पर रोमांस करते देख फैंस भड़क उठे और जनता ने इस बात पर अपनी नाराजगी जताई. इस अजीबोगरीब वाकये के चलते ऑडियंस ने उनको बायकॉट कर दिया, जिसका असर उनके करियर पर भी पड़ा.
शादी के बाद छोड़ी मायानगरी
जिंदगी के उतार-चढ़ाव के बीच मीनू मुमताज ने 12 जून, 1963 को फिल्म निर्देशक सैयद अली अकबर यानी एस. अली अकबर से निकाह कर लिया. शादी के बाद उनके चार बच्चे हुए, जिनमें तीन बेटियां और एक बेटा शामिल हैं. परिवार और बच्चों की जिम्मेदारी संभालने के बाद उन्होंने धीरे-धीरे फिल्म इंडस्ट्री से पूरी तरह दूरी बना ली. आखिरकार, 23 अक्टूबर, 2021 को 79 साल की उम्र में इस महान 'डांसिंग क्वीन' ने इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया, लेकिन उनकी यादें आज भी सिनेमा प्रेमियों के दिलों में जिंदा हैं.