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मनोज बाजपेयी ने बताया क्यों मुश्किल लगता था गांव से मुंबई पहुंचना? सुनाई गरीबी और संघर्ष की कहानी

हिंदी सिनेमा के दिग्गज एक्टर मनोज बाजपेयी का जन्म गांव में हुआ. उन्होंने अपने बचपन में आर्थिक तंगी का सामना किया है. वहीं सालों बाद एक्टर ने इस बारे में बात की है.

Written By Shilpa Singh
Published: Oct 26, 2026, 10:11 PM IST | Updated: Oct 26, 2026, 10:16 PM IST
Image Credit: मनोज बाजपेयी बोले गांव से मुंबई तक का सफर आसान नहीं था
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बॉलीवुड इंडस्ट्री में मनोज बाजपेयी अपने टैलेंट और शानदार एक्टिंग के लिए जाने जाते हैं. हाल ही में मनोज बाजपेयी की फिल्म गजब रात रिलीज हुई है. इसी दौरान उन्होंने बताया है कि पॉडकास्ट से परेशान हो चुके हैं, क्योंकि पॉडकास्ट में अतीत और बचपन के बारे में बार-बार बात करके थक गए हैं.

बचपन से होने लगी नफरत

हाल ही में इंडियन फिल्म प्रोजेक्ट फेस्टिवल में मनोज बाजपेयी ने पॉडकास्ट से दूरी बनाने पर बात की है. एक्टर ने बताया कि वह अब पॉडकास्ट नहीं करते हैं, क्योंकि मैं अपने बचपन के बारे में बात करते-करते परेशान हो चुका है. अब कंडीशन ऐसी हो चुकी है कि मुझे बचपन से नफरत होने लगी है कि क्यों मैं गाव में पैदा हुआ, मेरी इतनी लंबी और मुश्किल जर्नी क्यों रही?

एक्टर ने बोला कि आज के समय में हर कोई उनके संघर्ष को इंस्पिरेशन मानता है, लेकिन जब वह उस कंडीशन में थे, तब उनके लिए इस कंडीशन से निपटना काफी मुश्किल था. मनोज बोले- मैं भी चाहता था कि मेरा जन्म दिल्ली में होता, कम से कम तब मुंबई तक जाने के लिए इतनी मशक्कत नहीं करनी पड़ती.

किसी नर्क से कम नहीं था संघर्ष

जब मेरा जन्म एक गांव में हुआ तो मुंबई जाने के लिए एक बस से दूसरी बस में धक्के खाने पड़ते थे. कौन ऐसा चाहता है. हर कोई इसे इंस्पिरेशनल जर्नी कहता है, लेकिन जब आप खुद उस कंडीशन से गुजर रहे होते हैं तो वह किसी नर्क से कम नहीं होता है. बिना पैसों के बिना पांच दिन गुजार कर देखो, जिंदगी जीने का सारा मजा ही खत्म हो जाएगा.

मनोज को पहचान बनाने के लिए करना पड़ा संघर्ष

मनोज बाजपेयी अपनी दमदार एक्टिंग के लिए जाने जाते हैं. वह ओटीटी प्लेटफॉर्म के किंग बन चुके हैं. मनोज बाजपेयी का जन्म बिहार के गांव में हुआ. एक्टर ने अपना करियर बनाने के लिए घर छोड़ दिया था. एक्टर ने 17 साल की उम्र में घर छोड़ दिया था. एक्टर जब मुंबई आए तो वह चॉल में 2 लोगों के साथ रहते थे. शुरुआत में काम मिलने में काफी दिक्कत होती थी. साल 1994 में शेखर कपूर की फिल्म बैंडिट क्वीन में उन्हें डाकू का किरदार मिला था. इसके बाद उन्होंने कई छोटे रोल किए. साल 1998 में उन्होंने क्राइम ड्रामा सत्या में गैंगस्टर की भूमिका निभाई. 

इसे भी पढ़ें-  रणबीर कपूर की ‘रामायण’ को टक्कर देने आ रहे अक्षय कुमार, 32 साल बाद सिनेमाघरों में लौटेगी कल्ट क्लासिक; बॉक्स ऑफिस पर होगा मुकाबला 
 

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मैं शिल्पा सिंह, पिछले 6 साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हूं. मैं 4 साल से ज़ी न्यूज़ हिंदी में बतौर सीनियर सब एडिटर काम कर रही हूं. ज़ी न्यूज़ में मैं एंटरटेनमेंट बीट पर भी काम कर रही हूं. मैंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत इंडिया न्यूज़ डिजिटल से की थी. इसके बाद वन इंडिया डिजिटल और जागरण न्यू मीडिया जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में भी काम किया है. इस दौरान मैंने एंटरटेनमेंट बीट पर लेखन के साथ-साथ सेलेब्रिटी इंटरव्यू, वीडियो स्टोरी, फिल्म रिव्यू और रिसर्च-बेस्ड कंटेंट की कवरेज की है. मैंने जामिया मिलिया इस्लामिया से जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया है. मेरा उद्देश्य किसी भी बीट पर काम करते हुए पाठकों तक सही, उपयोगी और भरोसेमंद जानकारी देना है.
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