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बॉलीवुड में इन दिनों एक नया ट्रेंड जोर पकड़ रहा है. फिल्म चले या न चले, लेकिन स्टार्स का रोब और दबदबा कम नहीं होना चाहिए. आजकल जब कोई बड़ा एक्टर शूटिंग सेट पर आता है, तो वह अकेला नहीं आता. उसके साथ चलती है 20 से 30 लोगों की पूरी फौज, जिसे फिल्म इंडस्ट्री की भाषा में 'सेलिब्रिटी ऑन्टुराज' कहा जाता है. इस ऑन्टुराज में मेकअप आर्टिस्ट, पर्सनल असिस्टेंट, स्टाइलिस्ट, सिक्योरिटी गार्ड, पर्सनल शेफ, जिम ट्रेनर और तो और उनके पालतू कुत्तों को संभालने वाली नैनी तक शामिल होती हैं. हाल ही में 'CID' फेम एक्टर दयानंद शेट्टी ने इस कल्चर पर ऐसा खुलासा किया है, जिसने पूरी इंडस्ट्री में तहलका मचा दिया है. सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह तामझाम फिल्म को बेहतर बनाने के लिए जरूरी है, या फिर यह सिर्फ एक स्टेटस सिंबल बनकर रह गया है जो प्रोड्यूसर्स की जेब खाली कर रहा है?
फिल्म इंडस्ट्री में 'ऑन्टुराज' शब्द का सीधा सा मतलब है किसी स्टार के साथ रहने वाले उनके पर्सनल स्टाफ की टीम. पहले के जमाने में एक्टर्स सेट पर अकेले या फिर अपने एक मैनेजर के साथ आ जाया करते थे. लेकिन आज के दौर में मामला बिल्कुल बदल चुका है. आज एक ए-लिस्ट बॉलीवुड स्टार के ऑन्टुराज में कम से कम 10 से 20 लोग शामिल होते हैं.
इनमें पर्सनल बॉडीगार्ड्स, मेकअप मैन, हेयर स्टाइलिस्ट, पर्सनल ड्रेस डिजाइनर या स्टाइलिस्ट, स्पॉट बॉय, ड्राइवर, सोशल मीडिया मैनेजर, डाइटिशियन और पर्सनल शेफ तक शामिल हैं. यह फौज स्टार के साथ हर वक्त साए की तरह रहती है. शूटिंग का लोकेशन चाहे मुंबई का कोई स्टूडियो हो या फिर स्विट्जरलैंड की हसीन वादियां, इस पूरी फौज का ट्रैवल, फाइव स्टार होटल में रुकना, खाना-पीना और दिन का भारी-भरकम भत्ता सब कुछ फिल्म के प्रोड्यूसर को ही उठाना पड़ता है.
इस पूरे मामले पर बहस तब फिर से भड़क उठी जब एक्टर दयानंद शेट्टी ने सिद्धार्थ कनन को दिए एक इंटरव्यू में बॉलीवुड के इस अजीबोगरीब कल्चर का सच सामने रखा. दयानंद शेट्टी ने खुलासा किया कि आज बॉलीवुड में सिर्फ एक्टर्स का ही नखरा नहीं चल रहा, बल्कि उनके पालतू कुत्तों को भी किसी नवाब की तरह ट्रीट किया जा रहा है.
दयानंद ने बताया कि कुछ स्टार्स शूटिंग सेट पर अपने कुत्तों को लेकर आते हैं. उन कुत्तों के लिए स्पेशल नैनी रखी जाती हैं जो दिनभर उन्हें टहलाती और खाना खिलाती हैं. हद तो तब हो जाती है जब इन पेट्स को सनग्लासेस पहनाए जाते हैं, महंगे कपड़े पहनाए जाते हैं और उनका हल्का-फुल्का मेकअप तक किया जाता है. दयानंद शेट्टी ने सवाल उठाया कि जिस सेट पर फिल्म बनाने के लिए लोग दिन-रात मेहनत कर रहे हैं, वहां इस तरह का शो-ऑफ किसलिए? इस खुलासे ने नेटिजन्स और इंडस्ट्री के समझदार लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है.
एक रिपोर्ट के मुताबिक, किसी-किसी बड़े स्टार के ऑन्टुराज का रोजाना का खर्च लाखों रुपये में बैठता है. कई बार तो फिल्म के कुल बजट का 20 से 30 परसेंट हिस्सा सिर्फ स्टार की फीस और उसके ऑन्टुराज के खर्च में चला जाता है. इंडस्ट्री के जाने-माने मेकर्स जैसे सुधीर मिश्रा और गजराज राव ने भी इस पर अपनी नाराजगी जाहिर की है. सुधीर मिश्रा ने एक बार कहा था कि आजकल की फिल्मों के सेट पर सिर्फ पीने के पानी की बोतलों का जो बजट होता है, उतने बजट में पहले के दौर में एक पूरी इंडिपेंडेंट शार्ट फिल्म बन जाया करती थी. इसके अलावा, एक ही एक्टर के अलग-अलग स्टाफ के लिए 5 से 7 वैनिटी वैन मंगवाई जाती हैं. एक वैनिटी स्टार के लिए, एक उसके जिम के लिए, एक उसके मेकअप के लिए और एक उसके मीटिंग्स के लिए. यह फिजूलखर्ची अब प्रोड्यूसर्स के लिए गले की हड्डी बन चुकी है.
इस मामले में द इंडियन एक्सप्रेस की मई 2024 की इंडस्ट्री रिपोर्ट ने लोगों को हैरान किया था. इस रिपोर्ट के मुताबिक, बड़े स्टार का ओवरहेड/ऑन्टुराज खर्च करीब ₹20–22 लाख प्रति दिन तक पहुंच सकता है. इसमें स्टाफ, वैनिटी वैन, जेनरेटर, फूड ट्रक, शेफ आदि शामिल हो सकते हैं. रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि अगर फिल्म 70 दिन शूट होती है, तो सिर्फ मेल और फीमेल लीड के ओवरहेड पर करीब ₹15–20 करोड़ खर्च हो सकते हैं. द इकोनॉमिक्स टाइम्स की मार्च 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक बड़े और हाई-मिड बजट फिल्मों में एक्टर्स के ऑन्टुराज अब कुल फिल्म बजट का करीब 10–12% तक खा सकते हैं. रिपोर्ट में पर्सनल स्टाफ, मेकअप आर्टिस्ट, फिटनेस ट्रेनर्स, मैनेजर्स और कंपेनियन्स जैसी लागतों का जिक्र है.
इसका मतलब है कि ₹100 करोड़ के प्रोडक्शन बजट वाली फिल्म में, इंडस्ट्री एस्टीमेट के हिसाब से ऑन्टुराज-रिलेटेड खर्च ₹10–12 करोड़ तक पहुंच सकता है. हालांकि यह पूरी फिल्म की लागत का अनुमान है, इसे किसी एक स्टार की रोजाना फीस नहीं समझना चाहिए.

यहां बोनी कपूर का बयान काफी महत्वपूर्ण है. पिछले साल सितंबर महीने में द इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए उन्होंने बताया था कि वह अपनी बेटी जान्हवी कपूर के ट्रैवल और रहने खर्चे खुद वहन करते हैं. उनके द्वारा दिए गए बयान के मुताबिक, हर स्टार के साथ उसकी टीम पर ₹1–5 लाख प्रति दिन का अतिरिक्त खर्च हो सकता है. उन्होंने सामान्य तौर पर ₹3–5 लाख प्रति दिन का उदाहरण भी दिया और कहा कि स्टाइलिस्ट का खर्च इसके अलावा हो सकता है. लेकिन बड़े स्टार और ज्यादा एलोबरेटेड ऑन्टुराज के मामले में यही खर्च ₹20–22 लाख/दिन तक पहुंचने की इंडस्ट्री रिपोर्टिंग भी मौजूद है. इसलिए प्रोड्यूसर का एक्स्ट्रा बर्डन स्टार के स्तर और कॉन्ट्रैक्ट पर बहुत निर्भर करता है. उदाहरण के लिए अगर किसी बड़े स्टार का ऑन्टुराज खर्च ₹5 लाख/दिन है और फिल्म में उसकी 50 दिन की शूटिंग है, तो सिर्फ ऑन्टुराज पर ₹2.5 करोड़ एक्स्ट्रा जा सकते हैं. अगर खर्च ₹20 लाख/दिन तक पहुंचता है, तो 50 दिनों में यह ₹10 करोड़ हो जाएगा.
सवाल- हाल ही में दयानंद शेट्टी और अनुराग कश्यप जैसे मेकर्स ने एक्टर्स के भारी-भरकम ऑन्टुराज और उनके पेट्स के नखरों पर सवाल उठाए हैं. एक क्रिटिक के तौर पर, क्या आपको लगता है कि बॉलीवुड फिल्मों की गिरती क्वालिटी की एक बड़ी वजह बजट का सही जगह पर न लगकर स्टार्स की इस लग्जरी पर खर्च होना है?
जवाब-

सवाल- साउथ सिनेमा में रजनीकांत और विजय सेतुपति जैसे बड़े स्टार्स बिना किसी भारी-भरकम फौज के बेहद सादगी से सेट पर आते हैं, जबकि बॉलीवुड में 7-7 वैनिटी वैन और दर्जनों स्टाफ का कल्चर है. साउथ और बॉलीवुड के इस वर्क-कल्चर के फर्क को आप क्रिटिक के नजरिए से कैसे देखते हैं?
जवाब- साउथ में 110% सादगी है. साउथ के स्टार्स को कई बार मैंने खुद इंटरव्यू किया है, कमल हासन से लेकर मोहनलाल तक, एक सिंपल तरीके से वे अकेले शूटिंग लोकेशन पर चले आते हैं. एक बार तो एक किस्सा मुझे किसी ने बताया था कि रजनीकांत जो हैं वे ऑटो से आ गए थे और उनके पास पैसे नहीं थे कैश, तो उन्होंने आकर प्रोड्यूसर केसी बोकाड़िया से पैसे मांगे थे. तो साउथ के स्टार्स की सादगी बिल्कुल है. उनके साथ उतना बड़ा ऑन्टुराज देखने को नहीं मिलता है. और जाहिर तौर पर वे अपनी फिल्मों पर ज्यादा पैसा खर्च करते हैं.
सवाल- जब फिल्में लगातार फ्लॉप हो रही हों, तब स्टार्स के इस 'ऑन्टुराज कॉस्ट' का बोझ आखिरकार प्रोड्यूसर्स और फिल्म की ओवरऑल इकोनॉमी पर पड़ता है. क्या आपको लगता है कि अब प्रोड्यूसर्स गिल्ड को स्टार्स के पर्सनल स्टाफ और खर्चों पर एक सख्त कैपिंग या स्टैंडर्ड गाइडलाइन बना देनी चाहिए?
जवाब- प्रोड्यूसर्स गिल्ड को आगे आना चाहिए, लेकिन सवाल यह है कि क्या प्रोड्यूसर्स गिल्ड अपने आप में इतना पावरफुल है कि वह किसी स्टार के ऊपर कैपिंग लगा सके? और क्या यह कैपिंग लगाने के बाद मामला जो है वह बैलेंस होगा? क्योंकि कहीं न कहीं स्टार तो प्रोड्यूसर से कहेगा न कि भाई, मुझे यह देगा तो तेरी फिल्म करूंगा, नहीं तो नहीं करूंगा. तो प्रोड्यूसर्स गिल्ड अगर आ भी जाएगा, तो मुझे लगता नहीं है कि उससे कोई बहुत फायदा उन गाइडलाइंस का होने भी वाला है; क्योंकि स्टार उसके बाद सामने वाले प्रोड्यूसर से डायरेक्ट बात कर सकता है कि भाई, मैं तो नहीं करूंगा या फिर जवाब ही नहीं देगा उसको. तो कुल मिलाकर जब तक स्टार्स इस बात को नहीं समझेंगे न कि हमें अपना ऑन्टुराज कम करना पड़ेगा, प्रोड्यूसर्स पर बोझ पड़ रहा है, तब तक आप कितनी गाइडलाइंस बना लीजिए, कुछ कर लीजिए, उससे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला.
बॉलीवुड में इस बढ़ते ऑन्टुराज कल्चर के खिलाफ अब अंदर से ही आवाजें उठने लगी हैं. मशहूर फिल्ममेकर अनुराग कश्यप और प्रियदर्शन ने खुलकर कहा है कि बॉलीवुड का यह अनियंत्रित खर्च ही उसकी तबाही का कारण बन रहा है. अनुराग कश्यप ने कई बार कहा है कि फिल्म का बजट फिल्म बनाने में नहीं, बल्कि स्टार्स के नखरे उठाने में खर्च हो जाता है.
इसी तरह एक्टर जॉन अब्राहम, वरुण धवन और कृति सेनन जैसे यंग स्टार्स ने भी इस बात से सहमति जताई है कि इतनी बड़ी टीम की सेट पर कोई जरूरत नहीं होती. जॉन अब्राहम तो खुद अपने सादगी भरे अंदाज के लिए जाने जाते हैं. उनका मानना है कि जब आप काम करने आए हैं, तो आपको 15 लोगों की जरूरत नहीं होनी चाहिए. लेकिन अफसोस की बात यह है कि ऐसे स्टार्स बहुत कम हैं.
अगर हम बॉलीवुड की तुलना साउथ इंडियन फिल्म इंडस्ट्री (टॉलीवुड, कॉलीवुड, मॉलीवुड) से करें, तो फर्क साफ नजर आता है. साउथ के बड़े से बड़े सुपरस्टार्स जैसे रजनीकांत, विजय सेतुपति या ममूटी सेट पर बेहद सादगी के साथ आते हैं. वहां काम को पूजा माना जाता है और अनुशासन पहली प्राथमिकता होती है. साउथ सिनेमा में ऑन्टुराज कल्चर बहुत सीमित है. वहां एक्टर्स का स्टाफ बहुत कम होता है और उनका पूरा ध्यान इस बात पर होता है कि प्रोड्यूसर का पैसा फिल्म के VFX, एक्शन और कंटेंट पर खर्च हो, न कि उनकी पर्सनल लग्जरी पर. यही वजह है कि आज साउथ की फिल्में कम बजट में भी भव्य दिखती हैं और बॉक्स ऑफिस पर ताबड़तोड़ कमाई करती हैं, जबकि बॉलीवुड की बड़ी बजट फिल्में भी फ्लॉप साबित हो रही हैं.
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या इतना बड़ा ऑन्टुराज रखने से एक्टर की परफॉरमेंस सुधरती है? जवाब है- बिल्कुल नहीं. मेकअप और हेयर स्टाइलिस्ट तक तो बात समझ आती है, क्योंकि स्क्रीन पर अच्छा दिखना एक्टर की जरूरत है. लेकिन पेट नैनी, 5 बॉडीगार्ड्स, और 3 पर्सनल कुक का फिल्म की एक्टिंग या क्वालिटी से कोई लेना-देना नहीं होता. यह पूरी तरह से एक स्टेटस सिंबल बन चुका है. बॉलीवुड में एक होड़ सी मच गई है कि अगर उस स्टार के साथ 10 लोग चलते हैं, तो मेरे साथ 15 लोग चलने चाहिए. यह माइंडसेट सिनेमा को अंदर से खोखला कर रहा है. एक्टर्स अपनी जिम्मेदारी भूलकर सिर्फ अपनी सहूलियत और चमक-धमक में मस्त हैं, जिससे फिल्म की कहानी और मेकिंग पर बुरा असर पड़ता है.