राजधानी दिल्ली का मौसम एक बार फिर से आपको प्रदूषण भरी सर्दी की तरफ ले जा रहा है. इस बार अस्थायी पाबंदियों से आगे बढ़कर गाड़ियों के लिए एक लंबा और चरणबद्ध रोडमैप आया है. विंटर एक्शन प्लान में गाड़ियों को लेकर एक रणनीति है. इसमें पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को धीरे-धीरे बाहर किया जाएगा और इलेक्ट्रिक वाहनों को अनिवार्य बनाया जाएगा. ऐसे कई कदम शामिल हैं. इस रोडमैप पर अचानक नहीं बल्कि सिलसिलेवार तरीके से काम शुरू हो चुका है.
असल में सबसे पहले समझिए 1 अक्टूबर से क्या बदला है. पूरे NCR में 1 अक्टूबर 2026 से वैध Pollution Under Control Certificate यानी PUCC के बिना वाहनों को पेट्रोल, डीजल या CNG जैसे ईंधन की बिक्री नहीं की जानी है. CAQM ने मई 2026 में Direction No. 101 के जरिए इस व्यवस्था को मंजूरी दी थी. इसका मतलब है कि अगर आपकी गाड़ी का PUCC खत्म हो चुका है, तो ईंधन भराने से पहले उसे दोबारा बनवाना जरूरी होगा.
इस नियम की निगरानी सिर्फ पंप कर्मचारियों के भरोसे नहीं रहेगी. दिल्ली में ANPR यानी Automatic Number Plate Recognition कैमरों से लैस करीब 500 फ्यूल स्टेशन हैं. इन कैमरों और दूसरे डिजिटल सिस्टम की मदद से वाहनों की पहचान और PUCC की स्थिति की जांच की जाएगी. दिल्ली में इस तरह की व्यवस्था पहले से लागू थी और अब इसे पूरे NCR में लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है.
दिल्ली सरकार ने 28 सितंबर को घोषित विंटर एक्शन प्लान में कहा कि दिल्ली के बाहर रजिस्टर्ड और BS-VI मानक को पूरा नहीं करने वाले वाहनों को 1 नवंबर से राजधानी में प्रवेश नहीं दिया जाएगा. इसमें पुराने पेट्रोल और डीजल वाहन प्रभावित होंगे. CNG और इलेक्ट्रिक वाहनों को इस प्रतिबंध से छूट दी गई है.
यहां एक जरूरी बात समझना जरूरी है. 1 नवंबर की यह नई पाबंदी दिल्ली सरकार के विंटर एक्शन प्लान का हिस्सा है. इसे केवल पुराने कमर्शियल गुड्स वाहनों वाले CAQM नियम के साथ नहीं मिलाना चाहिए. यानी बाहर रजिस्टर्ड निजी या अन्य वाहन भी नए विंटर प्लान के दायरे में आ सकते हैं, अगर वे BS-VI मानक के नहीं हैं. सरकार ने इस घोषणा में इस रोक की अंतिम तारीख अलग से तय नहीं की है.
अगर आपकी कार या बाइक दिल्ली के बाहर रजिस्टर्ड है और वह पेट्रोल या डीजल से चलती है, तो सबसे पहले उसका emission standard देखना होगा. अगर वह BS-VI है, तो इस नई रोक के कारण एंट्री पर समस्या नहीं होगी. अगर वह BS-III या BS-IV जैसी पुरानी emission category में आती है, तो 1 नवंबर से दिल्ली में प्रवेश पर रोक लागू होगी. CNG और EV वाहनों को इस नियम में छूट दी गई है.
कमर्शियल गुड्स वाहनों के लिए नियम पहले से ही ज्यादा सख्त हैं
CAQM ने बाहर रजिस्टर्ड BS-VI से नीचे के LGV, MGV और HGV यानी हल्के, मध्यम और भारी मालवाहक वाहनों की दिल्ली में एंट्री पर रोक का प्रावधान किया था. BS-IV कमर्शियल गुड्स वाहनों को एक संक्रमण अवधि के तहत 31 अक्टूबर 2026 तक प्रवेश की अनुमति थी. यह अवधि खत्म होने के बाद BS-VI, CNG, LNG और इलेक्ट्रिक वाहनों को ही इस श्रेणी में प्रवेश की अनुमति रहेगी.
इसका सीधा मतलब यह है कि बाहर रजिस्टर्ड BS-IV डीजल ट्रक, टेंपो या दूसरे मालवाहक वाहन जो अभी तक मिली राहत के कारण दिल्ली आ पा रहे थे, 1 नवंबर से उस राहत का लाभ नहीं ले पाएंगे. दिल्ली में रजिस्टर्ड कमर्शियल गुड्स वाहनों पर इस खास बाहरी-वाहन प्रवेश प्रतिबंध का वही असर नहीं है. हालांकि प्रदूषण की स्थिति खराब होने पर GRAP के तहत अलग और ज्यादा सख्त प्रतिबंध लागू हो सकते हैं.
जरूरी सामान वाले ट्रकों को लेकर भी स्थिति समझना जरूरी है.
GRAP के अलग-अलग चरणों में कुछ आवश्यक वस्तुओं और जरूरी सेवाओं से जुड़े वाहनों को सीमित छूट दी जाती रही है. उदाहरण के लिए जनवरी 2026 में GRAP Stage-IV के दौरान BS-IV ट्रकों की एंट्री पर रोक लगाते समय जरूरी वस्तुएं या जरूरी सेवाएं ले जाने वाले वाहनों के लिए अपवाद रखा गया था. इसलिए सामान्य नियम और आपातकालीन GRAP प्रतिबंधों को एक ही व्यवस्था नहीं माना जाना चाहिए.
CAQM के Direction No. 93 के मुताबिक दिल्ली में आने वाली बसें CNG, इलेक्ट्रिक या BS-VI डीजल की होनी चाहिए. यह नियम All India Tourist Permit वाली बसों के साथ-साथ दूसरे service regimes में चलने वाली बसों पर भी लागू होगा. दिल्ली में रजिस्टर्ड बसों को इस खास प्रवेश प्रतिबंध से छूट दी गई है.
इसका मतलब यह हुआ कि उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान या किसी दूसरे राज्य से दिल्ली आने वाली पुरानी BS-IV या उससे नीचे की डीजल बसों के लिए 1 नवंबर के बाद रास्ता आसान नहीं रहेगा. दूसरी ओर CNG, EV और BS-VI डीजल बसें दिल्ली में आ सकेंगी. CAQM ने सीमा पर ANPR, RFID या दूसरी तकनीकी व्यवस्था से इन नियमों की निगरानी की बात कही है.

CAQM ने नवंबर 2025 में संशोधित GRAP जारी किया था, जिसमें प्रदूषण बढ़ने पर अलग-अलग चरणों में वाहनों पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाए जाते हैं. Stage-III में BS-III पेट्रोल और BS-IV डीजल चारपहिया वाहनों पर दिल्ली के साथ गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर में भी सख्त पाबंदियां लगाई जा सकती हैं. बाहर रजिस्टर्ड BS-IV और उससे नीचे के डीजल LCV की दिल्ली में एंट्री पर भी Stage-III के दौरान रोक का प्रावधान है.
पिछली सर्दियों में इसका असर भी देखने को मिला था. जनवरी 2026 में दिल्ली का AQI बेहद खराब स्तर पर पहुंचने के बाद GRAP Stage-IV लागू किया गया था. उस दौरान दिल्ली में ट्रकों की एंट्री पर भी कड़े प्रतिबंध लगाए गए थे और LNG, CNG, इलेक्ट्रिक तथा BS-VI डीजल ट्रकों को अनुमति दी गई थी. यानी 1 नवंबर की सामान्य व्यवस्था के अलावा हवा की स्थिति बिगड़ने पर GRAP के तहत अलग से और कड़े नियम लागू हो सकते हैं.
दिल्ली की EV Policy 2026 के तहत 1 जनवरी 2027 से दिल्ली में नए L5 श्रेणी के थ्री-व्हीलर यानी यात्री और माल ढोने वाले वाहनों के रजिस्ट्रेशन को इलेक्ट्रिक तक सीमित किया गया है. यही व्यवस्था 1 जनवरी 2028 से गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर जैसे हाई व्हीकल डेंसिटी जिलों में और 1 जनवरी 2029 से बाकी NCR जिलों में लागू करने का CAQM रोडमैप है.
दोपहिया के लिए भी तारीख तय है. दिल्ली EV Policy 2026 के मुताबिक 1 अप्रैल 2028 से दिल्ली में नए दोपहिया वाहनों का रजिस्ट्रेशन सिर्फ इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए होगा. इसका मतलब यह नहीं है कि उस तारीख को दिल्ली की सड़कों पर चल रहे सभी पेट्रोल स्कूटर या बाइक अचानक बंद हो जाएंगे. यह नियम नए दोपहिया वाहनों के रजिस्ट्रेशन से जुड़ा है. मौजूदा वाहनों पर अलग-अलग लागू नियम उनकी श्रेणी और वैधता के हिसाब से रहेंगे.
आम वाहन मालिक के लिए अभी सबसे जरूरी चार चीजें हैं. पहला, गाड़ी का BS emission standard देखें. दूसरा, RC में उसका registration state देखें. तीसरा, PUCC की validity जांचें. चौथा, अगर वाहन कमर्शियल है तो उसके लिए लागू CAQM और GRAP नियम अलग से देखें. खासकर बाहर रजिस्टर्ड पेट्रोल-डीजल वाहन मालिक 1 नवंबर से पहले यह जरूर पता कर लें कि उनकी गाड़ी BS-VI है या नहीं.

आगे की तैयारी अभी करें
दिल्ली की इस पूरी रणनीति को सिर्फ 1 नवंबर की नो-एंट्री के तौर पर देखना सही नहीं होगा. PUCC आधारित ईंधन व्यवस्था, पुराने कमर्शियल वाहनों पर सख्ती, बाहर से आने वाली बसों के लिए BS-VI/CNG/EV की शर्त और आने वाले वर्षों में दोपहिया व थ्री-व्हीलर के इलेक्ट्रिफिकेशन की समयसीमा मिलकर दिल्ली-NCR के परिवहन को धीरे-धीरे बदलने की दिशा दिखाती है. हालांकि हर वाहन पर एक जैसा नियम लागू नहीं है. इसलिए अपनी गाड़ी की category, fuel type, emission standard और registration location देखकर ही यह तय करें कि 1 अक्टूबर और 1 नवंबर के नियमों में से कौन सा आपके वाहन पर लागू होता है.