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नोएडा के एलिवेटेड रोड सफर करने वाले वाहन चालकों की परेशानी कुछ हफ्तों के लिए बढ़ सकती है. सेक्टर-33 के इस्कॉन मंदिर के पास सड़क के मरम्मत का काम चल रहा है. इस कारण से सेक्टर-62 से सेक्टर-18 की तरफ जाने वाली लेन को एक हफ्ते के लिए बंद किया गया है. ऐसे में इस तरफ से जाने वाली गाड़ियों के प्रभावित होने की आशंका है. सड़क पर बार-बार गड्ढे होने के कारण नोएडा प्राधिकरण ने मरम्मत के साथ-साथ इसकी तकनीकी जांच कराने का भी निर्णय लिया है. वहीं ट्रैफिक पुलिस ने यात्रा करने वाले लोगों से अपील की है कि रास्ते पर निकलने से पहले अपनी यात्रा की प्लानिंग करके निकले, जिससे जाम में न फंसना पड़े.
DCP ट्रैफिक सैयद अली अब्बास ने बताया कि एलिवेटेड रोड पर मरम्मत का काम चल रहा है. इसके चलते सेक्टर-62 से सेक्टर-18 की ओर जाने वाली लेन पर यातायात बंद रखा जाएगा. संबंधित जगह पर बैरिकेडिंग कर गाड़ियों की आवाजाही को रोक दिया गया है. सेक्टर-18 से सेक्टर-62 की तरफ जाने वाली लेन पर ट्रैफिक सामान्य रूप से जारी है. मरम्मत का काम पूरा होने तक इस रास्ते से गुजरने वाली गाड़ी चालकों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत होगी.
एलिवेटेड रोड पर बार-बार गड्ढा होने के कारण सड़क निर्माण की क्वालिटी और उसकी मजबूती को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. जानकारी के अनुसार, रविवार को सेक्टर-33 के इस्कॉन मंदिर के पास सड़क की ऊपरी परत धंस गई थी. इसके बाद इसकी मरम्मत दोबारा से करवाई गई और सड़क को चोलू कर दिया गया. लेकिन मंगलवार को यहां दोबारा से गड्ढा हो गया. इस बार सड़क के नीचे मौजूद सरिया भी दिखाई देने लगा, जिससे मामले की गंभीरता बढ़ गई. ऐसे में ये सवाल उठना जायज है कि सड़क की ऊपरी परत बार-बार क्यों खराब हो रही है. क्या समस्या केवल सड़क की ऊपरी परत तक है.
नोएडा प्राधिकरण ने IIT रुड़की और ब्रिज कारपोरेशन के इंजीनियरों से तकनीकी जांच कराने का फैसला लिया है. इस जांच में सड़क की ऊपरी परत के साथ-साथ उसके नीचे मौजूद कंक्रीट और स्टील स्ट्रक्चर की स्थिति का भी आकलन किया जाएगा. वहीं विशेषज्ञ ये पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि सड़क बार-बार धंसने के पीछे क्या कारण है. साथ ही आगे चलकर इस तरह की समस्या को रोकने के लिए क्या किया जा सकता है.
तकनीकी जांच इसलिए भी जरूरी मानी जा रही है, क्योंकि केवल ऊपरी सतह की मरम्मत करने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल सकता. अगर सड़क के नीचे किसी प्रकार की कमजोरी या तकनीकी खामी सामने आती है, तो उसे दूर करना जरूरी होगा. जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की मरम्मत और आवश्यक सुधारों को लेकर निर्णय लिया जा सकेगा.
सेक्टर-27 से सेक्टर-60 तक बनी करीब 4.8 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड रोड नोएडा की महत्वपूर्ण सड़कों में शामिल है. ये रास्ते दिल्ली से नोएडा आने-जाने वाले लोगों के साथ गाजियाबाद, सेक्टर-62, 7X सोसायटियों और ग्रेटर नोएडा वेस्ट की तरफ जाने वाले वाहन चालकों के लिए भी काफी उपयोगी है. सुबह और शाम के व्यस्त समय में इस मार्ग पर वाहनों का दबाव अधिक रहता है.
ऐसे में सेक्टर-62 से सेक्टर-18 की तरफ जाने वाली लेन एक हफ्ते तक बंद रहने से वाहन चालकों को अपनी मंजिल तक पहुंचने में अतिरिक्त समय लग सकता है. यातायात का दबाव आसपास के रास्तों पर भी बढ़ने की आशंका है. खासकर कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों, व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े लोगों और रोजाना इस रास्ता का इस्तेमाल करने वाले यात्रियों को परेशानी हो सकती है.
वाहन चालकों को सलाह दी जाती है कि वे घर से निकलने से पहले अपनी यात्रा की योजना बनाएं, यातायात पुलिस के दिशा-निर्देशों का पालन करें और जरूरत पड़ने पर ऑप्शनल रास्तों का इस्तेमाल करें. बैरिकेडिंग के आसपास जल्दबाजी करने या बंद लेन में प्रवेश करने से बचना भी जरूरी है.
इस एलिवेटेड रोड को 480 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है. साल 2017 में आम लोगों के लिए इसे खोला गया था. इसका उद्देश्य नोएडा के प्रमुख मार्गों पर यातायात का दबाव कम करना और वाहन चालकों को तेज तथा सुगम आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराना था. अब एक ही जगह पर बार-बार गड्ढा होने की घटना ने सड़क के रखरखाव और उसकी मौजूदा स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
प्रभावित लेन पर मरम्मत का काम के चलते यातायात बंद रखा गया है. प्राधिकरण की ओर से प्रस्तावित तकनीकी जांच के बाद ही सड़क धंसने के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा. अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल ये है कि मरम्मत के बाद सड़क को किस तरह सुरक्षित और मजबूत बनाया जाएगा, ताकि गाड़ी चलाने वालों को बार-बार ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े.
एक हफ्ते तक चलने वाले मरम्मत कार्य के दौरान वाहन चालकों को सावधानी बरतने और यातायात संबंधी अपडेट पर नजर रखने की जरूरत है. वहीं, तकनीकी जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि एलिवेटेड रोड पर बार-बार गड्ढा होने की समस्या के पीछे वास्तविक वजह क्या है.
(नोएडा से विजय कुमार की रिपोर्ट)