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DUSU Election 2026: DUSU चुनाव 2026 के लिए वोटिंग की प्रक्रिया बीते शुक्रवार को पूरी हुई. वहीं शनिवार यानी कि आज वोटों की गिनती हुई, जिसमें अध्यक्ष पद पर यश डबास ने जीत दर्ज की. वहीं उपाध्यक्ष पद को निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने अपने नाम किया. सचिव पद पर ABVP की रिया छावड़ी ने बाजी मारी और संयुक्त सचिव पद पर ABVP के लक्ष्य राज सिंह ने जीत हासिल की है.
वहीं NSUI ने किसी भी पद पर जीत दर्ज नहीं की है. इस बार के छात्रसंघ चुनाव में NSUI का सूपड़ा साफ हो गया है. जहां एक तरफ ABVP ने बड़ी जीत दर्ज करते हुए 3 प्रमुख पदों (अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव) पर अपना कब्जा जमाया, तो दूसरी तरफ NSUI को चारों पदों में से किसी पर भी जीत हासिल नहीं हो सकी है.
NSUI पैनल में किसको कितने वोट मिले
अध्यक्ष: विजय शंकर मीणा-22523
उपाध्यक्ष: वीर चतरथ-4313
सचिव: नम्रता चौधरी-13,451
संयुक्त सचिव: गोपाल चौधरी-13,293
डूसू चुनाव 2026 किस पद पर कौन जीता?
अध्यक्ष: यश डबास
उपाध्यक्ष: दीपांशु शौकीन
सचिव: रिया छावड़ी
संयुक्त सचिव: लक्ष्य राज सिंह
कितने परसेंट ज्यादा पड़े वोट?
इस बार के DUSU चुनाव में छात्रों की भागीदारी पिछले साल की तुलना में थोड़ी ज्यादा है. पीछले साल की बात करें तो 2025 में कुल 39.45 परसेंट वोट पड़े थे, जबकि 2024 में 29.7 परसेंट वोट हुए थे. इस बार 2024 की तुलना में लगभग 10 परसेंट ज्यादा वोट पड़े हैं. वहीं दूसरी तरफ मतदान के दौरान पहले साल के छात्रों मे वोटिंग को लेकर ज्यादा उत्साह देखने को मिला. इतना ही नहीं दूसरे, तीसरे और चौथे साल के छात्रों की तुलना में फर्स्ट ईयर के छात्रों ने ज्यादा वोट डाले हैं. चुनाव सही से हो सके इसके लिए दिल्ली विश्वविद्यालय में 52 मतदान केंद्र और 158 बूथ बनाए गए थे.
कितने बजे शुरू हुई थी वोटिंग?
DUSU चुनाव के वोटों की गिनती शानिवार यानी कि आज सुबह 8 बजे से ही शुरू हो गई थी. इतना ही नहीं काउंटिंग सेंटर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा के लिए 2 हजार से ज्यादा पुलिस और पैरामिलिट्री जवान तैनात किए गए थे. बीते शुक्रवार को हुए मतदान में 40.46% वोटिंग हुई थी.
कितने कॉलेजों में बैलेट पेपर से हुई वोटिंग
इस बार डूसू चुनाव में EVM के साथ बैलेट पेपर का भी यूज किया गया. यूनिवर्सिटी के 10 कॉलेजों में बैलेट पेपर के तहत वोटिंग कराया गया. वहीं बाकी के मतदान केंद्रो पर EVM से वोट डाले गए. वहीं हंसराज कॉलेज की प्रिंसिपल प्रो. रमा के ने बताया कि बैलेट पेपर से मतदान कराने के पीछे का कारण चुनाव प्रक्रिया को सुचारू बनाए रखना था. इससे तकनीकी खराबी की संभावना कम रहती है. साथ ही मतदान प्रक्रिया को आसानी से पूरा किया जा सकता है.