दिल्ली की हवा में घुला जहर! 3 दिन में 100 अंक बढ़ा AQI, ITO में 430 के पार
राजधानी की हवा अब धीरे-धीरे खराब होने लगी है. यहां की हवा में प्रदूषण का लेवल तेजी से बढ़ रहा है. ऐसे में लोगों को अब सांस लेने में परेशानी होना शुरू हो जएगी. केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने बताया कि रविवार को राजधानी का AQI 187 पर था.
दिल्ली में प्रदूषण का स्तर अब धीरे-धीरे बढ़ रहा है. ऐसे में लोगों को खराब श्रेणी वाली प्रदूषित हवा में सांस लेनी पड़ सकती है. ऐसा कहा जा रहा है कि सोमवार से राजधानी की हवा खराब श्रेणी में पहुंच सकती है. शुक्रवार को जो वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) था उसकी तुलना में रविवार को एक्यूआई दोगुने से अधिक पहुंच गया.
दिल्ली की हवा में प्रदूषण का लेवल तेजी से बढ़ते हुए दिख रहा है. प्रदूषक कण का हवा में ज्यादा देर तक रहने का कारण बारिश की गतिविधियां थमने और हवा की रफ्तार धीमी होना है. अभी फिलहाल कोई मौसमी परिघटना नहीं है, जो प्रदूषण के कणों को तेजी से साफ कर दे. इसके कारण पिछले तीन दिनों में प्रदूषण के लेवल में खासा बढ़ोतरी देखने को मिला है.
कितने पर पहुंचा AQI?
केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने बताया कि रविवार को राजधानी का AQI 187 पर था. इस लेवल की हवा को मध्यम श्रेणी में रखा जाता है. वहीं इसके एक दिन पहले ये नंबर 159 था. इसका मतलब ये है कि 24 घंटे में 28 अंकों की बढ़ोतरी हुई है. वहीं शुक्रवार को ये सूचकांक 90 अंक पर रहा था. यानी की तीन दिन के अंदर इसमें 100 अंकों की बढ़ोतरी हो गई. दिल्ली के लोगों के लिए चिंता की बात ये है कि रविवार को शाम 6 बजे के आसपास दिल्ली के 58 निगरानी केंद्रों का सूचकांक 200 से ऊपर यानी की खराब श्रेणी में पहुंच गया. तमाम घने बसे और ज्यादा यातायात वाले इलाकों का नाम शामिल ह .
ITO का कितना AQI?
रविवार को ITO इलाके की वायु गुणवत्ता प्रदूषित रही. यहां का AQI शाम छह बजे के आसपास 430 के अंक पर रहा. इस स्तर की हवा को गंभीर श्रेणी में रखा जाता है. वहीं दिल्ली में दूसरी निगरानी केंद्र का सूचकांक इसके आसपास भी नहीं था. ऐसा माना जा रहा है कि ऐसा बेहद स्थानीय कारण से हो सकता है.
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कितनी हैं पराली जलाने की घटनाएं
बता दें कि इतने प्रयास करने के बाद भी पराली जलाने की घटनाओं पर पूरी तरह से रोक लगाना संभव नहीं हो पा रहा है. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की रिपोर्ट के अनुसार, इस सीजन में पराली जलाने की घटनाओं की संख्या एक हजार से ज्यादा हो चुकी है. इतना ही नहीं 15 सितंबर से 18 अक्टूबर के बीच पराली जलाने की 1073 घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं. सबसे ज्यादा मध्य प्रदेश में 366 घटनाएं रिकॉर्ड की गई हैं.