)
Delhi News: दिल्ली नगर निगम ने (MCD) राजधानी के 48 गावों को शहर में बदलने का फैसला लिया है. इसे लेकर डिप्टी मेयर डॉ. मोनिका पंत की अध्यक्षता में हुई निगम की सदन बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई. ये निर्णय दिल्ली नगर निगम अधिनियम की धारा 506-ए के तहत लिया गया है. ऐसा करने का पीछे मुख्य उद्देश्य गांवों में नागरिक सुविधाओं के विस्तार और बुनियादी ढांचे के विकास को गति देना है. इसकी पूरी जिम्मेदारी निगम उटाएगा.
प्रदूषण रोकने पर जोर
पार्षदों के अनुसार, दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए जमीनी स्तर पर काम करना होगा. खासतौर पर सड़कों पर जमा धूल को हटाने के लिए निगम को प्रभावी योजना बनानी चाहिए. पार्षदों ने सड़क किनारे निर्माण सामग्री रखकर बिक्री करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की. बैठक में सड़कों पर लंबे समय तक खड़े वाहनों को जब्त करने का मुद्दा भी उठाया गया. पार्षदों का कहना था कि ऐसे वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होने से सड़क किनारे अवैध पार्किंग पर रोक लगाई जा सकती है.
70 मैकेनिकल स्वीपिंग मशीनों को मंजूरी
प्रदूषण के दौरान धूल कंट्रोल और सफाई व्यवस्था मजबूत करने के लिए निगम ने कई प्रस्तावों को मंजूरी दी. 60 फीट से कम चौड़ी सड़कों की सफाई के लिए 70 नई मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीन खरीदने का फैसला किया गया है. इसके अलावा 1000 वैक्यूम आधारित बैटरी से चलने वाली लिटर पिकर मशीनें खरीदने को भी मंजूरी दी गई. इन मशीनों की मदद से सड़कों और सार्वजनिक स्थानों की सफाई को बेहतर बनाने का लक्ष्य है।
दिल्ली के कई गांव शहरीकृत
वहीं निगम क्षेत्र में कई गांवों को शहरीकृत करने की जानकारी भी सामने आई. इनमें नरेला के 9, मटियाला के 11, नजफगढ़ के 7, करावल नगर के 5 और छतरपुर, बवाना, मुंडका और बुराड़ी समेत अन्य क्षेत्रों के गांव शामिल हैं. दिल्ली नगर निगम ने पुराने संपत्ति कर के बकाये को निपटाने के लिए 'संपत्तिकर निपटान योजना (सुनियो 2) वन प्लस सेवन' लागू की है. इसके तहत 31 दिसंबर तक मौजूदा वित्त वर्ष 2026-27 और पिछले सात वित्त सालों का मूल संपत्ति कर जमा करने पर पुराने बकाये के ब्याज और जुर्माने में राहत मिलेगी. निगम इसके लिए बकायेदारों को मैसेज भेजने के साथ आरडब्ल्यूए, बाजार संगठनों और अन्य संस्थाओं के साथ जागरूकता शिविर भी लगाएगा.
GIS मैप से जमीन की जानकारी होगी आसान
दिल्ली मास्टर प्लान 2047 के तहत जीआईएस आधारित डिजिटल मैप के जरिए लोग किसी इलाके या संपत्ति की सटीक स्थिति देख सकेंगे. मैप में प्लॉट स्तर तक जूम करने की सुविधा होगी. इसके अलावा लैंड पूलिंग क्षेत्र और ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) जोन जैसी जानकारी भी डिजिटल रूप से देखी जा सकेगी. इससे लोगों को किसी जमीन के आसपास के क्षेत्र और उसके तय इस्तेमाल को समझने में आसानी होगी.