SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

छुईखदान के पान की कहानी: कभी पाकिस्तान तक थी पहचान, अब नए अंदाज में हो रही वापसी

छत्तीसगढ़ के छुईखदान का मशहूर पान कभी देश के कई शहरों तक पहुंचता था. समय के साथ इसकी खेती खत्म होने लगी, लेकिन अब प्रशासन, किसानों और महिला स्व-सहायता समूहों की पहल से पान की खेती और इससे जुड़े उत्पादों को नई पहचान दिलाई जा रही है.

Written By Manish Kushawah
Published: Nov 01, 2026, 03:51 PM IST | Updated: Nov 01, 2026, 04:00 PM IST
Image Credit: ZEE NEWS
Join

कभी छुईखदान का पान सिर्फ स्वाद नहीं, बल्कि इस इलाके की पहचान हुआ करता था. यहां की पान की खुशबू देश के कई राज्यों तक पहुंचती थी. स्थानीय लोकमान्यता तो यहां तक है कि छुईखदान के पान की पहचान पाकिस्तान के लाहौर तक थी. करीब छह हजार पान की खेती से गुलजार रहने वाला यह इलाका वक्त के साथ अपनी इस विरासत को खोने लगा. आगजनी की घटना ने पारंपरिक पान की खेती को बड़ा झटका दिया, लेकिन अब एक बार फिर छुईखदान के पान की किस्मत बदलने की कोशिश हो रही है. किसान खेतों में पान की बेलें संवार रहे हैं, तो महिलाएं इसी पान से चॉकलेट, मिठाई और चाय बनाकर स्वाद को नया कारोबार दे रही हैं.

ये सिर्फ पान के पत्ते नहीं, बल्कि छुईखदान के इतिहास, संस्कृति और परंपरा की पहचान हैं. कभी यहां हजारों की संख्या में पान की खेती होती थी. खेतों में तैयार होने वाला पान अपने खास स्वाद और खुशबू के लिए मशहूर था. देश के कई राज्यों में इसकी मांग थी. स्थानीय लोकमान्यता के अनुसार छुईखदान के पान की पहचान पाकिस्तान के लाहौर तक पहुंची थी.

कैसे बनी इसकी पहचान ?

छुईखदान में पान की खेती की शुरुआत के पीछे रियासतकाल से जुड़ी दिलचस्प कहानी भी सुनने को मिलती है. कहा जाता है कि खैरागढ़-छुईखदान रियासत में उत्तर प्रदेश से रानियों के आगमन के साथ पान खाने और मेहमानों को पान खिलाने की परंपरा आई. रानियों के साथ आई दासियों के जरिए यहां पान की संस्कृति विकसित हुई और धीरे-धीरे पान की खेती छुईखदान की खास पहचान बन गई.

इस विरासत पर बड़ा संकट

लेकिन समय के साथ इस विरासत पर संकट गहराता गया. आगजनी की एक घटना ने पान की खेती को बड़ा नुकसान पहुंचाया. कभी हजारों की संख्या में होने वाली खेती सिमटती चली गई. किसानों के सामने परंपरा बचाने की चुनौती खड़ी हो गई. अब जिला प्रशासन पान अनुसंधान केंद्र के जरिए इस पुरानी खेती को फिर से बढ़ावा देने में जुटा है. खैरागढ़ क्षेत्र में करीब 10 किसान बड़े स्तर पर पान की खेती कर रहे हैं. सरकारी नर्सरियों के माध्यम से भी पान की बेलों को प्रोत्साहित किया जा रहा है.

कौन-कौन से बनते हैं उत्पाद

और अब छुईखदान के पान की कहानी में एक नया अध्याय जुड़ रहा है. यहां की महिलाएं पान को सिर्फ खाने तक सीमित नहीं रख रहीं, बल्कि उससे चॉकलेट, मिठाइयां, चाय और चीला जैसे नए उत्पाद तैयार कर रही हैं. यानी जिस पान की पहचान कभी परंपरागत खेती से थी, वही अब महिला स्व-सहायता समूहों के लिए आत्मनिर्भरता और रोजगार का जरिया बन रहा है. यहां गिलोरी, मीठा, बंगला और कपाली सहित करीब 10 किस्मों का पान उगाया जाता है.

क्या बोलीं यहां की महिलाएं?

स्वयं सहायता समूह की महिला कविता देवांगन ने बताया कि जिला प्रशासन की पहल पर करीब तीन महीने पहले पान की दुकान शुरू की गई है. उनके समूह पान से लड्डू, चॉकलेट, कुकीज, रिफ्रेशमेंट, मिल्क शेक, चीला, अप्पे और सैंडविच जैसे कई उत्पाद तैयार कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि वे जय गंगामैया श्रम सहायता समूह से जुड़ी हैं और एक अन्य समूह जय मां भुवनेश्वरी के साथ मिलकर पान अनुसंधान केंद्र के माध्यम से इस काम को आगे बढ़ा रही हैं. इसका उद्देश्य महिलाओं की आजीविका बढ़ाना और उन्हें स्वरोजगार से जोड़ना है.

बिक्री के लिए दुकान खोली गई

जिला पंचायत सीईओ प्रेम कुमार पटेल ने बताया कि छुईखदान का गिलौरी पान कभी मुंबई से लेकर पाकिस्तान के कराची तक मशहूर था. बांस की कमी और दूसरे व्यवसायों की ओर लोगों के रुझान से यहां पान की खेती लगभग बंद हो गई थी. इसे दोबारा बढ़ावा देने के लिए कृषि महाविद्यालय में पान अनुसंधान केंद्र शुरू किया गया है. उन्होंने कहा कि यहां किसानों को पान की खेती का प्रशिक्षण देने के साथ महिलाओं को पान की चाय, पेय पदार्थ और चॉकलेट जैसे उत्पाद बनाना सिखाया जा रहा है. आगे कहा कि उत्पादों की बिक्री के लिए दुकान खोली गई है और जल्द ही पान कैफे भी शुरू होगा. प्रशासन मेलों और प्रदर्शनियों के जरिए भी इन उत्पादों को बाजार उपलब्ध करा रहा है.

ये भी पढ़ेंः दिवाली-छठ पूजा पर यात्रियों को राहत: दुर्ग और निजामुद्दीन के बीच चलेंगी स्पेशल ट्रेन, रायपुर-दमोह-सागर समेत इन स्टेशनों पर होगा ठहराव

कई शहरों में जाता है पान

पान वैज्ञानिक ने बताया कि छुईखदान में पिछले करीब 250 वर्षों से पान की खेती होती रही है. एक समय यहां का पान पाकिस्तान, बनारस, मुंबई सहित देश के कई हिस्सों में भेजा जाता था, लेकिन विभिन्न कारणों से इसकी खेती धीरे-धीरे खत्म होने लगी. अब शासन और प्रशासन के सहयोग से इसे फिर से बढ़ावा दिया जा रहा है. पहले साल में सात किसानों को पान उत्पादन से जोड़ा गया है और उनके उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है. पान की पत्तियों के अलावा लड्डू, कुकीज, चीला, अप्पे और चॉकलेट जैसे उत्पाद भी तैयार किए जा रहे हैं.

(रिपोर्टः हेमंत कुमार पाल, खैरागढ़)
 

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

मनीष कुशवाह डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें टीवी और डिजिटल मीडिया में 5 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (MP-CG) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर के रूप में काम कर रहे हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीति, क्राइम, कृषि व्यवस्था और ग्रामीण (हाइपरलोकल) सरोकारों से जुड़ी खबरों की गहराई से कवरेज करना उनकी एक्सपर्टीज है.नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (NIMC) से पत्रकारिता में डिप्लोमा पूरा करने के बाद मनीष ने मीडिया जगत में अपना सफर शुरू किया. ज़ी न्यूज़ से पहले उन्होंने News18 Hindi (Local18), इंडिया न्यूज़ और जनता टीवी जैसे प्रमुख समाचार चैनलों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में काम किया है. इस दौरान उन्होंने न्यूज़ प्लानिंग, कंटेंट आइडिएशन और डेस्क मैनेजमेंट की अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं. वे खबरों की प्रामाणिकता और ग्राउंड रियलिटी को प्राथमिकता देते हैं, ताकि पाठकों तक सटीक और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे.मनीष कुशवाह से आप Manish2.Kumar@india.com पर ईमेल के माध्यम से संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा, एक्स (ट्विटर) और फेसबुक के जरिए भी उनसे सीधा संवाद कर सकते हैं.
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES