App

ट्रंप के ‘वेनेजुएला दांव’ से चीन बिलबिलाया, मुश्किल में फंस गए भारत के ₹9001 करोड़ भी...

US-Venezuela Deal Impact: वेनेजुएला के साथ तेल की सबसे बड़ी डील के पीछे अमेरिका का अपना मकसद छिपा है, लेकिन इस डील ने चीन को बेचैन कर दिया है.

ट्रंप के ‘वेनेजुएला दांव’ से चीन बिलबिलाया, मुश्किल में फंस गए भारत के ₹9001 करोड़ भी...

US Biggest Oil Deal: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 9 महीने पहले वेनेजुएला की सत्ता को हिलाकर रख दिया. ट्रंप ने ना केवल राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उनके देश उठाया, बल्कि उसी दिन तय कर दिया था कि अब वेनेजुएला पर अमेरिका का अप्रत्यक्ष अधिकार है. 303 अरब बैरल वाले दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल के भंडार पर ट्रंप ने,जो प्लानिंग की थी अब वो हकीकत में बदलने लगी है. अमेरिका ने वेनेजुएला के साथ सबसे बड़ी तेल डील है. वेनेजुएला के 17 तेल क्षेत्रों यानी करीब 65 अरब बैरल तेल पर अमेरिका का अधिकार होगा. इस डील की दुनियाभर में चर्चा हो रही है, लेकिन सबसे ज्यादा खीज, बौखलाहट चीन को हो रही है. चीन ने जिसके लिए 20 सालों तक मेहनत की, ट्रंप उसे मिनटों में उड़ा ले गए. 

अमेरिका की इस तेल डील के साथ जुड़े सवाल

समझते है कि आखिर वेनेजुएला के तेल पर अमेरिका की डील से चीन इतना क्यों बौखलाया है? जिस अमेरिका के पास खुद का इतना बड़ा तेल भंडार है, उसे वेनेजुएला का तेल क्यों चाहिए? जिस मंशा के साथ ट्रंप ने ये डील की है, उसके सामने चुनौती क्यों है? ट्रंप की ये डील मर्जी से ज्यादा क्यों मजबूरी का नाम है और सबसे बड़ा सवाल भारत ने वेनेजुएला में जो 1901 करोड़ रुपये का निवेश किया है उसका क्या होगा ?  

अमेरिका की डील क्या है ?  

46 अरब बैरल तेल भंडार वाले अमेरिका ने  वेनेजुएला के 65 अरब बैरल से ज्यादा तेल भंडार पर कंट्रोल हासिल करने के लिए डील की है. वेनेजुएला के पास 303 अरब बैरल से ज्यादा तेल मौजूद है, जिसमें से अब इस डील के बाद 65 अरब बैरल तेल पर अमेरिकी कंट्रोल होगा. इस डील के तहत अमेरिका को साझेदारी से होने वाले तेल उत्पादन का 55% हिस्सा मिलेगा. वहीं वेनेजुएला की दलील है कि इस डील से 17 तेल क्षेत्रों को दोबारा विकसित किया जाएगा और 100 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश आएगा. वेनेजुएला के पास इतना तेल है, लेकिन फिर भी वो गरीब देश है, क्योंकि आर्थिक संकट, निवेश की कमी और अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण उसका तेल उद्योग लंबे समय से मुश्किल में है.

वेनेजुएला से मिले तेल का ट्रंप क्या करेंगे ? 

खाड़ी युद्ध ने अमेरिका के तेल भंडार को प्रभावित किया है. अमेरिका का रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व यानी  Strategic Petroleum Reserve नवंबर 1982 के बाद से सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुका है. अमेरिकी ऊर्जा विभाग की ओर से साझा आंकड़ों के मुताबिक अमेरिका का SPR सिर्फ 28.97 करोड़ बैरल रह गया था, जो 44 सालों में सबसे कम है. ट्रंप वेनेजुएला के तेल का इस्तेमाल अपने इसी ऑयल रिजर्व को भरने के लिए करना चाहते हैं. हालांकि ये इतना भी आसान नहीं है.ट्रंप के इस प्लान के सामने कई चुनौतियां भी है. जैसे कि...

1. वेनेजुएला का तेल काफी भारी और गाढ़ा है, जो SPR के गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरता.  
2. वेनेजुएला के तेल ढांचे सालों के खस्ताहाल में है, वहां तेल उत्पादन बढ़ाने के लिए बड़े निवेश और मरम्मत की जरूरत है. 
3. SPR के लिए तेल खरीदने को ट्रंप को अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी जरूरी लेनी होगी.

यानी ट्रंप ने ये डील कर दी है, लेकिन इसका परिणाम निकलने में काफी वक्त लग सकते हैं. ट्रंप को वेनेजुएला के तेल का इस्तेमाल घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए कई साल लग सकते हैं.  

इस डील से चीन क्यों परेशान हैं?  

अमेरिका-वेनेजुएला के बीच डील से चीन सबसे ज्यादा बेचैन है. दरअसल बीते 20 सालों से चीन वेनेजुएला में निवेश कर रहा था.उसने सिर्फ वेनेजुएला को भारी भरकम कर्ज ही नहीं दिया, बल्कि वहां तेल रिफाइनरी, इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर में खूब निवेश किया. चीन की मंशा वहां रिफाइनरी नेटवर्क खड़ा कर तेल की एक-एक बूंद अपने देश लाना था. चीन की कुछ छोटी रिफाइनरियां, जिन्हें teapot refineries का नाम दिया गया है, वो वेनेजुएला में तेल की रिफाइनिंग कर सस्ता तेल चीन भेजती है. सालों से चीन वेनेजुएला के सस्ते तेल का फायदा उठाता रहा है. चीन ने वेनेजुएला के साथ भी डेब्ट डिप्लोमेंसी का गेम खेला है. शोध संस्था AidData के मुताबिक बीते दो दशक में चीन ने वेनेजुएला को 100 अरब डॉलर से अधिक का कर्ज लिया है.

चीन का पैसा और मकसद दोनों फंसा 

सस्ते तेल के लालच में चीन ने वेनेजुएला के एनर्जी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में करीब 4.8 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष निवेश किया है .  चीन की दो बड़ी कंपनियां चाइना पेट्रोलियम एंड केमिकल कॉरपोरेशन (SINOPEC) और चाइना नेशनल पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (CNPC) अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद  वेनेज़ुएला से सबसे ज्यादा कच्चा तेल खरीदती है. 
2025 में वेनेजुएला से बाहर जाने वाले कच्चे तेल का आधे से ज्यादा हिस्सा अकेला चीन खरीद रहा था. अब इस डील के बाद सिर्फ चीन का भारी भरकम निवेश ही नहीं फंसा है, बल्कि सस्ते तेल का लिए उसका रास्ता भी बंद हो गया है. अब अमेरिका तय करेगा कि वेनेजुएला का तेल किसे मिलेगा. जैसे अमेरिका और चीन के संबंधों की पटकथा है, उससे इस बात संभावना बहुत कम है कि वो चीन के हाथों तेल बेचे.  कुल मिलाकर अमेरिका के इस तेल डील से सीधा नुकसान चीन को हुआ है. सस्ते तेल और 100 अरब डॉलर के निवेश के साथ ही 20 सालों से लैटिन अमेरिका में अपनी मौजूदगी तेजी से बढ़ाने की उसकी कोशिश को भी झटका लगा है.  

अमेरिका की इस डील से तेल के बाजार और कच्चे तेल की कीमतों पर क्या असर होगा?  

इस डील से तेल के बाजार और कीमत दोनों पर असर होगा. मौजूदा वक्त में OPEC देश तेल की कीमतों को कंट्रोल करते हैं. तेल उत्पादक देशों का ये समूह उत्पादन बढ़ा-घटाकर तेल की सप्लाई और दाम को कंट्रोल करते हैं. वेनेजुएला भी OPEC ग्रुप का हिस्सा है. अमेरिका की मदद से वेनेजुएला में अब तेल का उत्पादन बढ़ेगा. उत्पादन बढ़ने से सप्लाई बढ़ेगी, यानी बाजार में ज्यादा तेल आया, और तेल की कीमतों पर गिरावट का दबाव बन सकता है.  

भारत के लिए इस डील में क्या है?  
वेनेजुएला के साथ अमेरिका की इस डील में एक बात तो साफ है कि अब बाजार में तेल की सप्लाई बढ़ने वाली है. ज्यादा तेल मतलब कम दाम. भारत, जो अपनी जरूरत का 80 से 85 फीसदी तक कच्चा तेल आयात करता है, उसके लिए ये खुशखबरी से कम नहीं है. तेल के दाम कम होंगे तो आयात बिल कम होगा. आयात बिल कम होने से रुपये को मजबूती मिलेगी.

वहीं इसका दूसरा हिस्सा भी है . भारत ने भी वेनेजुएला में भारी भरकम निवेश किया है. वेनेजुएला में करीब  9001 करोड़ रुपये का निवेश वहां अटक सकता है. ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (OVL)की वेनेजुएला के सैन क्रिस्टोबल और पेट्रोमोनागा जैसे तेल क्षेत्रों में हिस्सेदारी है. अमेरिका के दखल के बाद भारत के इस निवेश और हिस्सेदारी पर असर दिख सकता है. 

Add Zee News as a Preferred Source

About the Author

Bavita Jha

Bavita Jha

बवीता झा बिजनेस पत्रकार हैं, उन्हें डिजिटल और टीवी न्यूज़ मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News Hindi (Digital) में बतौर चीफ सब-एडिटर कार्यरत हैं. व्यापार जगत की जटिलताओं और आर्थिक आंकड़ों को आम पाठकों के लिए सरल भाषा में डिकोड करना उनका मजबूत पक्ष है.  • शेयर बाजार • बिजनेस एक्सप्लेनर • पर्सनल फाइनेंस और टैक्सेशन  • कमोडिटी, गोल्ड-सिल्वर ट्रेड• ग्लोबल ट्रेड • जियो इकोनॉमिकस डेवलपमेंट • कारोबार से जुड़ी सरकारी योजना और पॉलिटी • बिजनेस और मार्केट ट्रेंडZee News से पहले बवीता ने नवभारत टाइम्स (NBT) के बिजनेस सेक्शन और Oneindia जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल संस्थानों में इवनिंग शिफ्ट, होम पेज मैनेजमेंट और ट्रेडिंग न्यूज़ की अहम जिम्मेदारियां संभाल चुकी हैं. इसके अलावा महुआ न्यूज़, जनसंदेश और सहारा जैसे टीवी चैनलों में प्रोग्राम प्रोड्यूसर और रनडाउन मैनेजमेंट का उनके पास 4 वर्षों का ठोस अनुभव है.  दिल्ली से पत्रकारिता में स्नातक और गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएशन करने वाली बवीता, खबरों की सत्यता और वित्तीय मामलों की सटीक रिपोर्टिंग को प्राथमिकता देती हैं.  बवीता झा से आप bavita.jha@india.com पर ईमेल के जरिए संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप उनसे एक्स  पर https://x.com/youthreporter2 के जरिए सीधे जुड़ सकते हैं. सोशल मीडिया पर कनेक्ट होने के लिए फेसबुक पेज https://www.facebook.com/bavita.jha , इंस्टाग्राम instagram.com/bavita.jha पर जुड़ सकते हैं. बवीता झा की खबरों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक कर सकते हैं.
Read More