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US Fed Rate Hike Impact on Gold: यूएस फेडरल रिजर्व ने महंगाई पर लगाम लगाने के लिए ब्याज दर में 0.25% (25 बेसिस प्वाइंट) की बढ़ोतरी की है. इसके बाद फेड ने ब्याज दर को बढ़ाकर 3.75% से 4% कर दिया है. फेड ने साल 2023 के बाद पहली बार ब्याज दर में इजाफा किया है. फेड रिजर्व की तरफ से लिये गए फैसले के बाद अमेरिकी शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव देखा गया. यूएस फेड की तरफ से लिये गए इस फैसले का असर केवल यूएस मार्केट पर ही नहीं देखा जाएगा, बल्कि इसका असर रुपये, भारतीय शेयर बाजार, बॉन्ड यील्ड, गोल्ड-सिल्वर और आम आदमी के लोन की EMI पर भी देखने को मिल सकता है.
बाजार के जानकारों का मानना है कि 25 bps की बढ़ोतरी का भारतीय शेयर बाजार पर तुरंत कोई बड़ा निगेटिव इफेक्ट नहीं दिखाई देगा. इसका कारण यह है कि बाजार को पहले से इस बढ़ोतरी का अनुमान था. महंगाई दर लगातार फेड के 2% के टारगेट से ऊपर बनी हुई थी और कच्चे तेल की कीमत के कारण ब्याज दर बढ़ना तय माना जा रहा था.
अमेरिका में ब्याज दर बढ़ने और 10 साल के बॉन्ड यील्ड के 5% के पार जाने से यूएस डॉलर को मजबूती मिलती है. जब अमेरिका में यील्ड बढ़ती है तो एफआईआई (FII) भारत जैसे बढ़ते बाजार से अपना पैसा निकालकर अमेरिकी बाजारों में लगाने लगते हैं. इससे भारतीय शेयर बाजार और रुपये पर कुछ समय के लिए दबाव देखा जा सकता है.
फेडरल रिजर्व की तरफ से ब्याज दर में बढ़ोतरी करने और आने वाले महीनों में उधार लेने की लागत बढ़ाने के संकेत के बाद कारोबार में सोने की कीमतों में शुरुआती बढ़त कम हो गई. फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) ने सभी की सहमति के आधार पर फेडरल फंड्स रेट को 0.25 प्रतिशत बढ़ाकर 3.75 से 4 प्रतिशत के दायरे में पहुंचा दिया है. फेड की तरफ से रेट हाइक का फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से लगातार फेड पर ब्याज दर घटाने का दबाव बनाया जा रहा था.
वैसे तो सोने को महंगाई के खिलाफ मजबूत बचाव माना जाता है. लेकिन आरबीआई (RBI) की तरफ से ब्याज दर बढ़ाए जाने के बिना रिटर्न देने वाली संपत्तियों यानी नॉन-यील्डिंग एसेट्स की अपील कम हो सकती है. इसके अलावा अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर के मजबूत होने से दूसरी करेंसी के निवेशकों के लिए सोना महंगा हो जाता है. इससे डिमांड में गिरावट आ सकती है. ब्याज दर बढ़ाए जाने के बाद सोने की कीमत में गिरावट देखी जा रही है. गुरुवार सुबह कॉमेक्स पर सोना 42 डॉलर प्रति औंस टूटकर 4,345 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करते देखा गया.
अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने हालिया बढ़ोतरी के बाद आने वाले समय में ब्याज और बढ़ाने के संकेत दिये हैं. इस फैसले से बैंकिंग सेक्टर और रिजर्व बैंक की पॉलिसी पर गहरा असर पड़ने की उम्मीद है. जब अमेरिका में ब्याज दर बढ़ती है तो आरबीआई (RBI) को घरेलू लेवल पर महंगाई और विदेश से आने वाले निवेश को ध्यान में रखना पड़ता है. ऐसे में आरबीआई अपनी ब्याज दर को लंबे समय तक ऊंचा बनाए रख सकता है. भारत का घरेलू स्ट्रक्चर काफी मजबूत बना हुआ है. हर महीने आने वाले 22,000 करोड़ से ज्यादा के एसआईपी इनफ्लो और सरकारी कैपेक्स के कारण भारतीय बाजार विदेशी बिकवाली से सुरक्षित नजर आ रहे हैं.
बैंकिंग सेक्टर से जुड़े शेयर पर इस बढ़ोतरी का असर दोनों तरह से हो सकता है. जानकारों के अनुसार ब्याज दर बढ़ने से बैंकों की उधारी आय और मार्जिन में सुधार आ सकता है. इससे चुनिंदा बैंक शेयरों को सपोर्ट मिलेगा. हालांकि, बॉन्ड यील्ड में तेजी और सिस्टम में लिक्विडिटी कम होने से ट्रेजरी पोर्टफोलियो पर मार्क-टू-मार्केट घाटा हो सकता है. इसका सबसे ज्यादा असर पीएसयू (PSU) बैंकों पर पड़ सकता है.
फेड के नीतिगत अनुमान के अनुसार आने वाले समय में दर 4.00 से 4.25 प्रतिशत के दायरे तक पहुंच सकती हैं. ऐसे में निवेशकों को ट्रेजरी बॉन्ड जैसे ब्याज देने वाले ऑप्शन में ज्यादा आकर्षण नजर आ सकता है. हालांकि, ग्लोबल लेवल पर केंद्रीय बैंकों की तरफ से की जाने वाली सोने की खरीदारी की रफ्तार भी आने वाले दिनों में इसकी कीमत को तय करने में अहम भूमिका निभाएगी.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार और सोने-चांदी में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. अगर आप किसी भी तरह का निवेश करना चाहते हैं, तो वित्तीय जानकारों की सलाह जरूर लें.)