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रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की तरफ से की गई स्टडी में बैंकों की ब्याज दर को लेकर चौंकाने वाला खुलाया किया गया है. ब्याज दर में किसी भी तरह के बदलाव का असर आम लोगों की जेब पर पड़ता है. रिजर्व बैंक बुलेटिन में प्रकाशित स्टडी के अनुसार जब रेपो रेट बढ़ने पर बैंक लोन की ब्याज दर में तेजी से और पूरा बदलाव करते हैं. लेकिन जब केंद्रीय बैंक की तरफ से रेपो रेट में कटौती की जाती है तो बैंक ग्राहकों को उसका पूरा फायदा देने में समय लगाते हैं और जल्दी से इस बदलाव को लागू भी नहीं करते. आरबीआई की स्टडी में आम आदमी से जुड़ा यह बड़ा खुलासा किया गया है.
आंकड़ों के अनुसार मार्च 2022 से जनवरी 2025 के बीच 250 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी के दौरान बैंकों ने 76.4 प्रतिशत बढ़ोतरी कस्टमर्स पर डाली. वहीं, फरवरी 2025 से मार्च 2026 के बीच 125 बेसिस प्वाइंट की कटौती के दौरान महज 64 फीसदी फायदा ही कस्टमर्स तक पहुंचाया गया. स्डटी में यह भी सामने आया कि ब्याज दरें घटाने पर बैंक अपना नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) बचाने के लिए स्प्रेड बढ़ा देते हैं. इसके साथ ही बैंक की तरफ से ज्यादा ब्याज देने वाले लोन सेगमेंट की तरफ फोकस किया जाने लगता है. इससे ब्याज दर घटने का असर कम होने लगता है.
मार्च 2026 में रिजर्व बैंक की तरफ से ढीले रुख के बावजूद नए लोन की दर में उल्टा 12 बेसिस प्वाइंट का इजाफा किया गया. अलग-अलग सेक्टर की बात करें तो एमएसएमई (MSME) को दिये जाने वाले नए लोन की दर में सबसे ज्यादा 122 बेसिस प्वाइंट का इजाफा किया गया. इसके अलावा एजुकेशन लोन में 162 बेसिस प्वाइंट की गिरावट आई. लेकिन कुल लोन में इसकी हिस्सेदारी कम होने के कारण इसका असर पूरे सिस्टम पर नहीं दिखाई दिया. बड़ी इंडस्ट्री के लोन रेट में महज 67 बेसिस प्वाइंट की कमी देखी गई.
रेपो रेट में बदलाव के बावजूद बैंकों की तरफ से दिखाये जाने वाले इस रवैये से सबसे ज्यादा नुकसान ऐसे ग्राहकों को होता है, जो होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन की ईएमआई चुका रहे हैं. रेपो रेट बढ़ने पर उनकी ईएमआई तुरंत बढ़ जाती है लेकिन ब्याज दर घटने के बाद भी ग्राहकों को राहत पाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है.
आरबीआई की तरफ से तय की जाने वाली ब्याज दर को रेपो रेट कहते हैं. इस दर पर देश के कमर्शियल बैंक आरबीआई से लोन लेते हैं. महंगाई कम या ज्यादा होने पर आरबीआई की तरफ से इस दर में बदलाव किया जाता है. रेपो रेट के घटने या बढ़ने का असर आम आदमी की जेब, उसके लोन की ईएमआई और देश की इकोनॉमी पर पड़ता है. देश में महंगाई दर बढ़ने पर आरबीआई रेपो रेट बढ़ाता है. इसके बढ़ने पर बैंकों को कर्ज महंगा मिलता है तो बैंक भी ग्राहक से ज्यादा ब्याज लेते हैं.