रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने बुधवार यानी 7 अक्टूबर को रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट्स की बढ़ोतरी करके इसे 5.50% कर दिया था. रेपो रेट में बढ़ोतरी के कुछ ही घंटों बाद कई बैंकों ने अपनी बेंचमार्क लेंडिंग रेट्स बढ़ानी शुरू कर दीं. इससे उधार लेने वालों के लिए लोन थोड़े महंगे हो गए.
PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब नेशनल बैंक (PNB), बैंक ऑफ इंडिया (BoI), इंडियन बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) और इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB) उन बैंकों में शामिल हैं जिन्होंने अपनी लेंडिंग रेट्स में बदलाव की घोषणा की है.
PNB ने अपनी रेपो लिंक्ड लेंडिंग रेट को 8.10% से बढ़ाकर 8.35% कर दिया है. ये 8 अक्टूबर यानी आज से लागू होगी. एक कॉर्पोरेट फाइलिंग में बैंक ने कहा कि ये बदलाव RBI द्वारा रेपो रेट में बढ़ोतरी के बाद किया गया है. संशोधित RLLR में 0.35% का बैंक स्ट्रैटेजिक प्रीमियम (BSP) शामिल है. हालांकि, PNB ने अपनी मार्जिनल कॉस्ट ऑफ लेंडिंग रेट और बेस रेट में कोई बदलाव नहीं किया है.
बैंक ऑफ इंडिया ने भी RBI के फैसले के बाद अपनी रेपो-बेस्ड लेंडिंग रेट (RBLR) में बदलाव किया है. बैंक की RBLR 8.10% से बढ़कर 8.35% हो गई है. ये 7 अक्टूबर से लागू है. बैंक की फाइलिंग के अनुसार, रेपो रेट वाला हिस्सा 5.25% से बढ़कर 5.50% हो गया है.
इंडियन बैंक ने अपनी रेपो लिंक्ड बेंचमार्क लेंडिंग रेट को 7.95% से बढ़ाकर 8.20% कर दिया है. संशोधित रेट 8 अक्टूबर से अगली समीक्षा तक लागू रहेगी. बैंक ने कहा कि ये बदलाव RBI की पॉलिसी रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट्स की बढ़ोतरी के बाद किया गया है. रेपो रेट से जुड़े लोन के लिए पॉलिसी रेपो रेट भी 5.25% से बढ़कर 5.50% हो गई है.
बैंक ऑफ बड़ौदा ने अपनी बड़ौदा रेपो-बेस्ड लेंडिंग रेट (BRLLR) को 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 8.15% कर दिया है. ये 8 अक्टूबर से लागू है. बैंक की BRLLR पहले 7.90% थी. फाइलिंग से पता चलता है कि रेपो रेट वाला हिस्सा 5.25% से बढ़कर 5.50% हो गया है.
इंडियन ओवरसीज बैंक ने भी अपनी रेपो-लिंक्ड लेंडिंग रेट में बदलाव किया है. बैंक ने इस रेट को 8.10% से बढ़ाकर 8.35% कर दिया है. ये 8 अक्टूबर से लागू है.
बेंचमार्क लेंडिंग रेट में बढ़ोतरी से लोन लेना महंगा हो सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जिनके लोन रेपो रेट जैसे बाहरी बेंचमार्क से जुड़े हैं. मौजूदा उधारकर्ताओं पर इसका असर लोन के प्रकार और उस बेंचमार्क पर निर्भर करेगा जिससे लोन जुड़ा है. रेपो-लिंक्ड लोन वाले उधारकर्ताओं की ब्याज दरें बढ़ सकती हैं क्योंकि बैंक बढ़ी हुई पॉलिसी रेट का बोझ ग्राहकों पर डालते हैं.
RBI द्वारा रेपो रेट बढ़ाने के बाद अन्य लेंडर्स (लोन देने वाली संस्थाओं) द्वारा भी अपनी बेंचमार्क लेंडिंग रेट में बदलाव की घोषणा करने की उम्मीद है. नया लोन लेने की योजना बना रहे लोगों के लिए लेंडिंग रेट बढ़ने का मतलब ब्याज पर ज्यादा खर्च हो सकता है. फ्लोटिंग-रेट लोन वाले मौजूदा उधारकर्ताओं की EMI या लोन की अवधि में भी बदलाव हो सकता है. ये इस बात पर निर्भर करेगा कि उनका बैंक रेट में बढ़ोतरी का असर किस तरह से उन पर डालता है.