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तेल कंपनियों के लिए खुला डॉलर का खजाना, रुपये को संभालने के लिए RBI ने उठाया यह कदम

Rupee vs US Dollar: दिन पर दिन गिर रहे रुपये को संभालने के लिए आरबीआई ने तेल कंपनियों के लिए स्पेशल डॉलर विंडो खोली है. इस विंडो के जरिये तेल कंपनियों को डॉलर की सीधा उपलब्धता कराई जाएगी और हेजिंग से जुड़े नियमों को भी सख्त किया जाएगा.

तेल कंपनियों के लिए खुला डॉलर का खजाना, रुपये को संभालने के लिए RBI ने उठाया यह कदम

Special Dollar Window: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया लगातार कमजोर हो रहा है और यह गिरकर रिकॉर्ड निचले लेवल के करीब पहुंच गया है. रुपये में गिरावट का असर देश की इकोनॉमी पर भी देखा जा रहा है. मिडिल ईस्ट में चल रही जंग के बीच क्रूड ऑयल के दाम में तेजी रुपये में गिरावट का सबसे अहम कारण है. क्रूड में तेजी और दूसरे अन्य ग्लोबल कारणें से रुपये में 7% से ज्यादा गिरावट को रोकने के लिए आरबीआई (RBI) की तरफ से बड़ा कदम उठाया गया है. रिजर्व बैंक ने सरकारी तेल कंपनियों के लिए डॉलर की सीधी व्यवस्था करने के साथ ही करेंसी हेजिंग के नियमों को सख्त कर दिया है. आरबीआई की तरफ से उठाए गए सख्त कदम का बाजार और रुपये की चाल पर क्या असर पड़ेगा?

रुपये के रिकॉर्ड निचले लेवल पर पहुंचने के प्रेशर को कम करने के लिए आरबीआई (RBI) ने कई बड़े कदम उठाए हैं. ग्लोबल लेवल पर बढ़ते तेल के रेट और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के कारण इस साल रुपया 7% से ज्यादा टूट गया है. इस प्रेशर को कम करने के लिए रिजर्व बैंक ने तेल कंपनियों की डॉलर की डिमांड को सीधे स्पॉट मार्केट से हटाकर एक खास व्यवस्था के तहत पूरा करने का फैसला किया है.

स्पेशल विंडो शुरू करने का फैसला किया

इस संकट से निपटने के लिए रिजर्व बैंक ने देश की तीन सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों इंडियन ऑयल, हिन्दुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम की रोजाना डॉलर की जरूरतों को पूरा करने के लिए स्पेशल विंडो शुरू करने का फैसला किया है. इसके तहत आरबीआई (RBI) अपने फॉरेक्स रिजर्व से सीधे इन कंपनियों को डॉलर मुहैया कराएगा. जानकारों को उम्मीद है कि इससे फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में डॉलर की डिमांड कम होगी और रुपये पर पड़ने वाला दबाव भी कम हो सकेगा.

रिजर्व बैंक ने नियमों को कड़ा किया

रुपये के दाम गिरने की आशंका में होने वाली सट्टेबाजी और हेजिंग पर लगाम लगाने के लिए रिजर्व बैंक ने नियमों को कड़ा कर दिया है. आरबीआई (RBI) की तरफ से निर्देश दिया गया कि फॉरेन करेंसी डेरिवेटिव का कारोबार करने वाले डीलर्स को चालू खाता ट्रांजेक्शन से जुड़े कॉन्ट्रैक्ट पर 20% का फॉरेन एक्सचेंज रिस्क रिजर्व रखना होगा. इसके साथ ही बिना किसी रियल बेस के किये जाने वाले डेरिवेटिव ट्रांजैक्शन की लिमिट को 100 मिलियन डॉलर से घटाकर 5 मिलियन डॉलर कर दिया गया है.

बाजार से जुड़े जानकारों का कहना है कि इन कदम से ओपन मार्केट में डॉलर की डिमांड में गिरावट आएगी. इससे रुपये के अचानक नीचे आने को रोका जा सकेगा. हालांकि, इस प्रोसेस से केंद्रीय बैंक के विदेशी मुद्रा भंडार पर असर पड़ सकता है. आरबीआई की इन कोशिश से रुपये की गिरावट को रोकने में भी मदद मिलेगी. लेकिन वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें और पूंजी का प्रवाह जैसे बुनियादी कारक अभी भी बने हुए हैं. आने वाले सप्ताह में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि विदेशी मुद्रा भंडार और भारतीय रुपया इन नई परिस्थितियों के बीच कैसा प्रदर्शन करता है.

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Kriyanshu Saraswat

Kriyanshu Saraswat

क्रियांशु सारस्वत वरिष्ठ बिजनेस जर्नलिस्ट (Business Journalist) हैं, उन्हें डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 साल का अनुभव है. मौजूदा समय में वह Zee News (Hindi) की डिजिटल टीम में बतौर 'असिस्टेंट न्यूज एडिटर' कार्यरत हैं. क्रियांशु को बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, टैक्सेशन, कमोडिटी और सरकारी योजनाओं आदि से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में महारथ हासिल है. Zee News से पहले क्रियांशु ने टाइम्स इंटरनेट, हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण और अमर उजाला की वेबसाइट में अहम संपादकीय जिम्मेदारियां निभाई हैं. इस दौरान क्रियांशु ने ऑटो, टेक्नोलॉजी और लाइफस्‍टाइल लीड की जिम्मेदारी संभाली है. अभी क्रियांशु बिजनेस लीड हैं. यूपी से ताल्‍लुक रखने वाले क्र‍ियांशु पत्रकार‍िता में पोस्ट ग्रेजुएट हैं.
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