RBI MPC Meeting Live: जिसकी उम्मीद की जा रही थी, वहीं हुआ और रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट का इजाफा कर दिया है. रेपो रेट में बढ़ोतरी के बाद यह 5.25% से बढ़कर 5.5% हो गया है. आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने तीन दिन की एमपीसी के बाद बुधवार को रेपो रेट बढ़ाने के फैसले का ऐलान किया. रेपो रेट बढ़ने के बाद आपके होम लोन की ब्याज दर बढ़ना लगभग तय है. पिछले करीब साढ़े तीन साल के बाद यह पहला मौका है, जब रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट का इजाफा किया है. बढ़ती महंगाई, मिडिल ईस्ट क्राइसिस और क्रूड ऑयल के बढ़ते दाम के बीच जानकार रेपो रेट में 25 से 50 बेसिस प्वाइंट का इजाफा किये जाने की उम्मीद पहले ही जता रहे थे.
आरबीआई गवर्नर के नेतृत्व में हुई मीटिंग के दौरान सर्वसम्मति से रेपो रेट में इजाफा करने का फैसला किया गया. बढ़ती खुदरा महंगाई, क्रूड ऑयल के दाम 100 डॉलर के पार पहुंचने और मजबूत घरेलू आर्थिक विकास को देखते हुए केंद्रीय बैंक ने एमपीसी में सख्ती का रुख अख्तयार किया है. रेपो रेट 25 बेसिस प्वाइंट बढ़ाने के साथ ही स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) रेट बढ़कर 5.25% हो गया है. दूसरी तरफ मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) रेट और बैंक रेट 5.75% पर पहुंच गया.
आरबीआई (RBI) की तरफ से रेपो रेट बढ़ाए जाने का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ना तय है. महंगाई और ग्लोबल तनाव के बीच देश में रिटेल महंगाई दर में लगातार तेजी देखने को मिल रही है. इसके अलावा मिडिल ईस्ट में पिछले सात महीने से जारी संघर्ष के कारण ग्लोबल मार्केट में क्रूड ऑयल के दाम में तेजी बनी हुई है. भारत अपनी एनर्जी जरूरतों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है. इस कारण इंटरनेशनल लेवल पर जारी उथल-पुथल इंडियन इकोनॉमी पर भी असर डाल रही है.
पिछली चार एमपीसी के दौरान रिजर्व बैंक ने रेपो रेट को 5.25% पर ही बरकरार रखा था. लेकिन यूएस फेड की तरफ से ब्याज दर बढ़ाए जाने और महंगाई के दबाव को कम करने के लिए रेपो रेट में बढ़ोतरी किये जाने की उम्मीद की जा रही थी. फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स ने पहले ही उम्मीद जताई थी कि RBI रेपो रेट में 25 से 50 बेसिस पॉइंट्स तक का इजाफा कर सकता है. इससे पहले रिजर्व बैंक ने आखिरी बार फरवरी 2023 में रेपो रेट को बढ़ाकर 6.50% किया था.
देश में बढ़ती महंगाई दर को रेपो रेट बढ़ोतरी का सबसे बड़ा कारण माना जाता है. अगस्त में देश की खुदरा महंगाई दर (CPI) 4.82% दर्ज की गई. इसके मौजूदा वित्त वर्ष में 5% से ऊपर पहुंचने का अनुमान है. कम बारिश और क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमत से महंगाई दर तीसरी तिमाही में 5.9% तक जा सकती है. अमेरिकी फेड रिजर्व की तरफ से ब्याज दर में बढ़ोतरी और डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये का 96.36 के लेवल पर पहुंचना भी रेपो रेट बढ़ाने के फैसले का अहम कारण रही.
रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा की तरफ से रेपो रेट में बढ़ोतरी किये जाने से कमर्शियल बैंकों के लिए रिजर्व बैंक से लोन लेना महंगा हो जाएगा. इसका सीधा असर आम ग्राहकों की जेब पर भी पड़ेगा. बैंकों की तरफ से होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दर में बढ़ोतरी की जा सकती है. इससे आम आदकी के ऊपर मंथली EMI का बोझ बढ़ जाएगा.
आरबीआई ने रेपो रेट में इजाफा किये जाने का कदम देश की मजबूत इकोनॉमिक ग्रोथ के बीच उठाया गया है. फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही में देश की जीडीपी ग्रोथ रेट 7.8% रही थी. इससे यह तो साफ है कि घरेलू डिमांड मजबूत है. बाजार से जुड़े जानकारों का मानना है कि यदि इंटरनेशनल मार्केट में तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं तो आरबीआई मौजूदा वित्त वर्ष के अंत तक रेपो रेट में कुल 75 बेसिस प्वाइंट तक की और बढ़ोतरी कर सकता है . यदि ऐसा हुआ तो रेपो रेट बढ़कर 6% के करीब पहुंच सकता है.
जरूरत पड़ने पर आरबीआई की तरफ बैंकों को लोन दिया जाता है. जिस रेट पर आरबीआई (RBI) की तरफ से बैंकों को लोन दिया जाता है, उसे रेपो रेट कहा जाता है. रेपो रेट बढ़ने का मतलब है कि बैंकों को आरबीआई (RBI) से महंगे रेट पर कर्ज मिलेगा. वहीं, रेपो रेट घटने का मतलब है बैंकों को सस्ती ब्याज दर पर लोन मिलना. इसका असर होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन आदि की ब्याज दर पर पड़ता है. इससे आपकी ईएमआई पर सीधा असर पड़ता है.