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RBI Repo Rate: आरबीआई का विदेशी मुद्रा भंडार (RBI Forex Reserve) पिछले दिनों चढ़कर 785 अरब डॉलर के पार पहुंच गया. यह फॉरेक्स रिजर्व को लेकर अब तक का रिकॉर्ड लेवल रहा है. दूसरी तरफ क्रूड ऑयल के दाम में चल रही तेजी का असर दुनियाभर के बाजार में महंगाई के रूप में देखा जा रहा है. इसका असर घरेलू बाजार में भी देखा जा रहा है. इस बीच अमेरिका और जापान के केंद्रीय बैंकों की तरफ से ब्याज दर बढ़ाए जाने के बाद रिजर्व बैंक (RBI) के ऊपर भी सख्त कदम उठाने का दबाव बढ़ गया है. एक सर्वे से सामने आया है कि अक्टूबर में होने वाली एमपीसी मीटिंग में रेपो रेट बढ़ाने को लेकर फैसला हो सकता है. सर्वे में हिस्सा लेने वाले इकोनॉमिस्ट की तरफ से उम्मीद जताई गई कि मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) अक्टूबर में होने वाली मीटिंग के दौरान रेपो रेट में इजाफा कर सकती है. यदि ऐसा हुआ तो फरवरी 2023 के बाद यह पहला मौका होगा जब रिजर्व बैंक ब्याज दर में इजाफा करेगा.
टीओआई की तरफ से इकोनॉमिस्ट के बीच कराए गए सर्वे में अधिकांश ने यह उम्मीद जताई कि आरबीआई (RBI) अक्टूबर में रेपो रेट को 25 बेसिस प्वाइंट (bps) बढ़ा सकता है. इससे पहले रिजर्व बैंक ने फरवरी 2023 में कोविड महामारी के बाद आई महंगाई से निपटने के लिए ब्याज दर में इजाफा किया था. इसके बाद फरवरी से दिसंबर 2025 के बीच रेपो रेट में धीरे-धीरे कटौती की गई. पिछले काफी समय से रेपो रेट 5.25% पर बरकरार है. जानकारों का कहना है कि मौजूदा वित्त वर्ष के दौरान कुल 50 से 75 बेसिस प्वाइंट्स तक की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.
कोटक महिंद्रा बैंक की चीफ इकोनॉमिस्ट उपासना भारद्वाज ने बताया, दूसरी तिमाही में एवरेज महंगाई दर आरबीआई के 4.7% अनुमान से 20 बेसिस प्वाइंट ज्यादा रहने की संभावना है. एसबीआई (SBI) के चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर सौम्य कांति घोष ने साफ किया कि महंगाई तेजी से बढ़ रही है. उन्होंने सुझाव दिया कि आरबीआई को अक्टूबर और दिसंबर में 25-25 बेसिस प्वाइंट ब्याज दर बढ़ाकर सेफ्टी सर्किल बनाना चाहिए. वहीं, क्रिसिल के चीफ इकोनॉमिस्ट डीके जोशी ने कहा कि पॉलिसी के 'वेट एंड वॉच' मोड में रहने की गुंजाइश खत्म हो रही है. जल्द सख्ती का नया दौर शुरू हो सकता है.
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की चीफ इकोनॉमिस्ट गौरा सेनगुप्ता का कहना है कि अगली तिमाही में महंगाई चरम पर पहुंच सकती है. इसलिए अक्टूबर महीने में महंगाई दर बढ़ने की संभावना ज्यादा है. इकरा रेटिंग्स की चीफ इकोनॉमिस्ट अदिति नायर और क्वाइंट इको रिसर्च की युविका सिंघल ने कहा कि अगर आगामी मीटिंग तक क्रूड ऑयल के दाम ऊंची बने रहते हैं तो दर वृद्धि को अक्टूबर में आगे बढ़ाया जा सकता है. इसके अलावा केयरएज रेटिंग्स की रजनी सिन्हा ने बताया कि सरकार की बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और बढ़ती कीमत के दबाव को भी एमपीसी (MPC) नजरअंदाज नहीं कर सकती.
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अगुवाई वाली मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) के सामने महंगाई कंट्रोल करने के साथ ही इकोनॉमिक ग्रोथ को बनाए रखना बड़ी चुनौती है. हालांकि, कुछ जानकारों का मानना है कि आरबीआई जल्दबाजी में किसी भी तरह का कदम उठाने से बच सकता है. इंडिया रेटिंग्स के चीफ इकोनॉमिस्ट डीके पंत के अनुसार लिक्विडिटी की स्थिति अभी स्थिर नहीं है. इसलिए अक्टूबर में रेपो रेट बढ़ाने का फैसला करना उलटा पड़ सकता है. ऐसे में यह भी हो सकता है कि आरबीआई ब्याज दर में किसी तरह का बदलाव नहीं करें.
बैंक ऑफ बड़ौदा के मदन सबनवीस और एचडीएफसी बैंक की साक्षी गुप्ता का भी मानना है कि दिसंबर तक महंगाई को लेकर तस्वीर साफ हो जाएगी. इसके बाद ही ब्याज दर में 25 से 50 बेसिस प्वाइंट्स की बढ़ोतरी संभव है. एमके ग्लोबल और आईसीआईसीआई बैंक के जानकारों के अनुसार ब्याज दर बढ़ोतरी 50 से 75 बेसिस प्वाइंट तक हो सकती है. यह काफी हद तक आने वाले समय में क्रूड ऑयल के दाम पर निर्भर करेगा. कुल मिलाकर आने वाले महीनों में आम जनता के लिए होम और कार लोन की ईएमआई (EMI) महंगी होने के पूरे आसार नजर आ रहे हैं.
रेपो रेट (Repo Rate) वह ब्याज दर है, जिस पर RBI कमर्शियल बैंकों को लोन देता है. जब आरबीआई (RBI) रेपो रेट में बढ़ोतरी करता है तो बैंकों के लिए भी लोन लेना महंगा हो जाता है. इस तरह लागत बढ़ने का बोझ बैंकों की तरफ से आम ग्राहकों पर डाला जाता है. इससे होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरें बढ़ जाती हैं. अगर आप लोन के टेन्योर (Tenure) को पहले के जितना ही रखता चाहते हैं तो बढ़ी हुई ब्याज दर के हिसाब से आपकी हर महीने की ईएमआई (EMI) बढ़ जाएगी.