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RBI एमपीसी की अगले हफ्ते होगी मीटिंग, होम लोन की EMI पर क्या होगा फैसला; SBI ने बताया

SBI Research Report: एसबीआई रिएर्च की रिपोर्ट में उम्मीद जताई गई कि आरबीआई (RBI) इसी महीने होने वाली MPC मीटिंग में रेपो रेट को 25 बेसिस प्वाइंट तक बढ़ा सकता है. बढ़ती महंगाई, कमजोर मानसून और ग्लोबल संकट के बीच आपके होम लोन की EMI पर क्या असर पड़ेगा.

RBI एमपीसी की अगले हफ्ते होगी मीटिंग, होम लोन की EMI पर क्या होगा फैसला; SBI ने बताया

RBI Repo Rate: अगर आप हर महीने होम लोन की ईएमआई का भुगतान कर रहे हैं या होम लोन लेने का प्लान कर रहे हैं तो यह खबर आपके काम की है. जी हां, आरबीआई की तरफ से कुछ दिन बाद होने वाली एमपीसी (MPC) में रेपो रेट को 25 बेसिस प्वाइंट तक बढ़ाया जा सकता है. ब्याज दर में इजाफा होने का कारण महंगाई का दबाव बढ़ना, ग्लोबल इकोनॉमिक हालात का बिगड़ना, लिक्विडिटी की बदलती स्थिति और ग्लोबल लेवल पर रिस्क का नए सिरे से उभरना है. यह जानकारी एसबीआई की तरफ से जारी एक रिपोर्ट में दी गई.

बढ़ सकता है जीडीपी ग्रोथ का अनुमान

आरबीआई (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की मीटिंग 5 से 7 अक्टूबर तक होनी है. इस दौरान बेंचमार्क रेपो रेट पर फैसला किया जाना है. एसबीआई की रिपोर्ट में कहा गया जियो-पॉलिटिकल टेंशन, क्रूड ऑयल के दाम से जुड़े रिस्क और ग्लोबल लेवल के रिस्क के पुनर्मूल्यांकन को देखते हुए, 'हमारे लिए यही सही होगा कि हम स्थिति से पीछे रहने के बजाय पहले से ही एहतियाती कदम उठाएं.' रिपोर्ट में कहा गया 'हमें यह भी उम्मीद है कि आरबीआई वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी ग्रोथ के अनुमान में 30 बेसिस प्वाइंट और महंगाई के अनुमान में 20 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी करेगा.'

महंगाई दर में इजाफा जारी

महंगाई लगातार बढ़ रही है. अगस्त में सीपीआई (CPI) बेस्ड महंगाई जुलाई के 4.45 प्रतिशत से बढ़कर 4.82 प्रतिशत हो गई. रिपोर्ट के अनुसार भारतीय रुपया भी लगातार गिरावट के दौर में है, डॉलर इंडेक्स मजबूत हो रहा है. पिछले कारोबारी हफ्ते से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की लगातार बिकवाली के कारण 4.45 अरब डॉलर की निकासी हुई है. रिपोर्ट में यह भी बताया गया 'भले ही ब्याज दर में बढ़ोतरी करीब आती दिख रही है, लेकिन मानसून के हालात पर भी फोकस किया जाना जरूरी है. 2026 का मानसून साल 2000 के बाद चौथा सबसे कम बारिश वाला मानसून रहा, जो लॉन्ग टर्म (LPA) का 87 प्रतिशत रहा. वहीं, 43 प्रतिशत जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई.'

अल नीनो की परिस्थितियां और अक्टूबर में सामान्य से कम बारिश रबी फसलों के उत्पादन के लिए और रिस्क बन सकती है. रिपोर्ट में कहा गया कि कुल मिलाकर लिक्विडिटी अभी भले ही ज्यादा है, लेकिन हकीकत में प्रभावी तरलता का सृजन काफी कम है. स्पेशल स्वैपिंग सुविधा के तहत रिकॉर्ड 143.5 अरब डॉलर के विदेशी मुद्रा प्रवाह के बावजूद, सीआरआर / एसएलआर / एलसीआर बैंकों की तरफ से अतिरिक्त जमा राशि के इस्तेमाल को लिमिटेड करती है.

एसबीआई की रिपोर्ट में अनुमान जताया गया कि वित्त वर्ष 2026-27 में अनुमानित 16 प्रतिशत लोन ग्रोथ को सपोर्ट करने के लिए, नियामकीय प्रावधानों, यूपीआई और स्पर्श संबंधी जरूरत के कारण बैंकों के लेवल पर जमा सृजन में 8.2 लाख करोड़ रुपये का अंतर रहेगा.' रिपोर्ट में कहा गया कि फिलहाल भारत को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन नीति निर्माताओं और नियामकों के लिए यह बेहतर होगा कि वे ऐसी संभावित स्थिति के लिए तैयार रहें. बदलती व्यापक आर्थिक परिस्थितियां व्यापक हितों की सुरक्षा के लिए कुछ असामान्य ब्याज दर संबंधी उपायों को अपनाने के लिए मजबूर कर सकती हैं.

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About the Author

Kriyanshu Saraswat

Kriyanshu Saraswat

क्रियांशु सारस्वत वरिष्ठ बिजनेस जर्नलिस्ट (Business Journalist) हैं, उन्हें डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 साल का अनुभव है. मौजूदा समय में वह Zee News (Hindi) की डिजिटल टीम में बतौर 'असिस्टेंट न्यूज एडिटर' कार्यरत हैं. क्रियांशु को बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, टैक्सेशन, कमोडिटी और सरकारी योजनाओं आदि से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में महारथ हासिल है. Zee News से पहले क्रियांशु ने टाइम्स इंटरनेट, हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण और अमर उजाला की वेबसाइट में अहम संपादकीय जिम्मेदारियां निभाई हैं. इस दौरान क्रियांशु ने ऑटो, टेक्नोलॉजी और लाइफस्‍टाइल लीड की जिम्मेदारी संभाली है. अभी क्रियांशु बिजनेस लीड हैं. यूपी से ताल्‍लुक रखने वाले क्र‍ियांशु पत्रकार‍िता में पोस्ट ग्रेजुएट हैं.
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