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सऊदी अरामको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) अमीन नासिर ने सोमवार को चेतावनी दी कि ग्लोबल तेल भंडार खतरनाक रूप से निचले स्तर पर पहुंच गए हैं. ऐसे में अगर होर्मुज पूरी तरह सामान्य नहीं होता है, तो वैश्विक एनर्जी बाजारों को आगे और आपूर्ति संबंधी जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है.
लंदन में आयोजित एनर्जी इंटेलिजेंस फोरम को संबोधित करते हुए नासिर ने कहा कि सामान्य परिस्थितियों में तेल भंडार बाजार को झटकों से बचाने का काम करते हैं, लेकिन वर्तमान में ये भंडार काफी कम हो चुके हैं. इससे किसी भी नए संकट का असर अधिक गंभीर हो सकता है.
अमीन नासिर ने कहा कि प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं द्वारा स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम भंडार जारी करने का फैसला शार्ट टर्म राहत जरूर दे सकता है, लेकिन इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में मौजूद डिमांड और सप्लाई के मूल असंतुलन का समाधान नहीं होगा.
नासिर ने कहा कि जब तक होर्मुज से तेल और फ्यूल की आवाजाही पूरी तरह सामान्य नहीं होती और बाजार का भरोसा बहाल नहीं होता, तब तक कच्चे तेल और रिफाइंड फ्यूल बाजारों पर दबाव बना रह सकता है.
उनकी ये टिप्पणी ऐसे समय आई है जब हाल ही में दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं ने बढ़ती फ्यूल कीमतों को नियंत्रित करने के लिए लगभग 10 करोड़ बैरल आपातकालीन तेल और डीजल भंडार जारी करने की योजना की घोषणा की है. अरामको प्रमुख ने कहा कि होर्मुज के पूरी तरह खुल जाने के बाद भी वैश्विक तेल भंडार को दोबारा सामान्य स्तर पर पहुंचाने में करीब दो वर्ष तक का समय लग सकता है. इससे स्पष्ट है कि वर्तमान दबाव केवल शार्ट टर्म नहीं, बल्कि मीडियम टर्म तक भी बने रह सकते हैं.
गौरतलब है कि इस वर्ष अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद शुरू हुए क्षेत्रीय संघर्ष ने होर्मुज (ये वैश्विक ऊर्जा व्यापार का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है) को प्रभावित किया था. इसके चलते तेल सप्लाई और समुद्री परिवहन को लेकर चिंताएं बढ़ गई थीं.
हालांकि, खाड़ी क्षेत्र के प्रमुख उत्पादक देशों ने निर्यात बहाल करने के प्रयास तेज कर दिए हैं. नतीजतन, कच्चे तेल की आपूर्ति संघर्ष से पहले के स्तरों के करीब पहुंचने लगी है. सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत ने तेल परिवहन बनाए रखने के लिए अपने स्वयं के टैंकर बेड़ों का उपयोग बढ़ाया है. वहीं, सऊदी अरामको ने रास तनुरा टर्मिनल से निर्यात बढ़ाया है और हालिया हमले के बाद प्रभावित हुई ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन की क्षमता को भी लगभग 80 प्रतिशत तक बहाल कर दिया है.
इसके बावजूद बाजार में खतरे की धारणा बनी हुई है. विशेषज्ञों का कहना है कि फारस की खाड़ी और लाल सागर में जारी सुरक्षा जोखिमों के कारण तेल बाजार अभी भी जियो-पॉलिटिकल अनिश्चितताओं को कीमतों में शामिल कर रहा है. इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड पिछले एक महीने से 100 डॉलर प्रति बैरल के आस-पास कारोबार कर रहा है. ये संकेत देता है कि निवेशक अभी भी संभावित सप्लाई बाधाओं को लेकर चिंतित हैं.
(IANS के इनपुट के साथ)