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Indian Rupee : रुपये पिछले कुछ वर्षों से लगातार गिरता जा रहा है. गुरुवार यानी 22 अक्टूबर को शुरुआती कारोबार में रुपये में कमजोरी देखने को मिली है. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और इक्विटी मार्केट में गिरावट के चलते रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 12 पैसे गिरकर 94.50 पर आ गया. हालांकि, डॉलर में नरमी और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड (बॉन्ड यील्ड) में कमी ने रुपये की गिरावट को कुछ हद तक थामने में मदद की.
इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में रुपया 94.47 पर खुला और बाद में गिरकर 94.50 पर आ गया. इससे एक दिन पहले यानी बुधवार को रुपया 53 पैसे चढ़कर डॉलर के मुकाबले 94.38 पर बंद हुआ था.
फॉरेक्स एनालिस्ट का कहना है कि घरेलू शेयर बाजार के दबाव और तेल की ऊंची कीमतों के बीच रुपया सपाट से लेकर कमजोर रुख के साथ कारोबार कर रहा था. डॉलर में कमजोरी और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में नरमी से रुपये को कुछ सहारा मिला. मीराए एसेट शेयरखान के रिसर्च एनालिस्ट अनुज चौधरी को उम्मीद है कि रुपये में थोड़ा सकारात्मक रुख बना रह सकता है.
उन्होंने कहा, 'हमें उम्मीद है कि आईपीओ से जुड़े विदेशी निवेश और डॉलर में कमजोरी के चलते रुपया थोड़े सकारात्मक रुख के साथ कारोबार करेगा. अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में नरमी और रूस के नई शांति वार्ता के लिए तैयार होने की खबरें भी रुपये को सहारा दे सकती हैं.' चौधरी ने आगे कहा कि बाजार के पार्टिसिपेंट्स आगे की दिशा समझने के लिए अमेरिका के साप्ताहिक बेरोजगारी दावों के आंकड़ों पर नजर रखेंगे.'
डॉलर इंडेक्स, (छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की चाल को मापता है) 0.21 प्रतिशत गिरकर 101.56 पर आ गया है. इसके विपरीत ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 1.58 प्रतिशत बढ़कर 110.54 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. कोटक नियो में कमोडिटी और करेंसी रिसर्च के प्रमुख अनिंद्य बनर्जी ने कहा कि रुपया 94-97 के दायरे में काफी संतुलित बना हुआ है.
बनर्जी के मुताबिक, 'RBI को कुछ समय मिल गया है, जियो IPO से डॉलर की सप्लाई में कुछ हद तक बढ़ोतरी हुई है और अमेरिका के साथ कोई व्यापार समझौता होने से फंड के आने का सिलसिला और मजबूत हो सकता है. लेकिन, अगर पोर्टफोलियो की बिकवाली फिर से तेज हो जाती है या कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर के स्तर की ओर बढ़ने लगती है, तो ये संतुलन डगमगा सकता है.'
शुरुआती कारोबार के दौरान घरेलू शेयर बाजार भी दबाव में रहा. BSE सेंसेक्स 642.51 अंक गिरकर 73,067.18 पर आ गया, जबकि NSE निफ्टी50 241.35 अंक गिरकर 22,570.90 पर पहुंच गया. गुरुवार सुबह शेयर बाजार में कमजोरी के बावजूद पिछले सेशन में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने खरीदारी की है. एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, बुधवार को उन्होंने 1,022.32 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे हैं.
भारतीय रुपये के कमजोर होने से कच्चे तेल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी आयातित वस्तुओं की लागत बढ़ जाती है. इससे देश में महंगाई बढ़ती है और परिवारों का खर्च भी बढ़ जाता है. इससे आम नागरिक के लिए रोजमर्रा की जिंदगी महंगी हो जाती है. आसान शब्दों में कहें तो भारत एक ऐसा देश है जो आयात पर बहुत अधिक निर्भर है. हम इलेक्ट्रॉनिक्स, कच्चे तेल, सोने, उर्वरकों, औद्योगिक तकनीक, एलपीजी जैसी कई चीजों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर हैं. सीधे तौर पर इसका मतलब ये है कि एक व्यक्ति अपने रोजमर्रा के जीवन में जो भी चीजें इस्तेमाल करता है. वे सभी महंगी हो जाएंगी- चाहे वह भोजन हो, कपड़े हों, पेट्रोल हो, खाने का तेल हो या फिर इलेक्ट्रॉनिक्स का सामान.