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Goldman Sachs Report : दुनियाभर में महंगाई, युद्ध और प्रोटेस्ट का खतरा अभी टला नहीं है. यूरोप के कई देश इसकी आग में जल रहे हैं. इन सभी घटनाओं का असर आम आदमी की जिंदगी पर पड़ता है और आने वाले समय में आपकी जेब पर कई वजहों से बोझ और बढ़ सकता है. पूरी दुनिया में कच्चे तेल से लेकर प्राकृतिक गैस और खाने-पीने की चीजों तक...कई जरूरी कमोडिटी की कीमतों में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है. गोल्डमैन सैक्स की हालिया रिपोर्ट ने वैश्विक बाजारों को लेकर ऐसी ही चेतावनी दी है.
इस रिपोर्ट के मुताबिक, 2027 तक कमोडिटी बाजार में भारी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है. अगर खाड़ी क्षेत्र से सप्लाई में रुकावटें बनी रहती हैं, तो 2027 की शुरुआत में ब्रेंट क्रूड की कीमत 140 डॉलर तक पहुंच सकती है. जियो-पॉलिटिकल तनाव, सप्लाई चेन में रुकावटें और मौसम की मार कीमतों का पूरा गणित बिगाड़ सकती है. इसका असर सिर्फ बाजारों पर नहीं, बल्कि आम आदमी की जेब पर भी पड़ सकता है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि अनुमान ये है कि मिडिल ईस्ट से सप्लाई में और सुधार होने और रिस्क प्रीमियम कम होने से 2026 के अंत तक ब्रेंट क्रूड की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल और यूरोपीय प्राकृतिक गैस की कीमत 70 यूरो प्रति मेगावाट-घंटा (EUR70/MWh) तक आ सकती है.
गोल्डमैन सैक्स ने चेतावनी दी है कि अगर खाड़ी क्षेत्र से तेल की आपूर्ति में लंबे समय तक रुकावट बनी रहती है, तो 2027 में कीमतें काफी ज्यादा बढ़ सकती हैं. बैंक ने कहा कि अगर खाड़ी क्षेत्र से औसत उत्पादन फरवरी 2026 के स्तर से 5 मिलियन बैरल प्रति दिन कम रहता है, तो 2027 की शुरुआत में ब्रेंट क्रूड की कीमत 140 डॉलर तक पहुंच सकती है और 2027 में इसका औसत भाव लगभग 125 डॉलर प्रति बैरल रह सकता है.
अगर लिक्विफाइड नेचुरल गैस का निर्यात कम रहता है और यूरोप में सर्दियां सामान्य से कहीं अधिक होती हैं, तो 2026 के अंत तक यूरोपीय प्राकृतिक गैस की कीमतें 150 यूरो प्रति मेगावाट-घंटा तक पहुंच सकती हैं.
गोल्डमैन सैक्स ने कहा है कि होर्मुज में जहाजों पर बढ़ते हमले, एनर्जी इन्फ्रा को नुकसान और यूरोप में सामान्य से अधिक ठंडी पड़ने की संभावना से ऊर्जा की कीमतें काफी तेजी से बढ़ सकती हैं. हालांकि, गोल्डमैन सैक्स के मुख्य अनुमान के मुताबिक जैसे-जैसे मिडिल ईस्ट से सप्लाई में सुधार होगा और रिस्क प्रीमियम (जोखिम के कारण लगने वाला एडिशनल प्रीमियम) कम होगा, कीमतों में कुछ नरमी आ सकती है.
रॉयटर्स के मुताबिक, बुधवार को तेल की कीमतों में तेजी आई है. मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण सप्लाई में रुकावट की चिंताएं बढ़ गईं, जबकि अमेरिका में क्रूड ऑयल और ईंधन के भंडार में कमी ने भी बाजार को समर्थन दिया है. DBS में एनर्जी रिसर्च के प्रमुख सुवरो सरकार ने रॉयटर्स को बताया, 'पिछले कुछ सत्रों में तेल की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है.' उन्होंने इन उतार-चढ़ावों के पीछे कई कारणों को जिम्मेदार बताया है.
समुद्री सुरक्षा के जोखिम भी बढ़ गए हैं. शिप-ट्रैकिंग फर्म 'केप्लर' ने पिछले दो हफ्तों में जहाजों पर कम से कम 18 हमलों को दर्ज किया है. LSEG के विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि टैंकरों पर हमले अब 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' से आगे बढ़कर 'गल्फ ऑफ ओमान' तक पहुंच गए हैं. इससे इस क्षेत्र में तेल की लोडिंग और जहाजों के बीच माल के ट्रांसफर पर खतरा पैदा हो गया है. हूतियों ने यानबू में सऊदी अरामको की साइट, शायबाह, ऑयलफील्ड और रियाद के हवाई अड्डों पर हुए हमलों की जिम्मेदारी ली है. इस बीच, यमनी सरकारी बलों पर हूतियों के हमले में मरने वालों की संख्या बढ़कर 73 हो गई है.
एनर्जी के अलावा गोल्डमैन सैक्स ने चेतावनी दी है कि कृषि कमोडिटी को खाद्य निर्यात पर संभावित प्रतिबंधों और 'अल नीनो' जैसे मौसम पैटर्न के कारण बढ़ते जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है. गोल्डमैन सैक्स ने बताया कि ब्लूमबर्ग कमोडिटी इंडेक्स का कृषि घटक साल-दर-साल 19 प्रतिशत बढ़ा है. 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के रास्ते उर्वरक (खाद) की खेप और 'ब्लैक सी' के रास्ते अनाज के निर्यात में रुकावट आने से लागत बढ़ सकती है और सप्लाई में रुकावट हो सकती है. रिपोर्ट में कहा गया है कि मजबूत होते 'अल नीनो' के 'सुपर' अल नीनो की स्थिति में पहुंचने की संभावना 81% से अधिक है. इसमें चेतावनी दी गई है कि मौसम का यह पैटर्न सूखे और बाढ़ के जरिए प्रमुख कृषि क्षेत्रों में फसल उत्पादन को बाधित कर सकता है.
ये अनुमान ऐसे समय में आया है जब जियो-पॉलिटिकल तनाव उथल-पुथल के ग्लोबल सप्लाई चेन पर पड़ने वाले असर को लेकर व्यापक चिंताएं हैं. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में ऊर्जा विभाग के दो अधिकारियों ने बताया कि वे दुनिया भर की रिफाइनरियों के साथ मिलकर ईंधन उत्पादन बढ़ाने पर काम कर रहे हैं, क्योंकि डीजल की कमी के कारण कीमतें बढ़ गई हैं. अमेरिकी पेट्रोलियम संस्थान के आंकड़ों का हवाला देते हुए सूत्रों ने बताया कि 16 अक्टूबर को समाप्त हुए सप्ताह में अमेरिका में कच्चे तेल (क्रूड) का भंडार 4.9 मिलियन बैरल कम हो गया.
गोल्डमैन सैक्स का मानना है कि लंबी अवधि की मांग और सप्लाई के रुझानों से औद्योगिक और कीमती धातुओं को फायदा मिलेगा. बैंक का अनुमान है कि 2027 में तांबे की कीमतें औसतन 15,400 डॉलर प्रति टन तक पहुंच सकती हैं. इसके पीछे मुख्य कारण विद्युतीकरण, डेटा सेंटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी डिमांड और खदानों से होने वाली सीमित सप्लाई है.
रिपोर्ट के मुताबिक, सेंट्रल बैंकों की खरीदारी और निवेश में विविधता लाने की कोशिशों के चलते 2027 के अंत तक सोने की कीमतें 5,400 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती हैं. गोल्डमैन सैक्स के मुताबिक, ब्लूमबर्ग कमोडिटी इंडेक्स ने इस साल अब तक कुल 36 प्रतिशत का रिटर्न दिया है, जो इक्विटी और बॉन्ड के प्रदर्शन से बेहतर है.