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Blinkit Expansion Plan : एटरनल (Eternal) का क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म 'ब्लिंकिट' (Blinkit) बड़े पैमाने पर विस्तार करने की तैयारी में है. कंपनी का लक्ष्य मार्च 2027 तक 3,500 स्टोर खोलने का है. CEO अलबिंदर ढींडसा का मानना है कि छोटे शहरों में काफी संभावनाएं हैं. छोटे शहरों ने अब तक पर्याप्त सेवाएं नहीं पहुंच पाई थीं. भले ही वहां लोगों की आय कम हो, लेकिन डेटा से पता चलता है कि मांग बढ़ रही है, क्योंकि ये स्टोर लोगों की उन जरूरतों को पूरा कर रहे हैं जो पहले अधूरी थीं.
उन्होंने बताया कि कंपनी ने काफी अच्छी ग्रोथ दर्ज की है. पहले नुकसान झेलने के बाद अब कंपनी मुनाफे में आ गई है. उन्होंने कहा, 'हमें उम्मीद है कि मार्च 2027 तक हमारे पास 3,500 से अधिक स्टोर होंगे और हमारी मौजूदा योजनाओं के अनुसार मार्च 2028 तक लगभग 5,000 स्टोर हो सकते हैं.'
एटरनल के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) अक्षंत गोयल ने कहा, कंपनी ने बुधवार को FY27 की दूसरी तिमाही (Q2) के नतीजे जारी किए. उन्होंने बताया कि ब्लिंकिट के लिए नई रणनीतियां काम कर रही हैं.
पैरेंट कंपनी इटरनल का सितंबर तिमाही में कुल नेट प्रॉफिट ₹125 करोड़ रहा, ये पिछले साल के ₹65 करोड़ से 92.3% अधिक है. वहीं, ब्लिंकिट ने 184 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया है, जबकि इससे पहले कंपनी को 156 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था. CFO अक्षंत ने कहा, 'फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स, दोनों ही बिजनेस से मिलने वाले कैश बैलेंस और मुनाफे की मदद से हम विकास की इस गति को आसानी से बनाए रख सकते हैं.'
शेयरधारकों को लिखे एक पत्र में अलबिंदर ने कहा कि छोटे शहरों में मांग तो है, लेकिन वहां लंबे समय से लोगों की जरूरतें ठीक से पूरी नहीं हो पा रही थीं. उन्होंने बताया, 'आमतौर पर लोगों को तीन बातों को लेकर संदेह होता है. लोगों की आय कम है, खरीदारी की क्षमता कम है और जनसंख्या घनत्व इतना कम है कि बिजनेस मॉडल काम नहीं करेगा. अब तक के हमारे डेटा से पता चलता है कि पहली बात तो सच है, लेकिन इसका असर उतना नहीं है जितना लोग सोचते हैं. बाकी दो बातों को लेकर डेटा कुछ और ही कहता है. ब्लिंकिट की सेवाएं इसे छोटे शहरों में काफी लोकप्रिय बनाती हैं.
उन्होंने कहा, 'ऑर्गनाइज्ड रिटेल (बड़ी रिटेल चेन) बेहतर कीमतों और ज्यादा विकल्पों के साथ इन शहरों की मांग को पूरा कर सकता था. लेकिन इन शहरों में इसका कभी पूरी तरह से विकास नहीं हो पाया है. हम जो सामान रखते और बेचते हैं. उनमें से बहुत कुछ या तो स्थानीय स्तर पर मिलता ही नहीं है या फिर ई-कॉमर्स जैसे अन्य माध्यमों से आने में कई दिन लग जाते हैं. हम इन सामानों को कुछ ही मिनटों में उपलब्ध कराकर इन शहरों के ग्राहकों के बीच नई मांग और नई आदतें पैदा कर रहे हैं.
छोटे शहरों में ब्लिंकिट के नए स्टोर, मेट्रो शहरों के स्टोर की तरह ही हैं. अलबिंदर ने बताया कि इन शहरों में सप्लाई चेन तैयार करना सबसे 'मुश्किल काम' है. अलबिंदर ने कहा, 'हम यह उम्मीद नहीं करते कि हर छोटा शहर मेट्रो शहर जैसा बन जाएगा. कुछ शहर छोटे ही रहेंगे. इसलिए हम इस बात को लेकर काफी सतर्क हैं कि हमें कहां विस्तार करना है. लेकिन जहां भी हमने सप्लाई चेन बनाई है. वहां हमारी उम्मीद से कहीं ज्यादा तेजी से और डिमांड अधिक देखने को मिली है.'
उन्होंने कहा, 'मेट्रो शहरों में हम आमतौर पर एक ऐसे बाजार के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं जो पहले से मौजूद है. जबकि छोटे शहरों में हम खुद बाजार और सप्लाई चेन दोनों बना रहे हैं. वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही (Q2 FY27) में ब्लिंकिट की नेट ऑर्डर वैल्यू सालाना आधार पर 79.3% बढ़कर 20,940 करोड़ रुपये हो गई है, जबकि तिमाही-दर-तिमाही यानी QoQ आधार पर इसमें 22.2% की ग्रोथ दर्ज की गई है.
पिछले चार वर्षों में जोमैटो की नेट ऑर्डर वैल्यू (NOV) दोगुनी से भी अधिक हो गई है. ये वित्त वर्ष 2022 के 18,160 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में 37,993 करोड़ रुपये हो गई है. फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म ने इस ग्रोथ का श्रेय बढ़ते ग्राहक आधार और ऑर्डर की फ्रीक्वेंसी को दिया है. मासिक आधार पर लेन-देन करने वाले ग्राहकों की औसत संख्या सालाना 16% बढ़कर 28 मिलियन (2.8 करोड़) हो गई है और नए यूजर्स का एक बड़ा हिस्सा पहली बार ऑनलाइन खाना ऑर्डर कर रहा है. लेकिन, ये ग्रोथ अभी पीक (टॉप पर) तक नहीं पहुंची है, क्योंकि जोमैटो को उम्मीद है कि फूड डिलीवरी मार्केट आने वाले कई वर्षों तक 20% से अधिक की दर से बढ़ता रहेगा.