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क्या ऑनलाइन डिलीवरी छीन रही है फल-सब्जी दुकानदारों का कारोबार? जानिए कितना परसेंट शिफ्ट हुआ है ट्रेड

ऑनलाइन ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स के बढ़ने के बावजूद पारंपरिक फल-सब्जी मंडियों पर कोई खास असर नहीं पड़ा है, क्योंकि उपभोक्ता गुणवत्ता परखकर ही खरीदारी पसंद करते हैं और ऑनलाइन कंपनियां भी सप्लाई के लिए मंडियों पर ही निर्भर हैं.

Written ByGaurav Singh
Published: Oct 20, 2026, 07:42 PM IST|Updated: Oct 20, 2026, 07:50 PM IST
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क्या ऑनलाइन डिलीवरी छीन रही है फल-सब्जी दुकानदारों का कारोबार? जानिए कितना परसेंट शिफ्ट हुआ है ट्रेड
Image Credit: फल और सब्जियों के कारोबार पर इसका बहुत बड़ा असर अभी तक दिखाई नहीं दे रहा है. | सोशल मीडिया/X

About the Author

    Gaurav Singh

    Gaurav Singh

    जी न्यूज में सीनियर सब-एडिटर हैं और वर्तमान में बिजनेस व फाइनेंशियल न्यूज कवर करते हैं.  देश की राजनीति से लेकर दुनिया के बनते-बिगड़ते सत्ता समीकरणों और घटनाओं को कवर कर चुके हैं  पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो UPTU से इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया है. उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले गौरव ने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और पिछले 6 वर्षों से लगातार इस क्षेत्र में सक्रिय हैं. आप गौरव सिंह से Gaurav.Singh@India.Com पर ईमेल के जरिए सीधे जुड़ सकते हैं. 
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    Online Sales: त्योहारी सीजन में जहां ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स का दायरा लगातार बढ़ रहा है. वहीं, फल और सब्जियों के कारोबार पर इसका बहुत बड़ा असर अभी तक दिखाई नहीं दे रहा है. ये बात दिल्ली के आजादपुर मंडी के पूर्व महासचिव राजकुमार भाटिया के साथ कई ट्रेडर्स ने कही है.

    ऑनलाइन बिक्री बढ़ने के बावजूद बिक्री में कोई फर्क नहीं?


    राजकुमार भाटिया ने सवाल (त्योहारी सीजन के दौरान ऑनलाइन प्लेटफॉर्म मंडियों और खुदरा बिक्रेताओं को कितना प्रभावित कर रहे हैं?) के जवाब में कहा कि ऑनलाइन बिक्री बढ़ने के बावजूद मंडियों की भूमिका पहले की तरह बनी हुई है, क्योंकि अधिकांश ऑनलाइन कंपनियां भी अपना माल सीधे मंडियों से ही खरीद रही हैं.

    'खरीदारी की आदतें अब भी काफी हद तक पारंपरिक हैं'

    उन्होंने कहा, 'फलों और सब्जियों के मामले में उपभोक्ताओं की खरीदारी की आदतें अब भी काफी हद तक पारंपरिक हैं. खासकर दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों में बड़ी संख्या में उपभोक्ता, विशेष रूप से गृहिणियां, फल और सब्जियां खरीदने से पहले उन्हें देखकर, छूकर और उनकी गुणवत्ता जांचकर खरीदना पसंद करती हैं.' 

    हालांकि, उन्होंने कहा कि छात्रों, कॉर्पोरेट कर्मचारियों और युवा उपभोक्ताओं के बीच ऑनलाइन खरीदारी का चलन बढ़ा है, लेकिन इसका सीधा असर मंडी के कारोबार पर नहीं पड़ा है. आगे उन्होंने बताया कि ऑनलाइन कंपनियों की बढ़ती बिक्री से सबसे ज्यादा असर छोटे रिटेलर्स के हिस्से पर पड़ा है, जबकि मंडियों में कुल मांग बनी हुई है क्योंकि ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों के लिए आपूर्ति का प्रमुख स्रोत मंडियां ही हैं.

    20% ट्रेड ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म की ओर शिफ्ट

    उन्होंने बताया कि रिटेलर्स का 20 प्रतिशत ट्रेड ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म की ओर शिफ्ट हुआ है. भाटिया ने कहा कि इस वर्ष अच्छी बारिश के कारण फलों और सब्जियों की फसल बेहतर रही है, जिससे मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बना हुआ है. त्योहारी सीजन में फलों की मांग आमतौर पर बढ़ जाती है और इस बार भी बाजार में अच्छे दाम मिलने की संभावना है.

    15-20 वर्षों में फल और सब्जी व्यापार में कोई बड़ा बदलाव नहीं

    उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि कपड़ा या कोई अन्य उत्पाद पसंद नहीं आता तो उसे लौटाया जा सकता है, लेकिन खराब निकले फल या सब्जी को उसी तरह वापस करना आसान नहीं होता. राजकुमार भाटिया ने आगे कहा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स का असर किराना, दवाइयों और पैकेज्ड उत्पादों पर अधिक पड़ सकता है, लेकिन पिछले 15-20 वर्षों में फल और सब्जी व्यापार में कोई बड़ा बदलाव नहीं देखा गया है.

    उन्होंने कहा कि फल और सब्जी ऐसा कारोबार है जिस पर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स का प्रभाव सीमित रहने की संभावना है, क्योंकि ये जल्दी खराब होने वाली वस्तुएं हैं और इनमें रिटर्न या एक्सचेंज की सुविधा व्यावहारिक नहीं होती. 

    अब तक करीब 3,000 करोड़ रुपए का नुकसान 

    दूसरी ओर, उन्होंने हाल के महीनों में दिल्ली में हुए विरोध-प्रदर्शनों और सड़क बंदी को व्यापार के लिए अधिक बड़ी चुनौती बताया. भाटिया ने आगे बताया कि कोविड काल में भी मंडियां सुचारू रूप से चलती रहीं क्योंकि लोगों की खाद्य जरूरतें कभी नहीं रुकतीं.

    इसी बीच, उद्योग संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने दावा किया है कि अक्टूबर में जारी विरोध-प्रदर्शनों के कारण दिल्ली के कारोबार को अब तक करीब 3,000 करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है. संगठन के अनुसार, नवरात्रि और दीपावली के दौरान खरीदारी प्रभावित होने से रिटेल क्षेत्र को लगभग 1,800 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है, जबकि थोक कारोबार को भी करीब 600 करोड़ रुपए का झटका लगा है. रास्ते बंद होने और ट्रकों की आवाजाही प्रभावित होने से सप्लाई चेन पर भी असर पड़ा है और त्योहारी सामान का एक बड़ा हिस्सा गोदामों में ही अटका हुआ है.

    (IANS के इनपुट के साथ)

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    TAGS:
    Indian Economy