क्या लैब में बना सोना गिरा देगा गोल्ड के दाम? अब टूटेंगे रेट! जानें क्या है पूरी टेक्नोलॉजी
अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को स्थित फ्यूजन स्टार्टअप मैराथन फ्यूजन ने दावा किया है कि उसने न्यूक्लियर फ्यूजन तकनीक का इस्तेमाल करके लिक्विड मेटल यानी मर्करी को असली और स्टेबल गोल्ड में बदल दिया है. कंपनी ने 21 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसकी जानकारी दी और दावा किया कि उसका प्रयोग CERN के पुराने रिकॉर्ड से 10 गुना आगे है.
Marathon Fusion Claims: किसी साधारण मेटल को सोने में बदल देना. कभी सिर्फ कल्पना और जादुई कहानियों का हिस्सा लगता था. लेकिन, अब विज्ञान की दुनिया से सामने आए एक दावे ने इस पुराने सपने को फिर चर्चा में ला दिया है. क्या वाकई लैब में सोना बनाना अब हकीकत बनने की ओर बढ़ रहा है?
सैन फ्रांसिस्को स्थित फ्यूजन स्टार्टअप 'मैराथन फ्यूजन' ने दावा किया है कि उसने न्यूक्लियर फ्यूजन तकनीक का इस्तेमाल करके लिक्विड मेटल यानी मर्करी को असली और स्टेबल गोल्ड में बदल दिया है. इस तरह उसने CERN के रिकॉर्ड को 10 गुना बेहतर प्रदर्शन के साथ पीछे छोड़ दिया है.
सैन फ्रांसिस्को के इस स्टार्टअप ने 21 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर इस नतीजे की घोषणा की. हालांकि, कंपनी ने ये नहीं बताया है कि उनके प्रयोग से कितना सोना तैयार हुआ है. इस वजह से इस बड़ी उपलब्धि के पैमाने और इसके व्यावसायिक (कमर्शियल) इस्तेमाल को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं. इस दावे ने एक पुराना सवाल फिर से खड़ा कर दिया है? क्या विज्ञान प्रयोगशाला में सोना बना सकता है और क्या इससे भविष्य में इस कीमती मेटल की कमी दूर हो सकती है?
मैराथन फ्यूजन की प्रक्रिया
'न्यूक्लियर ट्रांसम्यूटेशन' (nuclear transmutation) कही जाने वाली इस प्रक्रिया में किसी परमाणु के न्यूक्लियस (nucleus) को बदलकर एक नया तत्व बनाया जाता है. मैराथन फ्यूजन का प्रस्ताव है कि 'ड्यूटेरियम-ट्रिटियम फ्यूजन रिएक्शन' से निकलने वाले हाई एनर्जी न्यूट्रॉन का इस्तेमाल करके 'मर्करी-198' को 'मर्करी-197' में बदला जाए. ये बाद में टूटकर स्थिर 'गोल्ड-197' (सोना) में बदल जाता है. हालांकि, इस प्रक्रिया में बनने वाले रेडियोएक्टिव बाई-प्रोडक्ट्स अभी भी एक चुनौती बने हुए हैं.
इसके पीछे के भौतिक विज्ञान को CERN में पहले ही प्रदर्शित किया जा चुका है. 2015 से 2018 के सोने को लेकर प्रयोग हुआ था. CERN के प्रयोग के विपरीत मैराथन फ्यूजन का लक्ष्य, फ्यूजन से पैदा होने वाले न्यूट्रॉन का इस्तेमाल करके कहीं बड़े पैमाने पर सोना तैयार करना है.
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क्या फ्यूजन से बना सोना, गोल्ड की कीमतों के लिए खतरा है?
मैराथन फ्यूजन के इस परफॉरमेंस का आकलन करने के लिए अभी बहुत कम सबूत मौजूद हैं. कंपनी ने ये नहीं बताया कि उसने कितना सोना बनाया? CERN के किस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा या कोई एक्सपेरिमेंटल डेटा साझा किया. उनकी पोस्ट का बाकी हिस्सा सोने के बजाय मेडिकल आइसोटोप पर केंद्रित था. CERN के ALICE एक्सपेरिमेंट का अनुमान है कि लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर ने 2015-2018 के दौरान लगभग 29 पिकोग्राम सोना बनाया था. ये सोने के न्यूक्लिआई चार प्रयोगों में बने थे, लेकिन एक सेकंड के बहुत छोटे हिस्से में ही टूट गए.
मैराथन फ्यूजन के 2025 के रिसर्च पेपर में कमर्शियल स्तर पर प्रोडक्शन का एक अनुमान दिया गया है. इसके अनुसार, एक प्लांट प्रति गीगावाट थर्मल पावर से सालाना लगभग दो टन सोना बना सकता है. वहीं, वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, 2025 में दुनिया भर की सोने की खदानों से 3,672 टन सोने का उत्पादन हुआ है.
2026 की दूसरी तिमाही तक, जमीन के ऊपर पहले से ही लगभग 222,600 टन सोना मौजूद था. सोने को बेचने से पहले उसे स्टोर करके रखना होगा. मैराथन के पेपर के मुताबिक, इस प्रक्रिया से बने सोने में आइसोटोप रह जाएंगे. सुरक्षा मानकों के आधार पर इस सोने को लगभग 7 से 17 साल तक स्टोर करके रखना पड़ सकता है. रिसर्चर का कहना है कि अगर फीडस्टॉक के रूप में इस्तेमाल होने वाले मरकरी (पारे) को शुद्ध कर लिया जाए, तो इस समय को कम किया जा सकता है.
इसलिए, फ्यूजन से बना सोना अभी कमर्शियल बाजार से बहुत दूर है और इससे सोने की कीमतों पर तुरंत कोई असर पड़ने की संभावना नहीं है. मैराथन की घोषणा से कई महीने पहले से ही सोने की कीमतें गिर रही थीं. मल्टीकॉइन कैपिटल के संस्थापक और CIO तुषार जैन ने इस प्रयोग की तुलना लैब में बनाए जाने वाले हीरों से की और कहा, 'लैब में बने हीरों ने हीरों की कीमतों को गिरा दिया था.'
लैब में बना सोना, सोने की कीमतों पर क्या असर डालेगा?
सोना अपने 1 जनवरी के स्तर से 5.56% नीचे कारोबार कर रहा है. जनवरी के आखिर में ये अपने नए साल के स्तर से लगभग 25% ऊपर तक पहुंच गया था. लेकिन, फिर इसमें गिरावट आ गई. मार्केट अकाउंट 'बुल थ्योरी' के मुताबिक, सोने की वैल्यू में लगभग 406 अरब डॉलर की कमी आई है.
इसी दौरान चांदी की कीमतों में भी 3% की गिरावट आई, जिससे इन दोनों धातुओं में कुल नुकसान 500 अरब डॉलर से ज्यादा हो गया है. कुछ विश्लेषकों का मानना है कि सोने में आई यह गिरावट अब अपने अंतिम चरण में हो सकती है.
'इनटू द क्रिप्टोवर्स' के संस्थापक बेंजामिन कोवेन का कहना है कि उन्हें लगता है कि सोने का 'बेयर मार्केट' (गिरावट का दौर) अब खत्म होने वाला है, कुछ समय तक इसमें थोड़ी गिरावट बनी रह सकती है. निवेशकों के लिए,लैब में बनने वाले सोने की तुलना में सोने की कीमतों का मौजूदा उतार-चढ़ाव कहीं ज्यादा चिंता का विषय है.