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बिहार के कई जिले इस समय बाढ़ की मार झेल रहे हैं. इसी बीच सुपौल में कोसी के जलस्तर में उतार चढाव से कोसी तटबंध के अंदर बसे लोगों की परेशानी बढ़ चुकी है. तटबंध के अंदर बसे कई गावों में बाढ़ के पानी ने दस्तक दे दिया है. आलम यह है कि बाढ़ का पानी लोगों के घर, आंगन और दरवाजे तक जा पहुंचा है, जिससे जन जीवन अस्तव्यस्त हो गया है. हालांकि, अब पानी पीछे की ओर जाने लगा है, जिससे बाढ़ प्रभावित इलाके के लोगों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है.
प्रशासन से उचित कदम उठाने की अपील
आज सुबह सात बजे कोसी बराज से एक लाख 80 हजार 490 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज किया गया है. कोसी तटबंध के अंदर बसे किसनपुर प्रखंड के सुकुमारपुर में लोगों के घरों में बाढ़ का पानी घुस गया है. लोग खाने-पीने की चीजों की कमी और रहने-सहने की मुश्किलों से जूझ रहे हैं, साथ ही उन्हें जहरीले जीवों का भी खतरा है. साफ पीने के पानी की कमी एक बड़ी समस्या बन गई है. मिली जानकारी के मुताबिक, बाढ़ के पानी में हैंडपंप (चापाकल) भी डूब गए हैं. सड़कों, खेतों, खलिहानों और आंगन में पानी भर जाने से मवेशियों के रहने और उनके चारे की समस्या पैदा हो गई है. ऐसे हालात में लोग पानी का स्तर घटने की उम्मीद कर रहे हैं. स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से उचित कदम उठाने की अपील की है.
गंगा के कटाव से खतरे में चिरैया दियारा
वहीं, पटना में बख्तियारपुर प्रखंड का चिरैया दियारा गांव फिर गंगा नदी के कटाव से डूबने के कगार पर है. स्थानीय प्रशासन ने रेत की बोरियों से गंगा की तेज धारा को रोकने का प्रयास किया, लेकिन सभी बोरियां धारा में बह गईं. चिरैया दियारा में 500 से अधिक घरों के पास गंगा नदी का कटाव पहुंच गया है. दो साल पहले तक गंगा नदी ग्रामीणों के घरों से दो किलोमीटर से भी अधिक दूरी पर बहती थी, लेकिन कटाव की तेज रफ्तार से अब उनके घरों के डूबने का खतरा मंडराने लगा है.
समय रहते कटाव को नहीं रोका गया तो...
ग्रामीणों ने अपना घर बचाने के लिए कुछ पेड़ को काटकर गंगा के किनारे डाल दिया है, जिससे कुछ हद तक कटाव रुका है. ग्रामीणों की मांग है कि गांव को कटाव से बचाने के लिए गंगा नदी के ढाल पर पत्थर के बोल्डर रखने की जरूरत है, तभी गंगा के कटाव को रोका जा सकता है. अगर सरकार कटाव को रोकने का कुछ प्रयास नहीं करती है, तब चिरैया दियारा का अस्तित्व ही मिट जायेगा. अगर समय रहते कटाव को नहीं रोका गया, तब सभी घर गंगा में विलीन हो जाएंगे.
पहाड़ी नदियों का रौद्र रूप, सड़क संपर्क टूटा
बेतिया में पहाड़ी नदियों ने भी रौद्र रूप धारण कर लिया है. गौनाहा में पहाड़ी मनियारी नदी कहर बरपा रही है, जिससे कई गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है और सड़क संपर्क टूट गया है. पानी का स्तर बढ़ने से कुकरा और मझरिया गांवों की सड़कें डूब गई हैं, जिससे निवासियों के लिए आना-जाना बहुत मुश्किल हो गया है. स्थानीय लोगों को एक युवा मोटरसाइकिल सवार को बचाने के लिए काफी मशक्कत करना पड़ा. मनियारी नदी के बढ़ते जलस्तर ने कुकरा और मझरिया के लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें हर साल बाढ़ के कारण मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, फिर भी सरकार न तो गांव की सड़कों की मरम्मत कर रही है और न ही बाढ़ की समस्या का कोई स्थायी समाधान निकाल रही है.
रिपोर्ट: जी मीडिया