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Motihari Flood: पूर्वी चंपारण के लिए बीती रात किसी 'कयामत की रात' से कम नहीं थी. पड़ोसी जिले बेतिया और गोपालगंज में गंडक नदी का चंपारण तटबंध टूट जाने की खबर से मोतिहारी में हड़कंप मच गया था. गंडक नदी के पानी का प्रचंड दबाव जब मोतिहारी के तटबंधों पर पड़ा, तो हर तरफ दहशत, खौफ और चीख-पुकार का माहौल था. हर कोई बस एक ही दुआ मांग रहा था कि किसी तरह आज की रात चंपारण तटबंध बच जाए, तो कल से जिंदगी पटरी पर आ जाएगी. गंडक नदी के जलस्तर में रिकॉर्ड वृद्धि के बाद संग्रामपुर प्रखंड के इजरा और अरेराज प्रखंड के मननपुर, सरेया, सिकटिया, नगदाहां व चटिया जैसे दर्जनों इलाकों में तटबंध की स्थिति बेहद गंभीर हो गई थी. कई जगहों पर उफनाता पानी तटबंध के ऊपर से बह रहा था, कहीं बड़े-बड़े गड्ढे बन गए थे तो कहीं मिट्टी धंसने से भयानक रिसाव शुरू हो चुका था.
रातभर तटबंध पर डटे रहे डीएम-एसपी
खतरा इस कदर बढ़ गया था कि अरेराज, संग्रामपुर, केसरिया और पहाड़पुर प्रखंडों की 15 पंचायतों पर जल-समाधि का खतरा मंडराने लगा था. बेतिया और गोपालगंज की भयानक स्थिति को देखते हुए मोतिहारी के डीएम सुमन सौरभ यादव और एसपी स्वर्ण प्रभात ने स्थिति की गंभीरता को समझा और खुद रात भर चंपारण तटबंध पर डटे रहे. अधिकारियों ने अपने दफ्तर को छोड़कर ग्राउंड जीरो पर उतरकर मरम्मत कार्यों की कमान संभाली. डीएम और एसपी की इस मुस्तैदी को देखकर ग्रामीणों का टूटता हौसला लौट आया.
ग्रामीणों और प्रशासन की मुस्तैदी से टला बाढ़ का संकट
तटबंध पर सरकारी मशीनरी के साथ-साथ सैकड़ों स्थानीय ग्रामीण और जनप्रतिनिधि भी रात भर जागते रहे. ग्रामीणों ने अधिकारियों के साथ मिलकर सैंड बैग (बालू की बोरियों) और उपलब्ध संसाधनों की मदद से जगह-जगह हो रहे खतरनाक रिसाव को कड़ी मशक्कत के बाद सील कर दिया. डीएम-एसपी की मुस्तैदी और ग्रामीणों के सहयोग का ही नतीजा रहा कि मोतिहारी में चंपारण तटबंध टूटने से बच गया और लाखों जिंदगियों पर मंडरा रहा खतरा टल गया. बाढ़ के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने स्टेट हाईवे-74 (SH-74) पर वाहनों का परिचालन पूरी तरह बंद कर दिया है. पूरे तटबंध क्षेत्र में पुलिस बल की गश्त भी बढ़ा दी गई है.
नदियों की रफ्तार थमी
नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश रुकने के बाद अब मोतिहारी पर मंडरा रहा बाढ़ का खतरा टलता दिख रहा है. आज सुबह से गंडक और सिकरहना नदी में पानी बढ़ने की रफ्तार में भारी कमी आई है. हालांकि, जलस्तर अभी घटा नहीं है, लेकिन आज से नदियों में पानी कम होने की पूरी संभावना जताई जा रही है. सुगौली क्षेत्र में सिकरहना नदी का जलस्तर स्थिर हो चुका है, जिससे नए रिहाइशी इलाकों में पानी का फैलाव थम गया है. संकट के इस सबसे कठिन दौर में मोतिहारी डीएम, एसपी और आम ग्रामीणों के संघर्ष की पूरे इलाके में चर्चा हो रही है.
रिपोर्ट: पंकज कुमार