नितिन नवीन को उनके घर में ही घेर रहे प्रशांत किशोर: BJP के सामने बांकीपुर के बाद अब पटना शिक्षक सीट बचाने की चुनौती
प्रशांत किशोर के निशाने पर एक बार फिर से बीजेपी का अभेद्य गढ़ है. खास बात यह है यहां भी बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है. यही वजह है कि नितिन नवीन ने पटना आकर पार्टी नेताओं-कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें कीं और चुनाव को लेकर कई दिशा-निर्देश दिए.
बिहार विधान परिषद की 8 सीटों पर हो रहे चुनाव का मैदान सज चुका है. 8 सीटों पर कुल 164 उम्मीदवार मैदान में हैं. अंतर्कलह से जूझ रहे एनडीए और महागठबंधन दोनों को सबसे ज्यादा खतरा प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज से महसूस हो रहा है. जन सुराज पहली बार एमएलसी चुनाव लड़ रही है और सभी 8 सीटों पर कड़ी टक्कर दे रही है. बांकीपुर फतह के बाद प्रशांत किशोर के निशाने पर बीजेपी का एक और किला है. खास बात यह है कि यहां भी बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है. हम बात कर रहे हैं विधान परिषद की पटना शिक्षक निर्वाचन सीट की.
इस सीट पर पिछले 30 वर्षों से बीजेपी के नवल किशोर यादव का कब्जा है. वह 1996 से लगातार इस सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. पार्टी ने एक बार फिर से उन्हें ही मैदान में उतारा है, तो महागठबंधन की ओर से राजद ने डॉ. संजीव कुमार सिंह को उम्मीदवार बनाया है. वहीं, प्रशांत किशोर ने चाणक्य फाउंडेशन की सीईओ दिव्या ज्योति को मैदान में उतार दिया है. दिव्या ज्योति के नामांकन में प्रशांत किशोर खुद शामिल हुए. इससे पहले उन्होंने एक जनसभा को संबोधित करके बीजेपी पर जमकर निशाना साधा.
पीके बोले- बदलाव की जरूरत
इस दौरान प्रशांत किशोर ने बिहार में बदलाव की जरूरत पर जोर देते हुए शिक्षकों और ग्रेजुएट मतदाताओं से जन सुराज के उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान की अपील की. उन्होंने कहा कि बिहार के शिक्षक और ग्रेजुएट राज्य के सबसे शिक्षित मतदाताओं में हैं और वे बेहतर शिक्षा व्यवस्था, सम्मान, वेतनमान और रोजगार के अवसरों के लिए बदलाव चाहते हैं. पीके ने शिक्षकों से वोट मांगते हुए कहा कि वे चाहे किसी भी श्रेणी में हों, विशिष्ट शिक्षक, विद्यालय शिक्षक, नियोजित शिक्षक, वित्त रहित शिक्षक या प्रधानाचार्य, उनकी मांगों को लेकर आवाज उठाएगा. उन्होंने दावा किया कि लोकसभा चुनाव से पहले शिक्षकों को सातवां वेतनमान दिलाने की जिम्मेदारी वह उठाएंगे. इसके लिए जरूरत पड़ने पर धरना, आमरण अनशन और मुख्यमंत्री का घेराव तक किया जाएगा.
दिव्या ज्योति के बारे में जानिए
दिव्या ज्योति मूल रूप से पटना के बाढ़ की रहने वालीं हैं. वह चाणक्य कॉलेज ऑफ हायर स्टडीज में असिस्टेंट प्रोफेसर और चाणक्य फाउंडेशन की सीईओ भी हैं. शिक्षा क्षेत्र में उनके पास लगभग 25 वर्षों का अनुभव है. वह शिक्षकों के अधिकार, गर्ल्स एजुकेशन और आर्थिक रूप से पिछड़े स्टूडेंट्स के उत्थान के लिए काम करतीं हैं. कहा जा रहा है कि दिव्या ज्योति को अगर प्रशांत किशोर टिकट ना देते तो वह निर्दलीय चुनाव लड़ने का विचार कर रही थीं. दिव्या ज्योति ने इस चुनाव में शिक्षकों से जुड़े पुरानी पेंशन नीति, समान वेतन समेत कई मुद्दों को प्रमुखता दी है.
नितिन नवीन खुद मैदान में उतरे
बांकीपुर विधानसभा सीट गंवाने के बाद अब नितिन नवीन के सामने पटना शिक्षक निर्वाचन सीट बचाने की बड़ी चुनौती है. विधान परिषद चुनाव की रणनीति तैयार करने के लिए नितिन नवीन मंगलवार को पटना पहुंचे. पटना पहुंचते ही उन्होंने पार्टी नेताओं, पदाधिकारियों और प्रत्याशियों के साथ बैठकों का दौर शुरू कर दिया. इन बैठकों में मुख्य रूप से विधान परिषद चुनाव में एनडीए की जीत की रणनीति, प्रत्याशियों के बीच बेहतर समन्वय और जमीनी स्तर पर चुनावी तैयारियों को लेकर मंथन किया. नितिन नवीन ने इस दौरान बूथ स्तर पर पार्टी को मजबूत करने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि संगठन की असली ताकत बूथ स्तर पर है, इसलिए हर बूथ की जनता के बीच में जाकर अपनी बात कहनी होगी.