यूपी में BJP को बड़ी टेंशन देने जा रहे निशांत: काशी विश्वनाथ के दर्शन से होगा मिशन का आगाज, 60 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी
बिहार में बीजेपी और जेडीयू के बीच पिछले कुछ दिनों से सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. पहले फरक्का जल समझौता और उसके बाद यूसीसी पर अमित शाह के बयान को लेकर दोनों दलों के बीच टशन सामने आ चुकी है. अब यूपी चुनाव को लेकर भी रार हो सकता है.
बिहार में भारतीय जनता पार्टी की सहयोगी जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाग्य आजमाने का फैसला लिया है. इसके लिए निशांत कुमार 25 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के दौरे पर जा रहे हैं. उत्तर प्रदेश में JDU और BJP के गठबंधन पर संशय लग रहा है. इसलिए उत्तर प्रदेश में JDU 60 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है. इसे यूपी चुनाव में एनडीए के भीतर प्रेशर पॉलिटिक्स के तौर पर देखा जा रहा है.
उत्तर प्रदेश में निशांत कुमार काशी विश्वनाथ से चुनावी शंखनाद करेंगे. उनकी मौजूदगी में वाराणसी में पार्टी का विशाल कार्यकर्ता सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है. माना जा रहा है कि इसी सम्मेलन में पार्टी की ओर से 60 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया जा सकता है. यह भी कहा जा रहा है कि पार्टी की ओर से यह कंडीशन रखी जा सकती है कि सम्मानजनक सीटें मिलने पर ही बीजेपी से गठबंधन किया जा सकता है.
READ ALSO: 'बांसुरी बजाने से फुर्सत नहीं': जमुई में नाबालिग से बदसलूकी पर IP गुप्ता ने SP को हटाने की मांग की
2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में जेडीयू की योजना थी कि वह एनडीए गठबंधन के घटक के रूप में चुनाव लड़ेगा पर सीटों को लेकर सहमति नहीं बनी थी. इसके बाद, जेडीयू ने अपने बूते चुनाव में उतरने का ऐलान किया था. 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 27 विधानसभा क्षेत्रों से अपने प्रत्याशी उतारे पर एक भी सीट पर उसे सफलता नहीं मिली थी.
उत्तर प्रदेश के पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी को एक प्रतिशत वोट भी हासिल नहीं हो सके. चुनाव में जदयू को मात्र 0.11 प्रतिशत वोट ही मिले थे. अधिकांश सीटों पर जदयू प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई थी. 2022 के विधानसभा चुनाव में जदयू का जोर पूर्वांचल की सीटों पर अधिक रहा था.
पार्टी ने जौनपुर के मल्हानी, मड़ियाहू, मुंगरा-बादशाहपुर, वाराणसी के रोहनिया, वाराणसी कैंट, चुनार, सोनभद्र के राबर्टसगंज, दुद्धी, कुशीनगर के तुमकुही राज, कुशीनगर, देवरिया के पथरदेवा, बलिया के फेफना, गाजीपुर के जहूराबाद, मुगलसराय के साथ-साथ लखनऊ कैंट, प्रयागराज के करछना, प्रतापपुर, रानीगंज, रायबरेली के सलोन आदि सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे.
2017 में भी जदयू ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में किस्मत आजमाने की तैयारी की थी. भाजपा के साथ गठबंधन का प्रयास भी हुआ था पर बात नहीं बनी थी. बाद में तय किया गया था कि पार्टी चुनाव नहीं लड़ेगा. पार्टी को लेकर आम धारणा है कि वह कुर्मी समाज की राजनीति करती है, क्योंकि पार्टी के सबसे बड़े नेता नीतीश कुमार इसी जाति से आते हैं.
उत्तर प्रदेश बीजेपी ने कुर्मी वोटों को साधने के लिए सोनेलाल पटेल की बेटी अनुप्रिया पटेल की पार्टी के साथ लंबे समय से गठबंधन किया हुआ है. इसके अलावा, बीजेपी के मौजूद प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी भी कुर्मी जाति से आते हैं. ऐसे में बीजेपी को लगता है कि उन्हें अब और किसी कुर्मी चेहरे या नेता को गठबंधन में लेने की जरूरत नहीं है.
उत्तर प्रदेश में जेडीयू और भारतीय जनता पार्टी के बीच गठबंधन पर अभी संशय बरकरार है. बहुत संभव है कि भाजपा पर प्रेशर बढ़ाने के लिए जनता दल यूनाइटेड वाराणसी में बड़ा कार्यकर्ता सम्मेलन का आयोजन करने जा रहा है और इसमें मुख्य वक्ता के तौर पर निशांत कुमार को बुलाया जा रहा है.
विशाल कुमार की रिपोर्ट