नवादा MP हिरासत मामले में DM सत्य प्रकाश और SP अभिनव धीमान पर जांच के आदेश
नवादा MP हिरासत मामले में लोकसभा अध्यक्ष ने बिहार के मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है. DM सत्य प्रकाश और SP अभिनव धीमान के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं.
नवादा के जिलाधिकारी (DM) सत्य प्रकाश और पुलिस अधीक्षक (SP) अभिनव धीमान के खिलाफ जांच के आदेश दिए गए हैं. उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी हो सकती है. नवादा में सांसद सुधाकर सिंह को हिरासत में लिए जाने का मामला तूल पकड़ता दिख रहा है. इस मामले को गंभीरता से लेते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बिहार के मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है.
इसके अलावा, नवादा के DM सत्य प्रकाश और SP अभिनव धीमान के खिलाफ जांच के आदेश दिए गए हैं. खबरों के अनुसार, संसद सत्र के दौरान बिना FIR दर्ज किए एक सांसद को कथित तौर पर हिरासत में लिए जाने का यह मामला अब संसद तक पहुंच गया है. लोकसभा अध्यक्ष द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद इसे संसदीय विशेषाधिकार और सदन की गरिमा से जुड़ा एक गंभीर मामला माना जा रहा है.
बता दें कि राजद सांसद सुधाकर सिंह ने बिहार सरकार पर एक बड़ा आरोप लगाया था. उन्होंने लिखा था-
बक्सर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से सांसद सुधाकर सिंह ने नवादा के DM और SP पर गंभीर आरोप लगाए थे. सांसद ने लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर नवादा जिला प्रशासन द्वारा अपनी 'अवैध निरुद्धि' (Illegal Detention) और लोकसभा नियमों के उल्लंघन के संबंध में विशेषाधिकार हनन (Breach of Privilege) की औपचारिक सूचना दी थी.
सांसद सुधाकर सिंह ने लोकसभा अध्यक्ष को भेजे गए अपने पत्र में बताया था कि यात्रा से ठीक पहले, 26 अक्टूबर को दोपहर लगभग 1 बजे, नवादा टाउन में जिला प्रशासन और पुलिस अधीक्षक के आदेश पर पुलिस ने उन्हें रोक लिया और हिरासत में ले लिया. इस पूरी घटना की वीडियो रिकॉर्डिंग सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध है.
सांसद का कहना था कि उन्हें अब तक कोई भी प्राथमिकी (FIR), गिरफ्तारी मेमो या निरुद्धि का लिखित आदेश नहीं दिया गया है, जो सीधे तौर पर भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 और 22 का उल्लंघन है.
इसके अलावा, लोकसभा की प्रक्रिया नियम 229 के तहत किसी भी सांसद को गिरफ्तार या निरुद्ध करने वाले प्राधिकारी की यह कानूनी बाध्यता होती है कि वह इसकी सूचना तत्काल लोकसभा अध्यक्ष को दे. परंतु, नवादा के प्राधिकारियों द्वारा ऐसी कोई सूचना नहीं दी गई है. सुधाकर सिंह ने आरोप लगाया है कि उन्हें ठीक उसी समय रोका गया जब वे संसद सत्र के लिए रवाना हो रहे थे. इसका स्पष्ट उद्देश्य उन्हें संसद की बैठकों, चर्चाओं, और अपने संसदीय क्षेत्र बक्सर की जनता की आवाज उठाने से रोकना है.
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