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झारखंड सरकार के मंत्री इरफान अंसारी के बयान पर भाजपा ने तीखा पलटवार किया है. भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने उन्हें कैबिनेट से तुरंत हटाने की मांग की है, तो बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने उनके बयान को देश विरोधी और जहरीला बताया है. रांची में भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा- इरफान अंसारी को तुरंत कैबिनेट से हटाया जाना चाहिए. उन्होंने संविधान को बनाए रखने और देश की अखंडता की रक्षा करने की शपथ ली थी, फिर भी वे संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ बयान दे रहे हैं. देखिए, वे कह रहे हैं कि 40 लाख युवा तैयार हैं और राहुल गांधी के इशारे का इंतजार कर रहे हैं, और वे सेना का सामना करने के लिए भी तैयार हैं. क्या वे सेना और छात्रों के बीच टकराव पैदा करना चाहते हैं? कांग्रेस वाले भाजपा का विरोध करते-करते देश के विरोध में बोलने लगे हैं.
इरफान अंसारी के बयान पर झारखंड विधानसभा नेता प्रतिपक्ष और भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने कहा- उन्होंने कोई नई बात नहीं कहा है. कांग्रेस पार्टी की मानसिकता वो दर्शाते हैं. उनके नेता राहुल गांधी चाहते ही हैं कि देश में अराजकता की स्थिति पैदा करके सत्ता को हासिल करें. ये लोग एक प्रकार से देश के दुश्मन हैं. राहुल गांधी जो चाह रहे हैं, उसी बात को इन्होंने कहा है, जो अंदर रहता है, वो जुबान से निकल जाता है. लेकिन वो भूल रहे हैं ये 1947 का भारत नहीं है. अब 2026 का भारत है. अब कांग्रेस पार्टी कुछ राज्यों में बची है, अगला चुनाव आते-आते देश से वो साफ हो जाएंगे.
पटना में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा- झारखंड सरकार के मंत्री इरफान अंसारी का यह देश-विरोधी और जहरीला बयान कांग्रेस की सुनियोजित अराजक और हिंसक साजिश की खुली स्वीकारोक्ति है. सत्ता परिवर्तन की बात करने वाले और भारत को बांग्लादेश या नेपाल बनाने वाले ऐसे देश-विरोधी बयान भारत जैसे देश में कभी सफल नहीं होंगे. भारत एक लोकतांत्रिक राष्ट्र है और 1.4 अरब स्वाभिमानी नागरिकों का मजबूत देश है. यहां न बांग्लादेश का हिंसक मॉडल चलेगा, न ही किसी को विदेशी ताकतों के इशारे पर अराजकता फैलाने की इजाजत दी जाएगी.
उन्होंने आगे कहा- कांग्रेस और इरफान अंसारी कान खोलकर सुन लें, 140 करोड़ देशवासी भारत से अथाह मुहब्बत करते हैं. बता दें कि इरफान अंसारी ने कहा था कि युवाओं, किसानों और अल्पसंख्यकों सहित कई समूहों में केंद्र सरकार के खिलाफ असंतोष बढ़ रहा है. उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर प्रधानमंत्री इन चिंताओं का समाधान नहीं करते हैं, तो भारत को बांग्लादेश और नेपाल से भी बदतर स्थिति का सामना करना पड़ सकता है. उन्होंने दावा किया था कि करीब 40 लाख युवा फिलहाल आंदोलन कर रहे हैं या कार्रवाई के लिए तैयार हैं. उन्होंने कहा था कि वे कांग्रेस नेता राहुल गांधी के इशारे का इंतजार कर रहे हैं, जिनके बारे में अंसारी ने कहा था कि वे इन युवाओं को रोके हुए हैं.
RJD नेता मनोज झा ने इरफान अंसारी के बयान पर कहा- कई लोग पड़ोस की घटनाओं को या वैश्विक स्थिति का गलत अर्थ निकालते हैं. मैं इस पर लगातार लिखता रहा हूं, बोलता रहा हूं. यह गांधी का देश है. यहां एक संविधान है, जिसके रचयिता बाबा साहब भीमराव अंबेडकर हैं. यहां लोकतांत्रिक कल्पना के लिए जवाहरलाल नेहरू हैं, एकता के लिए सरदार पटेल हैं,संयुक्त राष्ट्रवाद के लिए मौलाना आजाद हैं. हमें दुनिया के किसी और देश को देखने की जरूरत नहीं है. हमारी शिकायतें अपनी सत्ता से हैं और वाजिब शिकायतें हैं. सिर्फ विपक्ष की नहीं, युवाओं, छात्रों, किसानों की भी है लेकिन यह गांधी का मुल्क है. हमारे पास तीन आंदोलनों का प्रतिमान है जो असहयोग, सविनय अवज्ञा, भारत छोड़ो आंदोलन है. उन तीन आंदोलनों के मद्देनजर ही देश में परिवर्तन और बेहतरी की हर कोशिश होगी. कौन क्या बयान देता है,वो बेईमानी है. वे नहीं समझते कि असल में भारत क्या है.
जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा- सबसे पहले ऐसे नेताओं को कांके भेजना चाहिए, इतना बढ़िया मानसिक आरोग्यशाला वहां है. इस देश में लोकतंत्र की शक्ति से ये परिचित नहीं हैं. यह बांग्लादेश और श्रीलंका हिंदुस्तान नहीं है. दुनिया का विशालतम लोकतंत्र है जिसकी आबादी 150 करोड़ पहुंचने की ओर है और यहां आप जो इन छोटे मुल्कों के हालात का तुलनात्मक ब्यौरा देना चाहते हैं, आपको लोकतंत्र पर अगर यकीन नहीं है तो जनता आपको सबक सिखाएगी. मुझे लगता है ऐसे बयानों को बहुत गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है, इन नेताओं के मानसिक स्वास्थ्य का परीक्षण बेहद आवश्यक है.
इरफान अंसारी के बांग्लादेश वाले बयान पर शिव सेना गुट के प्रवक्ता आनंद दुबे ने कहा- हम तो यही कहेंगे इरफान अंसारी को कि कसाई के मनाने से गाय माता की मृत्यु नहीं हुआ करती. आप लाख अपने मन में मुंगेरी लाल के गंदे सपने देखें, चाहे खयाली पुलाव बनाएं कि देश में अराजकता फैलेगी, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे हालात हमारे भारत में होंगे, ये कदापि हो नहीं सकता. देश में 40 करोड़ से ज्यादा Gen-Z घरों में बैठकर पढ़ाई कर रहा है. अपने दीपावली की तैयारी कर रहा है, उसे पता है कि आईएएस, आईपीएस, बिजनेसमैन, वकील, इंजीनियर्स, डॉक्टर्स हमें बनना है.