जमुई: आरक्षण की समीक्षा के मुद्दे को लेकर एनडीए के भीतर शुरू हुई सियासी तकरार थमने का नाम ही नहीं ले रही है. गुरुवार को जमुई सर्किट हाउस में सांसद अरुण भारती के सामने लोजपा (रामविलास) के कार्यकर्ताओं ने हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) के नेता जीतन राम मांझी और सिकंदरा विधायक प्रफुल्ल मांझी के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगाए. एनडीए के घटक दल के नेताओं के खिलाफ उसी गठबंधन के कार्यकर्ताओं की नारेबाजी ने जिले की सियासत को गरमा दिया है.
दरअसल, आरक्षण में समीक्षा को लेकर जीतन राम मांझी और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के बीच लगातार परस्पर विरोधी बयानबाजी हो रही है. इसी राजनीतिक खींचतान के बीच सिकंदरा विधायक प्रफुल्ल मांझी ने जीतन राम मांझी के पक्ष में खुलकर अपनी बात रखी और चिराग पासवान तथा सांसद अरुण भारती को लेकर तीखी टिप्पणी की थी. विधायक की ओर से स्व. रामविलास पासवान को लेकर की गई व्यक्तिगत टिप्पणी के बाद विवाद और गहरा गया था.
गुरुवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के कार्यक्रम से लौटने के क्रम में सांसद अरुण भारती जमुई पहुंचे. सर्किट हाउस में लोजपा (रामविलास) के कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया और इसी दौरान जीतन राम मांझी और प्रफुल्ल मांझी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. इस पूरे घटनाक्रम ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या एनडीए में सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा है?
गठबंधन में ही 'मुर्दाबाद' के नारे से बढ़ी बेचैनी
एक ही गठबंधन में शामिल दलों के नेता जब एक-दूसरे के खिलाफ बयान देने लगें और फिर उनके कार्यकर्ता सार्वजनिक तौर पर एक-दूसरे के नेताओं के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगाने लगें, तो यह तस्वीर कई सवाल खड़े करती है. आम तौर पर चुनावी राजनीति में मुर्दाबाद और जिंदाबाद के नारे पक्ष-विपक्ष के बीच सुनाई देते हैं. ऐसे में एनडीए के भीतर ही घटक दल के नेताओं के खिलाफ नारेबाजी ने गठबंधन के अंदर सब कुछ सामान्य होने के दावे पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
हालांकि, सांसद अरुण भारती ने इस पूरे विवाद को व्यक्तिगत मुद्दा बनाने से इनकार किया. उन्होंने कहा कि "यह कोई मुद्दा नहीं है, विकास पर बात कीजिए." सांसद ने व्यक्तिगत बयानबाजी से दूर रहते हुए क्षेत्र के विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने की बात कही.
बहरहाल, आरक्षण के मुद्दे से शुरू हुई बयानबाजी अब जमुई की जमीन तक पहुंच चुकी है. एक तरफ नेताओं के बीच तीखी जुबानी जंग और दूसरी तरफ सर्किट हाउस में घटक दल के नेताओं के खिलाफ कार्यकर्ताओं की नारेबाजी यह संकेत जरूर दे रही है कि एनडीए के भीतर सब कुछ उतना सहज नहीं है, जितना बाहर से दिखाई देता है.