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बिहार में ट्यूशन और कोचिंग सेंटरों से हर महीने 1,100 करोड़ का कारोबार, कौन सा जिला सबसे आगे, यहां जानिए

बिहार में शिक्षा केवल पढ़ाई-लिखाई तक सीमित न रहकर एक बड़ा रोजगार का जरिया बन चुकी है. ई-श्रम पोर्टल के आंकड़ों से खुलासा हुआ है कि राज्य में ट्यूशन और छोटे कोचिंग सेंटरों का बाजार हर महीने करीब 1,100 करोड़ रुपए का कारोबार कर रहा है.

बिहार में ट्यूशन और कोचिंग सेंटरों से हर महीने 1,100 करोड़ का कारोबार, कौन सा जिला सबसे आगे, यहां जानिए
Image Credit: बिहार में ट्यूशन और कोचिंग हर महीने करीब 1,100 करोड़ रुपए का कारोबार (Photo-AI)

रोजगार की तलाश में युवा अपना शहर छोड़कर देश-विदेश जाता है, लेकिन कुछ युवा हैं. जो अपने गृह नगर में ही रहकर पैसा का लेते हैं. अपनी शिक्षा को रोजगार का एक अच्छा साधन बना लेते हैं. वह अपने शहर या गांव में ही ट्यूशन या कोचिंग सेंटर चला कर पैसा कमा लेते हैं और ऐसा हो भी रहा है. आप सोच रहे होंगे कि ये कहां हो रहा है? ऐसा बिहार के शिक्षित युवा कर रहे हैं. चलिए इसके बारे में पूरा विस्तार से इस ऑर्टिकल में जानने कि कोशिश करते हैं.

ट्यूशन और स्थानीय कोचिंग अब सिर्फ पढ़ाई-लिखाई का केवल जरिया का साधन नहीं रह गया है, बल्कि यह रोजगार का एक प्रमुख आधार बन गया है. आज पूरे बिहार में कोचिंग संस्थान हैं और स्थानीय स्तर पर ट्यूशन क्लास भी दी जाती है. प्रदेश में ट्यूशन और छोटे कोचिंग सेंटर आर्थिक और रोजगार बनकर उभरे हैं. इसका खुलासा ई-श्रम पोर्टल के अनुसार हुआ है. बिहार में ट्यूशन और कोचिंग सेंटर से हर महीने लगभग 1,100 करोड़ रुपये का कारोबार पैदा कर रहा है. 

हर महीने करीब 1,100 करोड़ रुपए का कारोबार
दरअसल, केंद्र सरकार के ई-श्रम पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, बिहार के 5.55 लाख से अधिक लोगों ने ट्यूशन पढ़ाने और छोटे कोचिंग सेंटर चलाने के रूप में अपना रजिस्ट्रेशन कराया है. अगर प्रति शिक्षक औसतन 4 बच्चों को पढ़ाने के हिसाब से 20,000 रुपए की हर महीने आय मानी जाए, तो बिहार में ट्यूशन बाजार हर महीने करीब 1,100 करोड़ रुपए का कारोबार कर रहा है.

जेईई, नीट या यूपीएससी कोचिंग सेंटर्स की कमाई शामिल नहीं
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि इसमें बड़ी जेईई, नीट या यूपीएससी कोचिंग सेंटर्स की बड़ी कमाई शामिल नहीं है, बल्कि यह सिर्फ छोटे होम ट्यूटरों और स्थानीय शिक्षकों का आंकड़ा है. जो इस बात को साबित कर रहा है कि यह एक बड़ा कारोबार बन चुका है. वहीं, अगर इसमें बड़ी जेईई, नीट या यूपीएससी कोचिंग सेंटर्स की कमाई शामिल कर ली जाए, तो आंकड़ा हैरान करने वाला होगा! 

​बिहार में कौन सा जिला सबसे आगे है?
खैर, आगे बढ़ते हैं और अब जानते हैं कि देशभर में बिहार छोटे स्तर पर ट्यूशन पढ़ाकर आजीविका कमाने के मामले में किस नंबर पर आता है. बिहार इस मामले में तीसरे नंबर पर आता है. इस लिस्ट में 18.31 लाख रजिस्ट्रेशन के साथ उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर है, जबकि 6.71 लाख रजिस्ट्रेशन के साथ पश्चिम बंगाल दूसरे स्थान पर है. बिहार के भीतर की बात करें, तो राजधानी पटना इस क्षेत्र में सबसे आगे है. यहां सबसे ज्यादा 49,853 शिक्षक रजिस्ट्रर्ड हैं. इसके बाद मुजफ्फरपुर (29,806), मधुबनी (25,408), दरभंगा (24,682), गया (23,853), समस्तीपुर (23,494), सारण (21,750) और भागलपुर (19,608) का नंबर आता है.

आत्मनिर्भर बन रही महिलाएं, घर पर बच्चों को पढ़ाकर कमा रही पैसा
ई-श्रम पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों के अनुसार, इस सेक्टर की सबसे खास बात यह है कि इसमें 18 से 40 साल की उम्र के 90.77 फीसदी युवा जुड़े हैं, जिससे पता चलता है कि यह युवाओं के लिए रोजगार का बड़ा सहारा है. साथ ही कुल रजिस्ट्रर्ड लोगों में करीब आधी संख्या महिलाओं की है. जो महिलाएं घर से बाहर जाकर जॉब नहीं कर सकती हैं. वे घर पर ही बच्चों को पढ़ाकर पैसा कमा रही हैं और आत्मनिर्भर भी बन रही हैं.

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About the Author

Shailendra

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शैलेंद्र जी न्यूज के रीजनल चैनल, जी बिहार झारखंड की डिजिटल टीम में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम करते हैं. वह बिहार और झारखंड की सियासत और क्राइम समेत कई समसामयिक मुद्दों पर न्यूज लिखते हैं. वह कभी-कभी राष्ट्रीय मुद्दों पर भी लिखते हैं. उनको मीडिया के तीनों प्रारूप प्रिंट, टेलीविजन और डिजिटल में काम करने का अनुभव. जनसंदेश टाइम्स, स्वतंत्र चेतना, टीवी 100, साधना न्यूज, एफएम न्यूज आदि न्यूज चैनलों से होते हुए न्यूज नेशन, इंडिया अहेड, ईटीवी भारत और न्यूज स्ट्रीट मीडिया (NYOOOZ) में अहम जिम्मेदारी निभाई. मीडिया जगत में सफर पिछले 12 सालों से बिना रुके जारी है.
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