आपदा में 'सारथी' बने विधायक: जब चंपारण तटबंध बचाने के लिए कंधों पर मिट्टी की बोरी उठा खुद भिड़ गए राजू तिवारी
पूर्वी चंपारण के गोविंदगंज बाढ़ की चपेट में है. यहां पर चंपारण तटबंध को टूटने से बचाने के लिए विधायक राजू तिवारी खुद मैदान में उतर गए. चंपारण तटबंध को बचाने के लिए MLA राजू तिवारी ने खुद कंधों पर मिट्टी की बोरियां ढोईं.
आपदा की इस कठिन घड़ी में जहां कई जनप्रतिनिधि जमीन से नदारद दिख रहे हैं. वहीं, पूर्वी चंपारण के गोविंदगंज से एक अलग ही तस्वीर सामने आई है. संकट के इस समय में राजनीति और औपचारिकता से ऊपर उठकर जनसेवा की मिसाल पेश करते हुए गोविंदगंज विधायक राजू तिवारी पूरी तरह बाढ़ प्रभावितों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं.
जब चंपारण तटबंध पर मंडराया खतरा तो आगे आए विधायक
घटना अरेराज प्रखंड के मननपुर की है, जहां चंपारण तटबंध पर अचानक मिट्टी धंसने से गहरा गड्ढा बन गया और तटबंध टूटने का खतरा मंडराने लगा. ग्रामीणों के बीच अफरा-तफरी का माहौल बन गया. जैसे ही इस रिसाव और कटाव की खबर विधायक राजू तिवारी को मिली, वे बिना वक्त गंवाए सीधे मौके पर पहुंचे. ग्रामीणों का मनोबल बढ़ाने के लिए विधायक ने अधिकारियों या मजदूरों का इंतजार किए बिना खुद ही बालू और मिट्टी से भरी बोरियां अपने कंधों पर उठानी शुरू कर दी.
अग्रिम पंक्ति में खड़े होकर रोका तटबंध का रिसाव
वायरल हो रही तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि विधायक अग्रिम पंक्ति में खड़े होकर आम ग्रामीणों की तरह मिट्टी की बोरियां डालकर तटबंध के कटाव को भरने में जुटे हुए हैं. सुबह से ही वे क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों में तटबंधों की स्थिति का जायजा ले रहे थे और मरम्मत कार्य की निगरानी कर रहे थे.
नगदाहां में भी स्लुइस गेट का रिसाव बंद कराने में डटे रहे
यह पहला मौका नहीं है जब विधायक इस तरह ज़मीन पर डटे दिखे हों. इससे पहले भी नगदाहां में रिंग बांध के पास बने स्लुइस गेट से हो रहे रिसाव को रोकने के लिए वे बुधवार सुबह से दोपहर तक बिना थके मौके पर डटे रहे. उनके इस सार्थक प्रयास की बदौलत ही पानी के तेज रिसाव पर काबू पाया जा सका था.
जनभावना से जुड़ी इस जमीनी पहल और विधायक के इस जनसेवक अवतार की पूरे इलाके में जमकर तारीफ हो रही है. ग्रामीणों का कहना है कि नेता वही है जो संकट के समय अपने क्षेत्र की जनता के साथ बाढ़ के पानी और मिट्टी में उतरकर उनका हौसला बढ़ाए.
रिपोर्ट: पंकज कुमार