Bihar Flood: मधेपुरा से लखीसराय और भागलपुर से बेगूसराय तक बाढ़ का असर, कहीं नावें बनीं सहारा तो कहीं चारे का गहराया संकट
Bihar Flood: बिहार में कोसी और गंगा के बढ़ते जलस्तर से बाढ़ की स्थिति गंभीर होती जा रही है. मधेपुरा, बेगूसराय, भागलपुर और लखीसराय के कई इलाकों में पानी फैल गया है। कहीं स्कूलों में पानी घुसने से पढ़ाई बंद है तो कहीं ग्रामीण नाव के सहारे आवागमन कर रहे हैं.
Bihar Flood: कोसी नदी के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि ने मधेपुरा जिले के चौसा और आलमनगर प्रखंड के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है. कई गांवों के आसपास बाढ़ का पानी फैलने लगा है. निचले इलाकों में पानी पहुंचने से जहां आवागमन प्रभावित हो रहा है, वहीं लोगों के सामने मवेशियों के लिए चारा जुटाने की समस्या भी खड़ी हो गई है. चौसा प्रखंड के कियर टोला स्थित उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय परिसर में पानी प्रवेश कर जाने के कारण विद्यालय का संचालन बंद कर दिया गया है. बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए विद्यालय के शिक्षकों और छात्रों को पास के दूसरे विद्यालय में शिफ्ट किया गया है. स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में नावों का परिचालन शुरू करा दिया है. चौसा प्रखंड में 16 निजी और 3 सरकारी नावों का परिचालन कराया जा रहा है. वहीं, आलमनगर प्रखंड में 36 स्थानों पर निजी नावों की व्यवस्था की गई है. इसके अलावा मोटरबोट और एसडीआरएफ की टीम को भी तैनात रखा गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया जा सके.
जिला प्रशासन के अनुसार, निचले इलाकों में पानी फैलने के कारण कुछ मार्ग प्रभावित हुए हैं. प्रशासन पूरे हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है. अधिकारियों का कहना है कि संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन पूरी तरह तैयार है. जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों के लिए सामुदायिक रसोई शुरू करने के साथ-साथ उन्हें सुरक्षित स्थानों पर विस्थापित करने की भी तैयारी की गई है. ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की ओर से बिजली, पानी और शौचालय की व्यवस्था कराई गई है, लेकिन अब सबसे बड़ी जरूरत पशु चारा और राहत सामग्री की है. पानी बढ़ने के कारण ग्रामीण अपने मवेशियों को सुरक्षित रखने के लिए ऊंचे स्थानों पर ले जाने लगे हैं. वहीं, कई परिवार भी अपने सामान को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की तैयारी में जुटे हैं.
ग्रामीणों के बीच सबसे अधिक चिंता मवेशियों को लेकर है. जलस्तर बढ़ने की स्थिति में पशुओं के लिए चारा उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती बन सकता है. लोगों ने प्रशासन से प्रभावित इलाकों में पर्याप्त मात्रा में पशु चारा और राहत सामग्री उपलब्ध कराने की मांग की है. इधर, कोसी के जलस्तर में वृद्धि का सिलसिला जारी रहने पर आने वाले दिनों में निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा और बढ़ सकता है. इससे ग्रामीणों में चिंता का माहौल है. हालांकि, जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए राहत और बचाव की तैयारियां पूरी हैं और स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है.
बेगूसराय में बाढ़ प्रभावित इलाकों का संजय झा ने लिया जायजा
बेगूसराय में गंगा के बढ़ते जलस्तर से बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है. बाढ़ के पानी ने कई इलाकों में ऐसी स्थिति पैदा कर दी है कि लोग अपने घरों को छोड़कर ऊंचे स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हैं. इसी बीच जेडीयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लेने बेगूसराय पहुंचे. संजय झा ने मटिहानी विधानसभा क्षेत्र के छितरौर गांव पहुंचकर बाढ़ पीड़ितों से मुलाकात की और उनकी समस्याओं की जानकारी ली. इस दौरान उन्होंने सरकार की ओर से हर संभव मदद का भरोसा दिलाया. उनके साथ जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा समेत पार्टी के कई नेता मौजूद रहे.
ये तस्वीरें बेगूसराय के मटिहानी विधानसभा क्षेत्र के छितरौर गांव की हैं, जहां पिछले कई दिनों से बाढ़ का पानी लोगों की मुश्किलें बढ़ा रहा है. बाढ़ की वजह से बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं और कई परिवार घर छोड़कर ऊंचे स्थानों पर रहने को मजबूर हैं. स्थानीय लोगों की परेशानी जानने के लिए जेडीयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा, प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा समेत कई जेडीयू नेता बाढ़ प्रभावित इलाके में पहुंचे. संजय झा ने बाढ़ पीड़ितों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और हर संभव सरकारी सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया. उन्होंने कहा कि बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने के लिए वे यहां पहुंचे हैं और सरकार पूरी तरह बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए तत्पर है. उन्होंने अधिकारियों को भी निर्देश दिया कि प्रभावित लोगों को किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए.
संजय झा ने कहा कि बाढ़ से हालात खराब हुए हैं. स्थिति का जायजा लेने के लिए हम लोग यहां पहुंचे हैं. सरकार बाढ़ पीड़ितों की हर संभव मदद के लिए तत्पर है. बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए चलाए जा रहे सामुदायिक रसोई का भी संजय झा ने जायजा लिया. उन्होंने वहां तैयार किए जा रहे भोजन की गुणवत्ता की जांच की और अधिकारियों से भोजन की व्यवस्था की जानकारी ली. संजय झा ने कहा कि बाढ़ पीड़ितों के लिए बेहतर भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है और सरकार की कोशिश है कि राहत शिविरों में रह रहे लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो. उन्होंने कहा कि सामुदायिक रसोई में बाढ़ पीड़ितों के लिए बेहतर भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है. गंगा का पानी धीरे-धीरे कम हो रहा है, लेकिन स्थिति अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है. सरकार हर स्तर पर मदद के लिए तत्पर है.
भागलपुर में 10 प्रखंड बाढ़ से प्रभावित, कई स्कूलों में घुसा पानी
भागलपुर जिले में 10 प्रखंड बाढ़ से प्रभावित हैं. गंगा के तटवर्ती क्षेत्र सबौर के बाबूपुर, रजन्दीपुर, संतनगर और बगडेर इलाके जलमग्न हैं. पानी भरने के कारण लोगों को आवागमन में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. क्षेत्र के आधा दर्जन से अधिक स्कूलों में पानी भर गया है, जिसके कारण स्कूलों को बंद कर दिया गया है. कई स्कूलों को दूसरे विद्यालयों से टैग किया गया है. बाबूपुर इलाके में छोटे-छोटे बच्चे नाव के जरिए लोगों को एक छोर से दूसरे छोर तक पहुंचाते नजर आए. यह स्थिति कहीं न कहीं बच्चों के लिए भी खतरे से कम नहीं है. बच्चों का कहना है कि स्कूल बंद है, इसलिए वे लोगों को पानी से बाहर पहुंचाने में मदद कर रहे हैं. स्थानीय बच्चों ने बताया कि बाढ़ के कारण उन्हें काफी परेशानी हो रही है. उनका कहना है कि हर साल स्कूल में पानी भर जाता है. अगर गंगा के किनारे रिंग बांध का निर्माण कराया जाए तो बाढ़ के दौरान होने वाली परेशानी को कम किया जा सकता है.
लखीसराय में बाढ़ से पशुपालकों की बढ़ी मुश्किलें, चारे का संकट
लखीसराय में बाढ़ विकराल रूप लेती जा रही है. बड़हिया, पिपरिया, लखीसराय और सूर्यगढ़ा प्रखंड की कई पंचायतों में बाढ़ का पानी फैल गया है. खेतों और निचले इलाकों में पानी भर जाने से पशुपालकों के सामने मवेशियों को सुरक्षित रखने के साथ-साथ उनके लिए चारे की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती बन गया है. बाढ़ से परेशान पशुपालक मवेशियों को लेकर मुख्य सड़कों और ऊंचे स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हैं. लेकिन पानी बढ़ने के साथ हरे चारे के अधिकांश स्रोत डूब गए हैं. ऐसे में मवेशियों का पेट भरना पशुपालकों के लिए मुश्किल हो गया है. पशुपालकों का कहना है कि मवेशी उनके परिवार की आजीविका का सहारा हैं, लेकिन संकट की इस घड़ी में उन्हें चारा तक उपलब्ध नहीं हो पा रहा है. पशुपालकों का आरोप है कि मंत्री और अधिकारी बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर लौट गए, लेकिन उन्हें अब तक कोई ठोस सरकारी सहायता नहीं मिली है. उनका कहना है कि अगर जल्द ही चारे की व्यवस्था नहीं की गई तो मवेशियों के सामने भूख का संकट और गहरा सकता है.
रिपोर्ट: राज किशोर (लखीसराय), अश्वनी कुमार (भागलपुर), जितेन्द्र चौधरी (बेगूसराय), प्रशांत कुमार (मधेपुरा)