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मुंगेर के नगर भवन में फरक्का जलसंधि पर आयोजित 'नीतीश संवाद' कार्यक्रम में सोमवार को जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा पहुंचे. इस दौरान उन्होंने केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह को अपना नेता बताकर दोनों के बीच चल रही अनबन की अटकलों पर पूरी तरह विराम लगा दिया है. हाल ही में हुए विधान परिषद चुनाव में अनंत सिंह और नीरज कुमार के मुद्दे को लेकर संजय झा और ललन सिंह के बीच मतभेद की चर्चाएं जोरों पर थी, लेकिन मुंगेर के मंच से संजय झा ने यह स्पष्ट कर दिया कि पार्टी में ललन सिंह को लेकर कोई मतभेद नहीं है.
वहीं, सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी राहुल राज के बीजेपी में शामिल होने के सवाल पर संजय झा ने कहा कि पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने 5 तारीख को पार्टी की एक बैठक बुलाई है. एमएलसी चुनाव में पार्टी किस स्थिति में लड़ी और क्या परिणाम रहे, इस पूरी स्थिति से अवगत होने के बाद ही इस पर कोई टिप्पणी करेंगे.
संजय झा ने मंच से संबोधित करते हुए कई बार ललन सिंह का नाम लेते हुए कहा कि फरक्का जलसंधि के मुद्दे पर हमारे नेता नीतीश कुमार हों, हमारे नेता ललन बाबू हों या हमारे युवा नेता निशांत कुमार हों, सभी एक साथ खड़े हैं. उन्होंने कहा कि ललन बाबू केंद्र में मंत्री हैं और हमारी मांग भी केंद्र सरकार से है, इस वजह से वे कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाए, लेकिन इस मुद्दे पर वे भी बिहारवासियों के साथ पूरी तरह खड़े हैं.
उन्होंने आगे कहा कि आज मेरा कार्यक्रम लखीसराय और मुंगेर में था, तो ललन बाबू ने मुझे फोन कर लखीसराय के कार्यक्रम की जानकारी ली और जब मैं मुंगेर के लिए निकल रहा था, तब भी उन्होंने मुझे फोन कर कार्यक्रम की पूरी जानकारी ली. संजय झा ने कहा कि ललन बाबू और मैं दोनों ही जल संसाधन मंत्री रह चुके हैं, इसलिए उन्हें बिहारवासियों की तकलीफ अच्छे से पता है और फरक्का जलसंधि के मुद्दे पर उनकी पूरी भावना पार्टी के साथ है.
बता दें कि फरक्का जलसंधि के मुद्दे पर आयोजित 'नीतीश संवाद' कार्यक्रम में जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा मुंगेर के नगर भवन पहुंचे थे, जहां उन्होंने वर्ष 1996 में हुई भारत-बांग्लादेश फरक्का संधि से बिहार को हो रहे नुकसान को लेकर लोगों को जागरूक किया. नेताओं ने कहा कि गंगा में गाद (सिल्ट) जमा होने से बाढ़ और कटाव की समस्या काफी बढ़ गई है. हमारे नेता नीतीश कुमार शुरू से ही इस मुद्दे को उठाते रहे हैं. चूंकि इस जलसंधि की अवधि दिसंबर 2026 में खत्म हो रही है, इसलिए पार्टी चाहती है कि इसके नवीकरण से पहले बिहार के हितों का पूरा ध्यान रखा जाए. उन्होंने यह भी बताया कि इस मुद्दे को लेकर विदेश मंत्री एस. जयशंकर का जवाब आया है और उन्होंने हमारी मांग को सकारात्मक बताते हुए इस पर उचित पहल करने की बात कही है.
रिपोर्ट: प्रशांत कुमार