App

बिहार में कैसे तय होते हैं RTO कोड, जिलों को कैसे अलॉट होते हैं नंबर?

बिहार में कैसे तय होते हैं RTO कोड, जिलों को कैसे एलॉट होते हैं नंबर? अगर आप भी ये जानना चाहते हैं तो ये खबर आपके बेहद काम की है. बता दें कि बिहार में जारी होने वाले नंबर प्लेट का फॉर्मेट CMVR के तहत तय होता है.

बिहार में कैसे तय होते हैं RTO कोड, जिलों को कैसे अलॉट होते हैं नंबर?
Image Credit: बिहार में कैसे तय होते हैं RTO कोड, जिलों को कैसे एलॉट होते हैं नंबर?

सड़कों पर दौड़ती गाड़ियों की नंबर प्लेट सिर्फ एक पहचान नहीं, बल्कि उस वाहन का पूरा पता बयां करती है. बिहार में किसी गाड़ी पर 'BR-01' लिखा दिखे तो फौरन समझ आ जाता है कि यह राजधानी पटना की है, वहीं 'BR-06' देखते ही मुजफ्फरपुर का नाम आता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि किसी जिले को कोई खास नंबर कैसे मिलता है और यह पूरा सिस्टम काम कैसे करता है? आइए समझते हैं कि बिहार में RTO कोड कैसे तय किया जाता है और जिलों को नंबर कैसे अलॉट किया जाता है.

बिहार में वाहनों के रजिस्ट्रेशन के लिए आरटीओ कोड का आवंटन जिला-वार और प्रशासनिक गठन के ऐतिहासिक क्रम के आधार पर किया जाता है. आरटीओ कोड के आवंटन के नियम और संरचना को आप नीचे आसानी से समझ सकते हैं-

नंबर प्लेट की संरचना
बिहार में जारी होने वाले सामान्य नंबर प्लेट का फॉर्मेट केंद्रीय मोटर वाहन अधिनियम (Central Motor Vehicles Rules (CMVR)) के तहत तय होता है-
BR−01−AB−1234
BR- राज्य का कोड (बिहार - Bihar).
01- जिले/आरटीओ कार्यालय का कोड (District/RTO Identifying Code).
AB- उस आरटीओ की वर्तमान में चल रही अल्फाबेटिकल सीरीज.
1234- उस श्रृंखला में 0001 से 9999 के बीच वाहन को मिला 4 अंकों का नंबर.

आरटीओ कोड किस आधार पर बांटे गए?
बिहार में BR के बाद आने वाले दो अंकों के जिले के कोड का आवंटन प्रशासनिक विभाजन और जिलों के गठन के कालक्रम पर आधारित रहा है. जब यह व्यवस्था लागू की गई, तो राज्य के सबसे प्रमुख और पुराने जिला मुख्यालयों को शुरुआती नंबर दिए गए. BR-01- पटना (मुख्यालय), BR-02: गया, BR-03- भोजपुर (आरा), BR-04- सारण (छपरा), BR-05- मोतिहारी (पूर्वी चंपारण), BR-06- मुजफ्फरपुर, BR-07- दरभंगा, BR-08: मुंगेर, BR-09- बेगूसराय, BR-10- भागलपुर और BR-11- पूर्णिया.  बता दें कि साल 2000 में झारखंड अलग होने से पहले झारखंड के जिलों को भी इसी क्रम में कोड मिले थे.

नए जिलों का गठन, BR-21 से आगे
जैसे-जैसे पुराने बड़े जिलों का विभाजन होकर नए जिले बने, उन्हें बाद के सिक्वेनियल नंबर दिए गए. नालंदा (BR-21), जहानाबाद (BR-25), पश्चिम चंपारण(BR-22), गोपालगंज (BR-28), सिवान (BR-29), सीतामढ़ी (BR-30), वैशाली (BR-31), समस्तीपुर (BR-33). बाद के वर्षों में बने नए जिलों को 40 और 50 की सीरीज मिली.

सीरीज और 4 अंकों का नंबर कैसे तय होता है?
जिले का कोड तय होने के बाद वाहन को अक्षरों की सीरीज मिलती है. हर आरटीओ में यह 'A' से शुरू होकर 'Z' तक, फिर 'AA', 'AB' से 'AZ', और फिर आगे बढ़ती है. कुछ आरटीओ में कमर्शियल और प्राइवेट के लिए अलग-अलग सीरीज अलॉट की जाती हैं (जैसे व्यावसायिक टैक्सियों/बसों के लिए विशेष सीरीज 'P', 'T' या 'G').

कंप्यूटराइज्ड रैंडम या सीक्वेंशियल अलॉटमेंट-
फिलहाल केंद्रीय 'वाहन' (VAHAN 4.0) पोर्टल के जरिए डीलर स्तर पर ही रजिस्ट्रेशन होता है. जब कोई गाड़ी बिकती है, तो सिस्टम चालू सीरीज में उपलब्ध अगला सीक्वेंशियल 4 अंकों का नंबर अलॉट कर देता है.

वीआईपी और च्वाइस नंबर
यदि कोई वाहन मालिक अपनी पसंद का नंबर (जैसे 0001, 0786, 1111, 9999 या कोई जन्मतिथि) लेना चाहता है, तो इसके लिए सामान्य सीक्वेंशियल अलॉट लागू नहीं होता. इसके लिए परिवहन विभाग के फैंसी नंबर पोर्टल (Fancy Number Auction) पर ऑनलाइन बोली (ई-नीलामी) या तय सरकारी राशि जमा करना अनिवार्य होता है.

नया विकल्प: 'BH' सीरीज (भारत सीरीज)
यदि वाहन मालिक केंद्र सरकार, राज्य सरकार, पीएसयू या 4 से अधिक राज्यों में कार्यालय रखने वाली निजी कंपनियों का कर्मचारी है, तो उसे राज्य कोड (BR) के बजाय अखिल भारतीय BH सीरीज (उदा. 26 BH 1234 AA) का नंबर अलॉट किया जाता है. इसके तहत राज्य बदलने पर दोबारा रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं होती.

Add Zee News as a Preferred Source

About the Author

Ranjana Kumari

Ranjana Kumari

रंजना कुमारी Zee Bihar Jharkhand की डिजिटल टीम में बतौर Sub-Editor अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं. बिहार के सिवान जिले के जीरादेई से ताल्लुक रखने वाली रंजना स्थानीय और जमीनी मुद्दों पर गहरी पकड़ रखती हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में वे मुख्य रूप से राजनीति, क्राइम, यूटिलिटी और देश-दुनिया की अहम रूटीन खबरों को प्रमुखता से कवर करती हैं. Zee Media का हिस्सा बनने से पहले रंजना ने न्यूज इंडिया 24x7 में भी डेढ़ साल तक अपनी सेवाएं दी थीं. एकेडमिक की बात करें तो रंजना GJU से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर रही हैं.
Read More