SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

प्रेतशिला पर्वत की मान्यता: प्रेतयोनि से मुक्ति का मार्ग, पिंडदान के बाद ठहाका लगाने का विधान

गया शहर से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर प्रेतशिला नाम का पर्वत है. इस पर्वत की चोटी पर प्रेतशिला नाम की वेदी बनी हुई है, लेकिन पूरे पर्वतीय प्रदेश को प्रेतशिला के नाम से भी जाना जाता है. मान्यता है कि यहां पिंडदान करने से प्रेत योनि से मुक्ति मिलती है.

Written By K. Raj Mishra
Published: Sep 28, 2026, 08:57 AM IST | Updated: Sep 28, 2026, 09:19 AM IST
Image Credit: प्रेतशिला पर्वत की मान्यता (Zee Media)
Join

बिहार के गयाजी जिले में विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला की शुरुआत हो चुकी है. पितृपक्ष मेले के दौरान गया धाम की मुख्य वेदियों में से एक प्रेतशिला पिंडवेदी पर पिंडदान का विधान है. प्रेतशिला को प्रेतों का पहाड़ कहा जाता है. गया शहर से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर प्रेतशिला नाम का पर्वत है. ये गया धाम के उत्तर-पश्चिम दिशा में स्थित है. इस पर्वत की चोटी पर प्रेतशिला नाम की वेदी बनी हुई है, लेकिन पूरे पर्वतीय प्रदेश को प्रेतशिला के नाम से भी जाना जाता है. इस प्रेत पर्वत की ऊंचाई लगभग 975 फीट है. प्रेतशिला के मूल भाग यानी पर्वत के नीचे ही ब्रह्मकुण्ड में स्नान-तर्पण के बाद श्राद्ध का विधान है. कहा जाता है कि इसका प्रथम संस्कार ब्रह्मा जी द्वारा किया गया था. श्राद्ध के बाद पिण्ड को ब्रह्मकुण्ड में स्थान देकर प्रेत पर्वत पर जाते हैं. जो लोग सक्षम होते हैं, वो लगभग 676 सीढ़ियां चढ़कर प्रेतशिला नाम की वेदी पर पिंडदान करने के लिए जाते हैं.

क्या है पौराणिक मान्यता?

वायुपुराण के अनुसार, इस प्रेतशिला पर अकाल मृत्यु को प्राप्त लोगों का श्राद्ध व पिण्डदान करने का विशेष महत्व बताया गया है. इस पर्वत पर पिंडदान करने से अकाल मृत्यु को प्राप्त पूर्वजों तक पिंड सीधे पहुंच जाते हैं, जिनसे उन्हें कष्टदायी योनियों से मुक्ति मिल जाती है. इस पर्वत को प्रेतशिला के अलावा प्रेत पर्वत, प्रेतकला एवं प्रेतगिरि भी कहा जाता है. प्रेतशिला पहाड़ी की चोटी पर एक चट्टान है, जिस पर ब्रह्मा, विष्णु और महेश की मूर्ति बनी हुई है. 

सत्तु उड़ाने क्यों है परंपरा?

श्रद्धालुओं द्वारा पहाड़ी की चोटी पर स्थित इस चट्टान की परिक्रमा कर के उस पर सत्तु से बना पिंड उड़ाया जाता है. प्रेतशिला पर सत्तू उड़ाने की पुरानी परंपरा है. कहा जाता है कि इस चट्टान के चारों तरफ 5 से 9 बार परिक्रमा कर सत्तू चढ़ाने से अकाल मृत्यु में मरे पूर्वज प्रेत योनि से मुक्त हो जाते हैं और वो मोक्ष को प्राप्त कर जाते है. यहां श्राद्ध और पिंडदान करने से पितरों को प्रेत योनि से मुक्ति मिलती है, इसलिए इस प्रेतशिला पर पिंडदान के लिए न केवल बिहार के बल्कि भारत के कोने- कोने से लोग अपने पूर्वज की मुक्ति के लिए यहां पिंडदान करते है.

पंडा शिवा पांडे के मुताबिक

इस संबंध में प्रेतशिला वेदी के धामी पंडा शिवा पांडे ने बताया कि जो लोग अकाल मृत्यु यानी जहर खाकर, फांसी लगाकर, डूब कर मर जाते हैं, उनकी आत्मा भ्रमण करती है. इस स्थान पर उनका पिंडदान और तर्पण करने से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है. उन्होंने कहा कि यहां दो स्थान हैं, नीचे में जो तालाब है वो ब्रह्मा कुंड है और ऊपर जो पर्वत है वो प्रेतशिला है. पंडा शिवा पांडे ने बताया कि 676 सीढ़ियां चढ़कर लोग पिंडदान करते हैं. वहां ब्रह्मा जी का चरण है. जिसमें गदा त्रिशूल एवं अन्य चीज बना हुआ है और वहां तीन सोने की लकीर है, जो तीन प्रेत है.

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

कर्मराज मिश्रा ज़ी न्यूज (डिजिटल) टीम में बतौर चीफ सब एडिटर कार्यरत हैं. वे यहां देश-विदेश की राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लिखते हैं. कानपुर यूनीवर्सिटी से पत्रकारिता में मास्टर की डिग्री हासिल करके IBN-7 न्यूज चैनल से इंटर्नशिप की. इसके बाद खबर फास्ट, नेशन लाइव और साधना न्यूज न्यूज चैनलों में काम करने के बाद डिजिटल का रुख किया और 2017 से 2020 तक हिंदुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में बतौर सीनियर सब एडिटर काम किया. इसके बाद News Nation, India Ahead के बाद वर्तमान में Z Media का हिस्सा हैं. मीडिया में 10 साल के कार्यकाल के दौरान यूपी, बिहार, छत्तीसगढ़ और दिल्ली विधानसभा चुनावों के अलावा 2019 और 2024 का लोकसभा चुनाव कवर किया है.
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES