गया पितृपक्ष मेला: पंचमी तिथि पर त्रिदेवों के चरणों में पिंडदान, पूर्वजों की शांति के लिए उमड़े लाखों श्रद्धालु
Pitru Paksha 2026: पितृपक्ष की पंचमी तिथि पर गया जी में देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालु रुद्रपद, ब्रह्मपद और विष्णुपद वेदियों पर पिंडदान कर रहे हैं. पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष आस्था देखने को मिल रही है.
Pitru Paksha 2026: गया जी में पितृपक्ष मेले की शुरुआत हो गई है. बीते 25 सितंबर से गया जी में मेले की शुरुआत हुई थी. गया जी में देश-विदेश से लोग यहां आते हैं और अपने पितरों का श्राद्ध-तर्पण करते हैं. उसी क्रम में आज पितृपक्ष की पंचमी तिथि है. इस पावन तिथि पर भगवान त्रिदेव यानी ब्रह्मा, विष्णु और महेश के चरणों के प्रतीक रुद्रपद, ब्रह्मपद और विष्णुपद वेदियों पर पिंडदान का विशेष विधान है. देश-विदेश से आए लाखों श्रद्धालु अपने पितरों की आत्मा की शांति और अक्षय मोक्ष की कामना के साथ इन तीन प्रमुख वेदियों पर आहुति दे रहे हैं.
रुद्रपद, ब्रह्मपद और विष्णुपद पर पिंडदान का विशेष विधान
मोक्ष की नगरी गया जी में पंचमी तिथि का विशेष आध्यात्मिक महत्व है. गया जी में ऐसी मान्यता है कि विष्णुपद मंदिर परिसर में स्थित रुद्रपद, ब्रह्मपद और विष्णुपद वेदियों पर एक साथ पिंडदान करने से पूर्वजों को हर प्रकार के जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिल जाती है. श्रद्धालुओं का मानना है कि आज के दिन त्रिदेवों की चरण वेदियों पर जल, तिल और जौ अर्पित करने मात्र से पितर तृप्त होकर वैकुंठ धाम की ओर प्रस्थान करते हैं.
भगवान रुद्र तामसिक कष्टों का निवारण करते हैं
शास्त्रों में विधान है कि भगवान रुद्र तामसिक कष्टों का निवारण करते हैं, ब्रह्मा जी कुल और संतान वृद्धि का आशीर्वाद देते हैं, तो वहीं भगवान विष्णु का चरण चिन्ह पितरों को परम मोक्ष प्रदान करता है. पंचमी तिथि पर इन तीनों वेदियों का त्रिवेदी श्राद्ध त्रिगुण दोषों को नष्ट कर पूरे वंश को पितृदोष से मुक्त करता है. मंदिर प्रशासन और पुलिस बल की ओर से इस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं.
गया जी में पिंडदान से पितरों को मिलता है मोक्ष
ऐसा कहा जाता है कि गया जी में किया गया पिंडदान सीधे भगवान विष्णु स्वीकार करते हैं. पंचमी तिथि पर रुद्रपद, ब्रह्मपद और विष्णुपद इन तीनों वेदियों पर शीश नवाकर आहुति देने से कई जन्मों के पितृदोष कट जाते हैं. गाया जी आस्था का यह सैलाब बता रहा है कि अपने पूर्वजों के प्रति सनातन धर्म की श्रद्धा कितनी अटूट है.
रिपोर्ट: जय प्रकाश कुमार