जहानाबाद के पूर्व विधायक और मगध विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. डॉक्टर सच्चिदानंद यादव का असामयिक निधन हो गया है. करीब एक महीने से ब्रेन हेमरेज से जूझ रहे सच्चिदानंद बाबू ने अस्पताल से जहानाबाद लौटते वक्त रास्ते में ही अंतिम सांस ली. उनके निधन से न सिर्फ राजद परिवार, बल्कि पूरे शिक्षा जगत में गहरा शोक है. शुक्रवार (2 अक्टूबर) को उनके पैतृक गांव इमलियाचक से नम आंखों के साथ अंतिम शव यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए.
कार्यकर्ताओं और नेताओं ने दी श्रद्धांजलि
कड़ौना थाना क्षेत्र स्थित इमलियाचक गांव में आज हर आंख नम थी. 62 वर्षीय प्रो. सच्चिदानंद यादव को एक महीने पहले ब्रेन हेमरेज हुआ था. पटना के बाद उन्हें गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 21 दिनों तक वे जिंदगी की जंग लड़ते रहे. डॉक्टरों की सलाह पर जब उन्हें वापस एम्बुलेंस से जहानाबाद लाया जा रहा था, तभी रास्ते में ही उन्होंने हमेशा के लिए अपनी आंखें बंद कर लीं. शुक्रवार सुबह उनके पार्थिव शरीर को पार्टी कार्यालय और जिला परिषद ले जाया गया, जहां कार्यकर्ताओं और नेताओं ने श्रद्धांजलि दी.
बेदाग और बेहद सरल रहा उनका सफर
राजद विधायक राहुल कुमार ने बताया कि सच्चिदानंद बाबू का जाना हमारी पार्टी के साथ-साथ पूरे समाज के लिए अपूरणीय क्षति है. उन्होंने जिस सादगी और निष्ठा के साथ जीवन जिया, वह हम सबके लिए प्रेरणा है. पंचायती राज से लेकर विधानसभा और मगध विश्वविद्यालय तक, उनका सफर बेदाग और बेहद सरल रहा. हमने आज अपना एक मजबूत सिपाही खो दिया है.
बिहार विधानसभा में अंतिम दर्शन
बता दें कि प्रो. सच्चिदानंद यादव राजनीति के साथ-साथ शिक्षा जगत का भी एक बड़ा नाम थे. साल 2001 में जिला पार्षद बनकर उन्होंने अपनी पहचान बनाई. इसके बाद साल 2005 के फरवरी और फिर अक्टूबर में हुए मध्यावधि चुनाव में लगातार दो बार राजद के टिकट पर विधायक चुने गए. जहानाबाद के एस.एस. कॉलेज में वर्षों तक छात्रों को पढ़ाने के बाद वे मगध विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष रहे. मिली जानकारी के अनुसार, उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए बिहार विधानसभा ले जाया जा रहा है, जिसके बाद राजधानी पटना में ही उनका अंतिम संस्कार संपन्न होगा.
रिपोर्ट: मुकेश कुमार