)
सिवान में मत्स्य पालन अब किसानों के साथ-साथ युवाओं के लिए भी रोजगार और स्वरोजगार का बड़ा जरिया बनता जा रहा है. जिले में बड़ी संख्या में किसान आधुनिक तरीके से मछली पालन की ओर बढ़ रहे हैं. वहीं, बिहार सरकार का मत्स्य विभाग भी किसानों और युवाओं को लगातार जागरूक कर रहा है और तकनीकी प्रशिक्षण के जरिए उन्हें इस व्यवसाय से जोड़ने का प्रयास कर रहा है.
बिहार सरकार ने सिवान में मत्स्य पालन को और गति देने के लिए अब बड़े स्तर पर आधारभूत संरचना विकसित करने की तैयारी की है. नाबार्ड के माध्यम से सिवान के मत्स्य क्षेत्र के लिए करीब 195 करोड़ रुपये की वित्तीय मदद से जुड़ी परियोजना को मंजूरी मिली है. बसंतपुर, भगवानपुर हाट और गोरेयाकोठी को इस परियोजना में शामिल किया गया है. इन तीनों प्रखंडों में क्लस्टर विकसित कर मत्स्य किसानों को एक साथ जोड़ने और उत्पादन को बढ़ाने की तैयारी है.
परियोजना का लक्ष्य सिवान में मछली उत्पादन को मौजूदा स्तर से बढ़ाकर लगभग दोगुना करना है. सरकारी योजनाओं के जरिए किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी जानकारी और आधुनिक मत्स्य पालन की तकनीकों से जोड़ा जा रहा है.
भगवानपुर हाट प्रखंड के महम्मदपुर में मनोज सहनी कई वर्षों से बड़े पैमाने पर मछली पालन कर रहे हैं. करीब 100 एकड़ क्षेत्र में तालाबों के जरिए मछली उत्पादन का काम चल रहा है. यहां सिर्फ मछली का उत्पादन ही नहीं होता, बल्कि मछली के दाने यानी फिश फीड की तैयारी भी की जाती है.
मछली पालन से जुड़े लोगों को यहां रोजगार मिल रहा है, जबकि बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश तक मछली की सप्लाई की जा रही है यानी एक तालाब से शुरू होने वाला यह कारोबार अब उत्पादन, फीड, मजदूरी, परिवहन और बाजार तक रोजगार की पूरी श्रृंखला तैयार कर रहा है.
रिपोर्ट: अमित सिंह