'मुझे मेरा हिस्सा दो, नहीं तो मैं अपने बेटे को फेंक दूंगा', गिरिडीह में 120 फीट ऊंची टंकी पर चढ़ा शख्स, पुलिस ने समझाया तो नीचे आया
गिरिडीह जिला में एक पिता अपने 4 साल के बेटे को लेकर 120 फीट ऊंची टंकी पर चढ़ गया. वही से वह अपने हिस्से के लिए जोर-जोर से चिल्लाने लगा. उसने कहा कि 'मुझे मेरा हिस्सा दो, नहीं तो मैं अपने ही कलेजे के टुकड़े को यहीं से फेंक दूंगा. हालांकि, पुलिस के समझाने के बाद वह पानी की टंकी से नीचे उतर आया.
4 साल के मासूम को क्या पता था कि उसका पिता उसे कहां लेकर जा रहा है? उसे क्या पता था कि जिस गोद में वह खुद को सबसे सुरक्षित महसूस करता है, वही गोद उसे 120 फीट ऊंची मौत की टंकी के किनारे पर ले जाएगी. जी हां, यह रूह कंपा देने वाला फिल्मी मंजर गिरिडीह के अजीडीह स्थित नेत्रहीन विद्यालय के पास देखने को मिला, जहां हिस्सा बंटवारे से आहत पिता महादेव तिवारी अपने ही 4 साल के बेटे को गोद में उठाकर पानी की टंकी पर चढ़ गया.
टंकी पर पहुंचते ही महादेव जोर-जोर से चीखने लगा- 'मुझे मेरा हिस्सा दो, नहीं तो मैं अपने ही कलेजे के टुकड़े को यहीं से फेंक दूंगा और खुद भी कूद जाऊंगा'. ऊपर बाप के हाथों में मासूम और नीचे सैकड़ों लोगों की भीड़... हर आंख में खौफ और हर दिल में एक ही दुआ थी. वह मासूम तो बस पिता के सीने से चिपका सहमा-सहमा नीचे देख रहा था. उसे समझ ही नहीं था कि उसका पिता क्या करने जा रहा है और नीचे इतनी भीड़ क्यों है? उसके लिए तो पिता की गोद ही उसकी पूरी दुनिया थी.
खबर फैलते ही पूरे इलाके में हड़कंप मच गया. देखते ही देखते टंकी के नीचे ग्रामीणों का हुजूम उमड़ पड़ा. सूचना मिलते ही सीओ जितेंद्र प्रसाद और महतोडीह पिकेट प्रभारी शैलेंद्र कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे. पुलिस के लिए यह सबसे बड़ी परीक्षा थी. एक गलत शब्द मासूम की जान ले सकता था. पुलिस ने बेहद संयम से काम लिया. नीचे से ही उसे समझाने का सिलसिला शुरू हुआ, भाई नीचे आ जाओ, हम तुम्हारी पूरी बात सुनेंगे, तुम्हें पूरा इंसाफ मिलेगा. कभी वह बच्चे को टंकी के किनारे लाता, तो नीचे खड़े सभी लोगों की चीख निकल जाती.
करीब एक घंटे तक यह हाई वोल्टेज ड्रामा चलता रहा. आखिरकार पुलिस और ग्रामीणों के इंसाफ के आश्वासन पर उसका दिल पसीजा और वह अपने मासूम को गोद में लिए सकुशल नीचे उतर आया. नीचे उतरते ही पुलिस ने फौरन बच्चे को उसकी मां के हवाले किया. फिलहाल, पुलिस की मौजूदगी में परिवार के बीच बैठक कर विवाद सुलझाने की कोशिश की जा रही है, ताकि यह बेबस पिता दोबारा अपने ही खून को दांव पर लगाने जैसा खौफनाक कदम न उठाए.
रिपोर्ट: मृणाल सिन्हा
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